Nepal Flood: नदी के रौद्र रूप ने उजाड़ दिया देवीघाट बाज़ार अब गाद में अपना सामान तलाश रहे लोग|Ground Report
कभी लोगों की आवाजाही और कारोबार से गुलज़ार रहने वाला नुवाकोट का देवीघाट बाज़ार अब गाद और मलबे के बीच खड़ा है। बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन तबाही के निशान हर तरफ़ मौजूद हैं। दुकानों के शटर बंद हैं, सामान गाद में दबा है और कई इमारतों की निचली मंज़िलें पूरी तरह नदी की गाद से भर गई हैं। मौके पर पहुँची गाँव कनेक्शन की टीम ने जब यह मंजर देखा, तो सैलाब की ताक़त का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था।
देवीघाट में देवी घाट और त्रिशूली नदियों के मिलने वाली जगह के पास बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। वहाँ बना लोहे का पुल तक तेज़ बहाव में बह गया। बाढ़ आने से पहले बाज़ार खाली करा लिया गया था, जिससे लोग सुरक्षित निकल सके, लेकिन पीछे उनके घर, दुकानें और रोज़गार का सामान छूट गया। अब पानी उतरने के बाद स्थानीय लोग गाद और मलबे के बीच अपनी ज़रूरी चीज़ें तलाश रहे हैं और जो बचा है, उसे समेटने की कोशिश कर रहे हैं।
कई मंज़िलों तक पहुँची नदी की गाद
देवीघाट बाज़ार में कई दुकानों और मकानों की निचली मंज़िलें नदी की गाद से पूरी तरह भर गई हैं। एक इमारत के अंदर का पूरा हिस्सा गाद से पट चुका है। ऊपर की मंज़िल पर खड़े होकर नीचे देखने पर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बाढ़ का पानी कितनी ऊँचाई और ताक़त के साथ यहाँ पहुँचा होगा। बोरियाँ और दूसरी ज़रूरी चीज़ें गाद के बीच दब गई हैं। कई जगहों पर दुकानें पूरी तरह बंद हैं और शटर के पीछे कितना सामान बचा है, यह देख पाना भी मुश्किल है।
समय रहते खाली हुआ बाज़ार, फिर भी भारी नुकसान
बाढ़ से पहले इलाके को खाली करा लिया गया था। लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका मिल गया, लेकिन उनके घर और दुकानें पीछे छूट गईं। अब पानी उतरने के बाद लोग वापस लौट रहे हैं। कोई घर से ज़रूरी सामान निकाल रहा है, तो कोई अपनी दुकान के अंदर बचे सामान को तलाश रहा है। गाद और मलबे के बीच सामान निकालना आसान नहीं है, लेकिन लोगों के लिए हर छोटी चीज़ कीमती है। यही सामान उनके घर चलाने और रोज़गार से जुड़ा हुआ है।
दो नदियों के संगम ने बढ़ाई तबाही
देवीघाट में देवी घाट और त्रिशूली नदियाँ मिलती हैं। बाढ़ के दौरान दोनों नदियों का पानी बेहद तेज़ बहाव के साथ आगे बढ़ा। नदी की चपेट में जो भी आया, वह सैलाब के साथ बहता चला गया। आसपास का बाज़ार भी इसी तेज़ बहाव की चपेट में आ गया। इस तबाही का सबसे बड़ा सबूत सामने दिखाई देने वाला पुल है। कभी लोगों की आवाजाही का रास्ता रहा यह लोहे का पुल बाढ़ के तेज़ बहाव को नहीं झेल पाया और बह गया। बताया गया कि यह नया पुल था, लेकिन सैलाब की ताक़त के आगे उसका टिक पाना मुश्किल हो गया। पुल का इस तरह बह जाना बताता है कि बाढ़ के दौरान पानी कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा था।
जहाँ कभी लगता था बाज़ार, वहाँ अब सन्नाटा
देवीघाट बाज़ार में कभी मेला और लोगों की भीड़ जुटती थी। आज वही जगह सुनसान दिखाई दे रही है। कई दुकानें बंद हैं और कारोबारी अपने नुकसान का जायज़ा लेने में जुटे हैं। बाढ़ ने सिर्फ़ इमारतों को नुकसान नहीं पहुँचाया, बल्कि लोगों के छोटे-छोटे कारोबार और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
मौके पर मौजूद लोगों की कोशिश अब यही है कि जो बचा है, उसे बचा लिया जाए। गाद हटाई जाए, ज़रूरी सामान निकाला जाए और धीरे-धीरे घरों और दुकानों को फिर से खड़ा किया जाए। लेकिन इसके लिए उन्हें लंबी मेहनत करनी होगी।
नुवाकोट के देवीघाट बाज़ार की तस्वीरें बताती हैं कि बाढ़ का पानी उतर जाने के बाद भी लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं होतीं। अब उनके सामने अपने घर, दुकान और रोज़गार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है। मलबे और गाद के बीच से सामान समेटते लोग इसी उम्मीद में जुटे हैं कि तबाही के बाद उनकी ज़िंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।