मदर डेयरी की नई पहल, इस्तेमाल के बाद खुद-ब-खुद मिट्टी में मिल जाएगी दूध की थैली, जानें क्या कीमतों पर पड़ेगा असर

Gaon Connection | Jun 02, 2026, 17:37 IST
मदर डेयरी ने भारत की पहली प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाली दूध की थैली लॉन्च की है। कंपनी 5 जून से दिल्ली-एनसीआर में अपने काउ मिल्क पैक में इसका उपयोग शुरू करेगी। नई पैकेजिंग कुछ वर्षों में मिट्टी में प्राकृतिक तत्वों में बदल जाएगी और इससे दूध की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने इसे विकसित करने में चार साल से अधिक समय लगाया।

देश की प्रमुख डेयरी कंपनी मदर डेयरी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत की पहली ऐसी दूध की थैली पेश की है, जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नष्ट हो सकती है। कंपनी का दावा है कि यह नई पैकेजिंग पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई स्थायी अवशेष नहीं छोड़ेगी और कुछ वर्षों के भीतर प्राकृतिक तत्वों में बदल जाएगी।



5 जून से दिल्ली-एनसीआर में होगी शुरुआत

मदर डेयरी 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस से दिल्ली-एनसीआर में बिकने वाले अपने गाय के दूध (काउ मिल्क) के पैक में इस नई डिग्रेडेबल थैली का इस्तेमाल शुरू करेगी। कंपनी का कहना है कि यह पहल प्लास्टिक कचरे को कम करने और टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



विशेष तकनीक से तैयार हुई नई पैकेजिंग

कंपनी के अनुसार, इस नई थैली में पहली बार ऐसी डिग्रेडेबल पैकेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया है जो समय के साथ बायो-अवेलेबल वैक्स में बदल जाती है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) इसे प्राकृतिक तत्वों में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रक्रिया के बाद पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं बचता।



चार साल के शोध के बाद तैयार हुई तकनीक

मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्था चारी ने कहा कि इस विशेष पैकेजिंग को विकसित करने में चार वर्ष से अधिक समय तक शोध और परीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि नई थैलियां पूरी तरह रिसाइकिल योग्य रहेंगी, लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे समय के साथ प्राकृतिक तत्वों में बदल जाएंगी, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।



दूध की कीमतों पर नहीं पड़ेगा असर

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष मीनेश शाह ने कहा कि नई पैकेजिंग अपनाने के बावजूद उपभोक्ताओं को दूध की कीमत में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह थैली सदियों तक बने रहने वाले पारंपरिक प्लास्टिक की तुलना में कुछ वर्षों के भीतर ही मिट्टी में नष्ट हो जाएगी।



पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

मीनेश शाह ने कहा कि मदर डेयरी की यह पहल डेयरी क्षेत्र में टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण के नए मानक स्थापित करेगी। उन्होंने इसे भारत के डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।



रोजाना 55 लाख लीटर दूध बेचती है मदर डेयरी

मदर डेयरी देश की प्रमुख दूध आपूर्ति कंपनियों में से एक है और कई राज्यों में प्रतिदिन करीब 55 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है। वर्ष 1974 में स्थापित यह कंपनी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कंपनी 'मदर डेयरी' ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों के अलावा 'धारा' ब्रांड से खाद्य तेल तथा 'सफल' ब्रांड के तहत फल, सब्जियां और फ्रोजन फूड उत्पाद भी बेचती है।

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