औषधीय और सुगंधित फ़सलों की खेती करने वाले किसानों के काम की जानकारी
इस किसान मेले मे 20-25 राज्यों के लगभग 5000 किसानों के भाग लेने की संभावना है। महिलाओं के अगरबत्ती, गुलाब जल बनाने का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
अगर आप भी औषधीय व संगध फ़सलों की खेती करते हैं या करना चाहते हैं और इसमें कुछ नया करना चाहते हैं, तो इस मेले में शामिल होकर नई जानकारियाँ पा सकते हैं।
सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) 30 और 31 जनवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेला 2026 का आयोजन कर रहा है। इस किसान मेले का उद्देश्य किसानों की आजीविका को मजबूत करना, औषधीय व सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना और ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
सीमैप के वैज्ञानिक व किसान मेला के संयोजक डॉ संजय कुमार ने मेले के बारे में बताते हुए कहा कि यह किसान मेला किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं के बीच सीधे संवाद के लिए एक ज़रूरी राष्ट्रीय मंच के रूप में काम करेगा। आदिवासी और विकासशील क्षेत्रों सहित देश भर के प्रगतिशील किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी की उम्मीद है।"
इस किसान मेले मे 20-25 राज्यों के लगभग 5000 किसानों के भाग लेने की संभावना है। महिलाओं के अगरबत्ती, गुलाब जल बनाने का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
इस किसान मेले मे 20-25 राज्यों के लगभग 5000 किसानों के भाग लेने की संभावना है। महिलाओं के अगरबत्ती, गुलाब जल बनाने का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम मे महिला प्रतिभागियों की भारी मात्रा मे भाग लेने की संभावना है। यह आयोजन सीएसआईआर-सीमैप के किसान-केंद्रित अनुसंधान, प्रौद्योगिकियों और क्षेत्र-परीक्षित नवाचारों को उजागर करेगा, विशेष रूप से सीएसआईआर एरोमा मिशन जैसी राष्ट्रीय पहलों के तहत, जिसने औषधीय और सुगंधित फसलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने बताया, "मेले के पहले दिन डॉ. धीर सिंह, निदेशक, राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा मुख्य अतिथि के रूप मे शामिल होंगे और किसान मेला मे अपना सम्बोधन करेंगे। इन दो दिनों के दौरान, किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, कटाई के बाद के प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन से संबंधित उन्नत वैज्ञानिक पद्धतियों से अवगत कराया जाएगा।"
बाजार से जुड़े कृषि सतत विकास मॉडल, विविध और अंतर्फसली कृषि प्रणालियों में सुगंधित फसलों का एकीकरण और सतत व जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक संवादात्मक सत्रों और व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से तकनीकी मार्गदर्शन और परामर्श सेवाएं प्रदान करेंगे। इस अवसर पर सुगंधित पौधों से आसवित हर्ब से मवेशियों के लिए चारा बनाने की तकनीकी पर एक एमयूओ साइन किया जाएगा और बुकलेट का भी विमोचन किया जाएगा।
मेले में सिट्रोनेला व अकरकरा की उन्नत प्रजातियों का विमोचन किया जाएगा। अकरकरा आयुर्वेद, यूनानी और पारंपरिक अरबी चिकित्सा में प्रयुक्त एक प्राचीन जड़ी बूटी है। इसके प्रमुख जैविक गुण हैं। सियालोगोग, रोगाणुरोधी, कामोत्तेजक, ऐंठनरोधी, तंत्रिका सुरक्षात्मक, सूजनरोधी, स्मृतिवर्धक, प्रतिरक्षा उत्तेजक, एंड्रोजेनिक, कैंसररोधी और कीटनाशक। वर्तमान किस्म CIM- नित्या अकरकरा की भारत में विकसित की गई पहली किस्म है, जिसे दो उत्परिवर्तियों के अंतः प्रजाति संकरण और उसके बाद छह पीढ़ियों तक स्थिरीकरण के माध्यम से विकसित किया गया है।
सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. लईक उर रहमान और उनकी टीम द्वारा विकसित नई प्रजाति सिट्रोनेला सिम-हरितिमा किसानों को उच्च सगंध तेल उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्रदान करेगी। क्षेत्रीय मूल्यांकन से पता चलेगा कि सिम-हरितिमा दो कटाइयों से प्रति हेक्टेयर 333–365 किलो ग्राम सगंध तेल उत्पन्न करेगी, जो व्यापक रूप से उगाई जाने वाली प्रजाति बायो-13 से लगभग 55–60% अधिक होगी। सिम-हरितिमा भारत के उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में सिट्रोनेला उत्पादकों के लिए अत्यधिक उत्पादक और भरोसेमंद प्रजाति के रूप में उभरेगी, जो श्रेष्ठ तेल गुणवत्ता को उन्नत लाभ प्रदता के साथ जोड़ेगी।
इसके साथ-साथ बेल पत्र से निर्मित क्रीम का भी विमोचन किया जाएगा। नारियल के कवच से जीवाणु रोधी क्रीम का भी विमोचन किया जाएगा। साथ ही कट फ्लावर को संरक्षित रखने के लिए एक फार्मूलेशन का भी विमोचन किया जाएगा। उद्यमियों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया जाएगा। लेमन ग्रास की उन्नत प्रजातियों का जीनोम सीक्वेंसिंग रिलीज किया जाएगा।
किसान मेले का एक प्रमुख आकर्षण मेन्था, लेमनग्रास, सिट्रोनेला, पामारोजा, वेटिवर और सीएसआईआर-सीमैपद्वारा विकसित दूसरी उच्च गुणवत्ता वाली औषधीय और सुगंधित फसलों की उन्नत पौध सामग्री की बड़े पैमाने पर वितरण किया जाएगा। मेंथा की लगभग 400 क्विंटल सकर्स को भी किसानों को वितरित किया जाएगा। किसान आधुनिक आसवन इकाइयों, प्रसंस्करण तकनीकों और फसल कटाई के बाद के उपकरणों के लाइव और स्थाई प्रदर्शन भी देख सकेंगे। गुलाब जल आसवन सहित लाइव प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, साथ ही आय सृजन के अवसरों को प्रदर्शित करने के लिए मूल्यसंवर्धित उत्पादों की बिक्री भी की जाएगी।
किसानों को कृषि स्तर पर सोच-समझकर निर्णय लेने में सहायता करने के लिए, मौके पर ही मृदा परीक्षण की व्यवस्था की गई है, जहाँ किसान अपने खेतों से मृदा के नमूने ला सकते हैं और तुरंत विश्लेषण तथा विशेषज्ञ सलाह प्राप्त कर सकते हैं। किसान मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपलब्धियों का अनावरण किया जाएगा, जिनमें उन्नत किस्मों का विमोचन, नई प्रौद्योगिकियों का शुभारंभ और हस्तांतरण, हर्बल और सुगंधित उत्पादों का बाजार में प्रवेश और सीएसआईआर-सीमैपके प्रयासों के प्रभाव को दर्शाने वाले प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन शामिल हैं।
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