समय से पहले आने वाला मानसून आखिर क्यों हुआ लेट? मौसम विभाग ने बताया कारण, जानें अब केरल कब पहुंचेगा मानसून

Gaon Connection | May 27, 2026, 12:51 IST
देशभर में भीषण गर्मी पड़ रही है। मानसून का आगमन तय समय से देरी से हो रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम ने मानसून की रफ्तार को धीमा कर दिया है। केरल में बारिश हो रही है, लेकिन इसे अभी मानसून घोषित नहीं किया गया है।
चक्रवाती सिस्टम ने रोकी मानसून की चाल

देशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच लोग मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार मानसून तय समय से पहले आने के बजाय देरी का शिकार हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने पहले अनुमान लगाया था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन अब इसकी नई संभावित तारीख 2 से 4 जून बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवाती सिस्टम मानसून की रफ्तार में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।



आखिर कैसे चक्रवात ने रोक दी मानसून की चाल?

भारत में मानसून की एक प्रमुख शाखा बंगाल की खाड़ी से होकर देश में प्रवेश करती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जब इस क्षेत्र में चक्रवात या कम दबाव का मजबूत सिस्टम बनता है, तो वह आसपास की हवाओं को अपनी तरफ खींचने लगता है। इससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली बड़ी वायुमंडलीय हवाओं का प्रवाह टूट जाता है और मानसून की गति धीमी पड़ जाती है। यही वजह है कि इस बार मानसून केरल तक समय पर नहीं पहुंच पाया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले 2013 और 2021 में भी चक्रवाती गतिविधियों के कारण मानसून की रफ्तार प्रभावित हुई थी।



केरल में बारिश हो रही, फिर भी मानसून घोषित क्यों नहीं?

हालांकि केरल में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, लेकिन मौसम विभाग अभी इसे आधिकारिक मानसून नहीं मान रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह फिलहाल प्री-मानसून बारिश है। आईएमडी के नियमों के मुताबिक मानसून घोषित करने के लिए केरल के 14 तय मौसम केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे ज्यादा बारिश दर्ज होनी चाहिए। इसके साथ हवा की गति और बादलों की स्थिति जैसी अन्य तकनीकी शर्तें भी पूरी होनी जरूरी होती हैं।



भीषण गर्मी के बीच बढ़ा लोगों का इंतजार

देश के पश्चिमी, उत्तरी और मध्य हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में लोग बारिश और ठंडी हवाओं का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मौसम विभाग पहले ही संकेत दे चुका है कि इस साल अल नीनो के असर के कारण पूरे मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खेती और जल संकट को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।



खेती और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है मानसून?

भारत में सालभर होने वाली कुल बारिश का करीब तीन-चौथाई हिस्सा मानसून से मिलता है। देश की बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र मानसून पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र में देश की करीब आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। ऐसे में मानसून में देरी का असर खेती, खाद्य उत्पादन, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।



मानसून जरूर आएगा, लेकिन नजर इसकी ताकत पर

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून आने में देरी जरूर हुई है, लेकिन यह पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मानसून कितनी अच्छी बारिश देगा और कितने समय तक असरदार बना रहेगा।

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