गाँवों के युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने का मिलेगा मौका, नाबार्ड ने लॉन्च किया ‘ग्रामोद्यम’ कार्यक्रम

Gaon Connection | Jul 13, 2026, 16:37 IST
ग्रामीण युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए नाबार्ड ने अपने 45वें स्थापना दिवस पर ‘ग्रामोद्यम’ कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से चलाई जाएगी। कार्यक्रम के तहत युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, बिज़नेस प्लान, बैंक ऋण, बाज़ार से जुड़ाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। पायलट चरण में तीन वर्षों में करीब 4,000 ग्रामीण उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य है।

गाँवों में ऐसे युवाओं की कमी नहीं है, जिनके पास नए विचार हैं और कुछ अलग करने का जज़्बा भी है। लेकिन अक्सर सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक मदद नहीं मिलने की वजह से उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। अब इन्हीं युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका मक़सद गाँवों में रोज़गार के नए अवसर पैदा करना और स्थानीय स्तर पर कारोबार को बढ़ावा देना है।



नाबार्ड ने अपने 45वें स्थापना दिवस पर ‘ग्रामोद्यम’ नामक उद्यमिता विकास कार्यक्रम की शुरुआत की। नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी केवी ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पहल कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के तहत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से चलाई जाएगी, जबकि इसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी इंस्टीट्यूट फ़ॉर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को दी गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं की पहचान कर उन्हें उद्योगों की ज़रूरत के मुताबिक कौशल, प्रशिक्षण और हर ज़रूरी सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि उनके विचार सफल कारोबार में बदल सकें।



प्रशिक्षण से लेकर बिज़नेस शुरू करने तक हर कदम पर मिलेगा साथ

‘ग्रामोद्यम’ के तहत युवाओं को सिर्फ़ प्रशिक्षण ही नहीं मिलेगा, बल्कि कारोबार शुरू करने की पूरी प्रक्रिया में उनका साथ दिया जाएगा। उन्हें उद्यमिता से जुड़ा प्रशिक्षण, उद्योग और व्यापार आधारित कौशल, मेंटरशिप और आवश्यक सहयोग प्रणाली उपलब्ध कराई जाएगी। इसका लक्ष्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों को रोज़गार और आर्थिक विकास का मज़बूत आधार बनाना है।



कार्यक्रम को डिजिटल-फ़र्स्ट हाइब्रिड मॉडल पर तैयार किया गया है, ताकि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक इसकी पहुँच हो सके। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, सोशल मीडिया, सामुदायिक संपर्क और ज़मीनी स्तर पर जागरूकता अभियान के ज़रिये इच्छुक युवाओं का पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद साइकोमेट्रिक असेसमेंट, काउंसलिंग, उद्यमिता विकास प्रशिक्षण, उद्योग और व्यापार विशेष प्रशिक्षण, मेंटरशिप तथा कारोबार स्थापित करने तक हर स्तर पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।



बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और बाज़ार तक पहुँच बनाने में भी मिलेगी मदद

इस कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को बिज़नेस आइडिया चुनने, बिज़नेस प्लान तैयार करने, उद्यम प्रबंधन सीखने, ऋण सुविधा, बाज़ार से जुड़ने और कारोबार शुरू होने के बाद भी लगातार मार्गदर्शन दिया जाएगा। सभी लाभार्थियों का एनएसडीसी के माध्यम से ई-केवाईसी सत्यापन किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। पायलट चरण में अगले तीन वर्षों के भीतर करीब 4,000 ग्रामीण उद्यमियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।



कार्यक्रम के तहत युवाओं को बैंक योग्य विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में विशेषज्ञों की मदद मिलेगी। साथ ही नाबार्ड समर्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण दिलाने में भी सहयोग मिलेगा। डिजिटल माध्यम से ऋण आवेदन करने की सुविधा और विभिन्न सरकारी योजनाओं व प्रोत्साहनों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि कारोबार शुरू करने में वित्तीय बाधाएँ कम हों।



नाबार्ड ने बताया कि पूरे कार्यक्रम को एनएसडीसी के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रतिभागियों की प्रगति की हर चरण में रियल-टाइम निगरानी और मूल्यांकन किया जा सकेगा।

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