नेपाल में अब टूटने लगी आख़िरी उम्मीद! शव नहीं मिले तो घास के पुतले बनाकर लापता अपनों का अंतिम संस्कार कर रहे लोग, सामने आईं दर्दनाक तस्वीरें
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन हजारों परिवारों का इंतज़ार अब भी ख़त्म नहीं हुआ है। किसी को अपने पति का पता नहीं, किसी का बेटा नहीं मिला और कई परिवार ऐसे हैं, जिनके अपनों का कोई सुराग तक सामने नहीं आया। बाढ़ के पानी में अब तक 1,100 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार कई दिनों तक राहत शिविरों, अस्पतालों और शवगृहों में अपनों को तलाशने के बाद अब कुछ परिवारों की उम्मीद टूटती दिखाई दे रही है। इसी दर्द के बीच कई परिवार बिना शव के ही अपने लापता परिजनों को अंतिम विदाई दे रहे हैं।
काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में कुछ परिवारों ने हिंदू रीति-रिवाज से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। जिन लोगों के शव नहीं मिले, उनके प्रतीक के तौर पर कुश की घास या पुआल से पुतले बनाए गए और उन्हें पार्थिव शरीर मानकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की गई। यह सिर्फ़ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए अपने लंबे इंतज़ार और गहरे दुख को स्वीकार करने का बेहद कठिन पल है। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में परिजनों को इन प्रतीकात्मक अंतिम संस्कारों के दौरान रोते और अपनों को याद करते देखा जा रहा है। दूसरी तरफ़, जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनके DNA नमूने लेने के बाद अधिकारियों को उन्हें सामूहिक रूप से दफन करना पड़ रहा है।
एक हफ्ते बाद भी हजारों लोग लापता
26 अगस्त को नेपाल के ऊँचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फीला पानी, चट्टान और मलबा तेज़ी से नीचे की ओर आया था। चीन-नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों में आई इस अचानक बाढ़ ने गांवों, घरों और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया। आपदा के बाद से हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है।
एक सप्ताह बीतने के बाद भी बचाव अभियान जारी है। हालांकि, कई परिवार अब अपने लापता परिजनों के जीवित लौटने की उम्मीद खोते नजर आ रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं, लेकिन कई शवों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। इस वजह से परिजनों को अपने लोगों के बारे में निश्चित जानकारी मिलने में भी मुश्किल हो रही है।
शव नहीं मिला तो पुतला बनाकर की अंतिम विदाई
काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में लापता लोगों के परिवारों ने प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की रस्म निभाई। कुश की घास या पुआल से बनाए गए पुतले को लापता व्यक्ति का प्रतीक माना गया और हिंदू परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।
एएफपी के मुताबिक, डोल्मा नेवार तमांग ने अपने पति के लिए ऐसा ही प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। उन्होंने बताया कि यह रस्म इसलिए करनी पड़ी, ताकि उनके पति की आत्मा मुक्त हो सके और वह जहाँ भी हों, शांति और खुशी से रहें। आपदा के समय उनके पति चीन जा रहे थे। उन्होंने बताया कि खबर देखने के बाद उन्होंने पति को बार-बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सुरंगों में अब भी जारी है तलाश
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगें भारी मिट्टी और मलबे में दब गई हैं। बचाव दल इन सुरंगों में फँसे लोगों की तलाश लगातार कर रहे हैं। कहीं मलबा हटाने के लिए खुदाई की जा रही है, तो कहीं ड्रिलिंग की मदद ली जा रही है। रास्ता बनाने के लिए कुछ जगहों पर विस्फोट भी किए जा रहे हैं।
अभी तक इन बंद सुरंगों से बचाव दलों को जीवित लोगों के बजाय शव मिले हैं। इसके बावजूद तलाश बंद नहीं की गई है। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी कहा है कि लापता लोगों में कुछ के जीवित होने की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि चमत्कार होते हैं और वह इस समय पूरी तरह उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते।
शवगृहों में जगह कम पड़ी, सामूहिक दफन की नौबत
आपदा में बरामद किए गए सैकड़ों शवों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है। काठमांडू में लोग अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान में मदद के लिए DNA नमूने भी दे रहे हैं। लेकिन लगातार शव मिलने के कारण शवगृहों में जगह कम पड़ रही है। ऐसे में अधिकारियों को पहचान के लिए DNA नमूने लेने के बाद कई अज्ञात शवों को दफन करना पड़ा है। बड़े गड्ढे खोदने के लिए JCB मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और कई शवों को एक साथ दफन किया जा रहा है। वहीं, नेपाल की बाढ़ से बहकर भारत की ओर आई नदियों से भी कम से कम 17 शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल ने लापता लोगों की तलाश और शवों को बरामद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी मांगी है। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई देशों ने इस आपदा के बाद अपने कर्मचारी, राहत सामग्री या आर्थिक मदद भेजी है।