MSP Scheme: फसलों पर कैसे तय होता है MSP, किसानों को कैसे मिलता है फायदा, जानिए सरकार कैसे करती है फसलों की खरीद

Mansi | Aug 05, 2026, 12:56 IST
केंद्र सरकार 22 कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है। यह मूल्य कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित होता है। वर्ष 2018-19 से उत्पादन लागत पर कम से कम 50% लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों को सीधे बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था की गई है। सरकार खेती को लाभकारी बनाने हेतु विभिन्न योजनाएँ संचालित कर रही है।
MSP के तहत किसानों की उपज की सरकारी खरीद का उद्देश्य उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाना और कृषि आय को मज़बूत करना है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार हर वर्ष 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों, राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के सुझावों के आधार पर MSP निर्धारित करती है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए खरीद व्यवस्था को लगातार मज़बूत किया जा रहा है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एमएसपी का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचाया जा रहा है।



MSP को लेकर किसानों के बीच अक्सर यह सवाल रहता है कि किन फसलों की सरकारी खरीद होती है, MSP कैसे तय किया जाता है और किसानों को इसका लाभ किस तरह मिलता है। सरकार ने लोकसभा में इन सभी सवालों के जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2018-19 से सभी 22 MSP फसलों पर उत्पादन लागत का कम-से-कम 50 % लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और किसानों के अनुकूल बनाने के लिए कई सुधार भी किए गए हैं।



2018 से उत्पादन लागत पर कम-से-कम 50 % लाभ

सरकार के अनुसार, वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में यह निर्णय लिया गया था कि किसानों को उनकी फसलों की उत्पादन लागत पर कम-से-कम डेढ़ गुना (50 % लाभ) मूल्य सुनिश्चित किया जाएगा। इसी नीति के तहत खरीफ़, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के MSP में लगातार वृद्धि की जा रही है।



किस फसल की खरीद कौन-सी एजेंसी करती है?

सरकार ने बताया कि जब किसी फसल का बाज़ार भाव MSP से नीचे चला जाता है, तब सरकारी एजेंसियाँ किसानों से खरीद करती हैं। गेहूँ, धान और मोटे अनाज की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकारों की एजेंसियाँ करती हैं। दलहन, तिलहन और कोपरा की खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM AASHA) के तहत नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। कपास की खरीद भारतीय कपास निगम (CCI) और जूट की खरीद भारतीय पटसन निगम (JCI) द्वारा की जाती है।



खरीद केंद्र बढ़े, भुगतान सीधे बैंक खाते में

सरकार ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए उत्पादन, भंडारण और परिवहन जैसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी और अस्थायी खरीद केंद्र खोले जाते हैं। इसके अलावा एमएसपी खरीद प्रक्रिया में सुधार करते हुए किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई है। राज्यों के खरीद पोर्टलों को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ा गया है, ताकि वास्तविक किसानों को ही एमएसपी का लाभ मिल सके और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।



दलहन में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी

देश में दलहन के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने वर्ष 2030-31 तक दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है। इसके तहत राज्य सरकारों के अनुरोध पर पहले से पंजीकृत किसानों से तुअर, उड़द और मसूर की खरीद नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने में मदद मिलेगी।



टमाटर, प्याज़ और आलू उत्पादकों के लिए भी राहत

सरकार ने बताया कि जल्दी ख़राब होने वाली कृषि एवं बागवानी फसलों के लिए बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS) लागू की जाती है। जब इन फसलों के दाम उत्पादन लागत से नीचे चले जाते हैं, तब राज्य सरकारों के अनुरोध पर यह योजना लागू होती है। वर्ष 2024-25 से इस योजना में भावांतर भुगतान (PDP) का नया प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत किसानों को बाज़ार हस्तक्षेप मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके खाते में दिया जाता है। इसी के साथ टमाटर, प्याज़ और आलू (TOP) फसलों के भंडारण और परिवहन की लागत की प्रतिपूर्ति भी की जा रही है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।



5 वर्षों में 14.58 लाख करोड़ रुपये का MSP भुगतान

सरकार के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 से जून 2026 तक किसानों से 5,781 लाख मीट्रिक टन फसलों की खरीद की गई। इसके बदले किसानों को 14.58 लाख करोड़ रुपये का एमएसपी भुगतान किया गया। वहीं वर्ष 2004-14 के दौरान 22 MSP फसलों की कुल खरीद 6,987 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2014-26 (जून 2026 तक) बढ़कर 12,819 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इसी अवधि में किसानों को MSP के तहत किया गया भुगतान 7.41 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है।



खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएँ

सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इनमें कृषि ऋण, फसल बीमा, आय सहायता, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी, डिजिटल कृषि, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि विपणन और फसल खरीद जैसी योजनाएँ शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, खेती की लागत कम करना और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाना है।

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