Nepal Flood: नारायणी नदी से 321 शव बरामद, हर शव को यूनिक नंबर; DNA से अपनों की पहचान की कोशिश, 12 शव परिजनों को सौंपे

Mansi | Sept 02, 2026, 19:26 IST
नारायणी नदी के किनारे आई बाढ़ के बाद अब तक 321 शव बरामद हो चुके हैं। प्रशासन ने शवों की पहचान के लिए यूनिक नंबर और डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू की है। हालात के मद्देनजर, 200 शवों की क्षमता वाला अस्थायी मोर्चरी केंद्र स्थापित किया गया है। परिवारों को अपने लापता प्रियजनों की खोज में सहायता के लिए शवों की तस्वीरें भी लगाई जा रही हैं।

नारायणी नदी के किनारे बाढ़ के बाद अब सिर्फ़ मलबा और पानी नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदें भी दिखाई देती हैं जो अपने लापता अपनों की तलाश में यहाँ तक पहुँच रहे हैं। किसी के हाथ में अपने रिश्तेदार की तस्वीर है तो कोई अस्पताल और शवों की सूची में नाम तलाश रहा है। चितवन में नारायणी नदी के आसपास राहत और खोज अभियान के दौरान अब तक 321 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से 280 शवों का अस्थायी प्रबंधन किया जा चुका है। प्रशासन अब इन शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुँचाने की कोशिश में जुटा है।



चितवन में शवों के प्रबंधन और पहचान की प्रक्रिया को लेकर अधिकारी अनिल थापा ने गाँव कनेक्शन की टीम को बताया कि हर शव को एक यूनिक आइडेंटिटी नंबर दिया गया है। शव के साथ-साथ उस नंबर को उसके अस्थायी स्थान पर भी दर्ज किया गया है, ताकि भविष्य में अगर कोई परिवार अपने लापता सदस्य की पहचान करता है तो रिकॉर्ड को आसानी से मिलाया जा सके। परिजन अपने DNA सैंपल भी दे सकते हैं। इसके बाद उनके DNA का मिलान बरामद शवों से लिए गए DNA सैंपल से किया जाएगा। पहचान स्थापित होने के बाद शव को संबंधित परिवार को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।



अस्पतालों में जगह कम पड़ी तो बनाया अस्थायी मोर्चरी सेंटर

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से चितवन के अस्पतालों के सामने उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई। सरकारी अस्पताल में एक समय में सिर्फ़ 25 से 30 शव रखने की क्षमता है। कुछ निजी अस्पतालों में भी शव रखने की सुविधा है, लेकिन वहाँ भी करीब 10 से 15 शवों की ही क्षमता थी। ऐसे में प्रशासन ने करीब 200 शवों की क्षमता वाला अस्थायी मोर्चरी और होल्डिंग सेंटर तैयार किया। इस सेंटर में शवों को सुरक्षित रखने के लिए एसी लगाए गए हैं और ड्राई आइस जैसी व्यवस्था की गई है। ऑफिसर अनिल के मुताबिक़, बाढ़ के शुरुआती दिनों में शवों को कुछ समय तक अस्पताल और होल्डिंग सेंटर में रखा गया, लेकिन बाद में उनके सड़ने की प्रक्रिया शुरू होने लगी। इससे आसपास के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा होने की आशंका थी। इसी वजह से शवों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए अस्थायी केंद्र तैयार करना पड़ा।



पहले अस्पताल, फिर होल्डिंग सेंटर

नारायणी नदी के किनारे या आसपास से जब कोई शव बरामद होता है तो उसे पहले अस्पताल ले जाया जाता है। वहाँ पोस्टमार्टम, दस्तावेज़ीकरण और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद शव को वापस होल्डिंग सेंटर में रखा जाता है। हर शव को अलग नंबर दिए जाने का मकसद यही है कि पहचान की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया में आपदा के बाद शवों के प्रबंधन से जुड़े राष्ट्रीय निर्देशों और ICRC की गाइडलाइंस का पालन कर रहा है।



तस्वीरों के ज़रिए भी अपनों को तलाश रहे परिवार

लापता लोगों के परिवारों के लिए सबसे मुश्किल समय वह है जब उन्हें न यह पता होता है कि उनका अपना कहाँ है और न यह कि वह सुरक्षित है या नहीं। ऐसे परिवारों की मदद के लिए प्रशासन ने बरामद शवों की कुछ तस्वीरें भी सुरक्षित रखी हैं और उन्हें LED स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जा रहा है। परिवार तस्वीर देखकर अपने रिश्तेदार की पहचान करने की कोशिश कर सकते हैं। अगर तस्वीर या दूसरी पहचान के आधार पर किसी शव को लेकर परिवार दावा करता है तो आगे DNA जांच के जरिए पहचान की पुष्टि की जा सकती है। अब तक 12 शवों की पहचान कर उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंपा जा चुका है। यानी कुछ परिवारों को कम से कम अपने अपनों के अंतिम संस्कार का अवसर मिल सका है, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अभी भी पहचान और जानकारी का इंतज़ार कर रहे हैं।



नारायणी नदी के इसी इलाके में क्यों मिल रहे ज्यादा शव?

ऑफिसर अनिल के मुताबिक़, चितवन में नारायणी नदी का हिस्सा काफी चौड़ा है। नदी के चौड़ा होने की वजह से कुछ जगहों पर पानी का बहाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है। यही वजह हो सकती है कि बाढ़ के बाद इस इलाके में बड़ी संख्या में शव बरामद हो रहे हैं। खोज अभियान लगातार जारी है। एक दिन में बरामद होने वाले शवों की संख्या में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक दिन करीब 25 से 30 शव बरामद हुए, जबकि अगले दिन शुरुआती जानकारी में 5 से 10 शव मिलने की बात सामने आई।



नारायणी नदी के किनारे चल रहा यह अभियान सिर्फ़ शवों की तलाश नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की आखिरी कड़ी भी है, जिनके अपने कई दिनों से लापता हैं। हर बरामद शव के साथ एक परिवार को जवाब मिलने की उम्मीद जुड़ी है। यूनिक नंबर, तस्वीरें और DNA जांच की यह पूरी प्रक्रिया इसी कोशिश का हिस्सा है कि बाढ़ में बिछड़े लोगों की पहचान हो सके और उनके परिवार उन्हें अंतिम विदाई दे सकें। चितवन में बरामद शवों में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी के बारे में अधिकारी ने कहा कि उपलब्ध विवरण और तस्वीरों के आधार पर उन्हें किसी विदेशी नागरिक के होने की जानकारी नहीं मिली है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल बरामद शवों की पहचान, रिकॉर्ड तैयार करना और उन्हें उनके परिजनों तक पहुँचाना है।

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