MP–UP Sahyog Sammelan-2026: ODOP, हस्तशिल्प और पर्यटन को बढ़ावा, दोनों राज्यों ने तैयार की रणनीति
‘एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन-2026’ में मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहानीकार और गीतकार नीलेश मिसरा की तारीफ करते हुए कहा, नीलेश मिसरा ने कहानियों को सहजता के साथ कहा, जिसमें प्राचीन परंपराओं के दौर को नए जमाने के सामने लाने का काम किया। हमारे यहाँ तो श्रुति और स्मृति की परंपरा रही है, जिसे आप ने नई ऊचाइयां दी हैं।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए आयोजित ‘एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन-2026’ का मुख्य फोकस निवेश, निर्यात, एक जिला एक उत्पाद (ODOP), हस्तशिल्प और पर्यटन को बढ़ावा देना रहा। आयोजन में दोनों राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय सहयोग को नई दिशा देने के साथ आर्थिक विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार किया। ODOP, जीआई-टैग उत्पाद, पारंपरिक हस्तशिल्प, निर्यात और निवेश जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहानीकार और गीतकार नीलेश मिसरा की कहानियों की तारीफ करते हुए कहा, नीलेश मिसरा ने कहानियों को सहजता के साथ प्राचीन वार्ता का दौर लाने का काम किया है। हमारे यहाँ तो श्रुति और स्मृति की परंपरा रही है, जिसे आप ने नई ऊचाइयां दी हैं।
वहीं, नीलेश मिसरा ने कहा कि एमपी से हमारी बहुत सी यादें जुड़ी हुई हैं। रीवा में गुजारे अपने बचपन की यादें साझा करते हुए मिसरा ने कहा, मैं अपने अंदर दोनों राज्यों की साझी विरासत लेकर चलता हूँ। मेरा पहला गाँव कनेक्शन एमपी में ही बना। हमने यात्रा शुरू की है ओडीओपी कैंपेन की यूपी में। ये जो पहल हैं बहुत ही यूनिक हैं। पहली बार दो राज्य एक साथ हमारे ज़मीनी कारीगरों की कहानियाँ कहना चाह रहे हैं। इन दो राज्यों में जितना सघन हिस्सा है, उतना कहीं नहीं मिलेगा। इनकी कहानियों को कहने के लिए हमें बहुत सारे डाकिए चाहिए।
ODOP और GI उत्पादों को मिलेगा नया बाजार
सम्मेलन में ODOP और जीआई-टैग उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश की ODOP पहल के सफल मॉडल को साझा किया गया, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की रणनीति तैयार हुई। दोनों राज्यों ने साझा ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए निर्यात बढ़ाने पर सहमति जताई।
MoU के जरिए सहयोग को मिला औपचारिक रूप
सम्मेलन के दौरान व्यापार, निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प और पर्यटन के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उद्योगों, उद्यमियों और कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा करना है। इससे स्थानीय उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी ब्रांड वैल्यू भी बढ़ेगी।
उद्योग, निवेश और रोजगार पर फोकस
इस आयोजन में उद्योगपतियों, निवेशकों, कारीगरों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच मिला, जहां निवेश के अवसर, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स पर चर्चा हुई। कपड़ा, हस्तशिल्प, एमएसएमई, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
प्रदर्शनी में दिखी राज्यों की ताकत
सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश के ODOP उत्पाद, जीआई-टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन स्थलों को प्रदर्शित किया गया। इसने निवेशकों को राज्यों की संभावनाओं को करीब से समझने का मौका दिया।
गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर की शुरुआत
सम्मेलन की एक खास उपलब्धि ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की शुरुआत रही। इसके तहत मध्य प्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी कारीगर, उत्तर प्रदेश के बनारसी रेशम कारीगरों के साथ मिलकर काम करेंगे। यह पहल पारंपरिक हस्तशिल्प को नए बाजारों से जोड़कर कारीगरों की आय बढ़ाने में मदद करेगी।
पर्यटन में संयुक्त सर्किट पर जोर
पर्यटन क्षेत्र में ‘काशी-उज्जैन-चित्रकूट सर्किट’ को विकसित करने पर भी सहमति बनी। इस पहल से धार्मिक पर्यटन को और व्यवस्थित व आकर्षक बनाया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या और ठहराव अवधि बढ़ेगी।