नेपाल में बाढ़ के बीच 21 तीर्थयात्रियों के लिए सहारा बनी साड़ी, ऐसे सुरक्षित निकले यात्री
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के दौरान 57 सदस्यीय तीर्थयात्रियों का एक दल फँस गया। यह दल तीन बसों से यात्रा कर रहा था। पानी और मलबा तेज़ी से बढ़ने के बाद ड्राइवर ने यात्रियों को बस से उतरकर ऊँची जगह की ओर जाने को कहा। इस दौरान 21 यात्री सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।
बाढ़ प्रभावित इलाक़े से निकलने के लिए यात्रियों को कीचड़ से भरी खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ी। चढ़ाई पर फिसलन होने की वजह से कई यात्रियों को परेशानी हुई। इसी दौरान एक महिला ने अपनी साड़ी को सहारे के तौर पर इस्तेमाल किया। ऊपर पहुँच चुके यात्रियों ने साड़ी और वहाँ मौजूद धातु की केबल की मदद से नीचे मौजूद लोगों को ऊपर खींचा।
बाढ़ के बाद यात्रियों ने छोड़ी बस
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकला यह दल तीन बसों से नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र से गुजर रहा था। यात्रियों के अनुसार, शुरुआत में सामने दिखाई दे रहा कोहरा सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही देर में पानी और मलबा तेज़ी से नीचे आने लगा। स्थिति बिगड़ती देख यात्रियों ने बस से बाहर निकलकर ऊँची जगह की ओर जाना शुरू किया। बाढ़ के पानी के साथ मिट्टी और पत्थर आने से रास्ता प्रभावित था। यात्रियों ने उपलब्ध केबल और एक साड़ी की मदद से चढ़ाई पार की। एक महिला के लिए ऊपर पहुँचना मुश्किल होने पर साड़ी को उसकी कमर से बाँधा गया और ऊपर मौजूद लोगों ने उसे खींचकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। करीब डेढ़ घंटे में 21 लोग ऊँची जगह पर पहुँच सके।
एपीएफ़ कैंप से हेलिकॉप्टर पॉइंट तक पैदल सफ़र
ऊँचाई पर पहुँचने के बाद यात्रियों को आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स यानी एपीएफ़ कैंप ले जाया गया। वहाँ से उन्हें हेलिकॉप्टर निकासी स्थल तक पहुँचने के लिए करीब तीन घंटे पैदल चलना पड़ा। इस दौरान उन्हें संकरे पहाड़ी रास्तों और काँटों से होकर गुजरना पड़ा। इसके बाद सैन्य हेलिकॉप्टर की मदद से 21 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। स्थानीय लोगों और नेपाली सुरक्षा बलों ने भी उन्हें आगे बढ़ने में सहायता दी।
57 सदस्यीय दल के 36 लोग अब भी लापता
सुरक्षित लौटे 21 यात्री उसी 57 सदस्यीय समूह का हिस्सा थे। हादसे के बाद समूह के 36 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। सुरक्षित यात्रियों के अनुसार, बाढ़ के दौरान समय पर बस छोड़ना और ऊँची जगह की ओर जाना उनके बचने में महत्वपूर्ण रहा। चढ़ाई के दौरान साड़ी और धातु की केबल ने भी यात्रियों को ऊपर पहुँचने में मदद की।