Nepal Flood: स्कूल की तरफ़ बढ़ रहा था सैलाब, प्रिंसिपल ने बजाई घंटी और बचा लीं 1,643 बच्चों की जान

Mansi | Aug 31, 2026, 16:37 IST
नेपाल के त्रिशूली घाटी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने खतरे का आभास होते ही स्कूल की घंटी बजाई। शिक्षकों की मदद से 1,643 बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लेकिन थोड़ी देर बाद बाढ़ का पानी स्कूल की इमारत को बहा ले गया। इस त्रासदी में दो कर्मचारियों की जान चली गई।

नेपाल की त्रिशूली घाटी में आई भयावह बाढ़ ने देखते ही देखते कई इलाक़ों की तस्वीर बदल दी। तेज़ सैलाब ने घरों, सड़कों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। इसी तबाही के बीच एक स्कूल में मौजूद 1,643 बच्चों की जान बाल-बाल बची। ख़तरे को भांपते हुए स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने ऐसा फ़ैसला लिया, जिसने सैकड़ों परिवारों को अपने बच्चों को सुरक्षित देखने का मौक़ा दिया।



राजेंद्र दवाड़ी को जैसे ही पता चला कि बाढ़ का पानी तेज़ी से स्कूल की तरफ़ बढ़ रहा है, उन्होंने बिना समय गंवाए स्कूल की घंटी बजाई और सभी कक्षाओं को खाली कराने का आदेश दिया। शिक्षक बच्चों को लेकर सुरक्षित जगह की ओर निकल पड़े। बच्चों के स्कूल से बाहर निकलने के कुछ ही मिनट बाद सैलाब ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, इस हादसे में स्कूल के शिक्षक संतोष परियार और चपरासी सुल्तान लामा की जान नहीं बच सकी।



ख़तरे का पता चला तो तुरंत बजाई स्कूल की घंटी

बाढ़ का पानी तेज़ी से स्कूल की ओर बढ़ रहा था। हालात बिगड़ने से पहले प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने स्कूल की घंटी बजवाई और सभी कक्षाओं को खाली कराने का आदेश दिया। शिक्षकों की मदद से बच्चों को स्कूल की इमारत से बाहर निकालकर सुरक्षित जगह की ओर भेजा गया। उस वक़्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि आने वाले कुछ ही मिनटों में स्कूल की पूरी इमारत बाढ़ के सैलाब की चपेट में आ जाएगी। लेकिन प्रिंसिपल के समय पर लिए गए फ़ैसले ने बच्चों को उस ख़तरे से दूर कर दिया।



कुछ ही मिनटों बाद बह गई स्कूल की इमारत

बच्चों को सुरक्षित जगह पहुँचाने के कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी तेज़ी से स्कूल परिसर में दाखिल हुआ। देखते ही देखते सैलाब ने स्कूल की पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। जिस जगह कुछ देर पहले तक बच्चों की आवाज़ें गूंज रही थीं, वहाँ बाद में सिर्फ़ मलबा दिखाई दे रहा था। स्कूल की इमारत का तबाह होना अपने आप में बेहद दर्दनाक था, लेकिन सबसे बड़ी राहत यही रही कि समय रहते बच्चों को बाहर निकाल लिया गया था।



1,643 बच्चे बचे, लेकिन दो ज़िंदगियां नहीं बच सकीं

इस हादसे की कहानी पूरी तरह राहत वाली नहीं है। बाढ़ में स्कूल से जुड़े दो लोगों की जान चली गई। शिक्षक संतोष परियार और चपरासी सुल्तान लामा इस भयावह बाढ़ की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। एक तरफ़ 1,643 बच्चों के सुरक्षित बचने की राहत है, तो दूसरी तरफ़ स्कूल परिवार के दो सदस्यों को खोने का गहरा दुख भी है। आज स्कूल की जगह मलबा है, लेकिन उस मलबे के बीच एक फ़ैसले की कहानी भी है- एक ऐसा फ़ैसला, जिसने ख़तरे को भांपते ही बच्चों की ज़िंदगी को सबसे ऊपर रखा।

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