Nepal Floods: ‘जब तक हेलीकॉप्टर उड़ रहा है, उम्मीद है हमारा बेटा मिलेगा’, 18 साल के बेटे की तलाश में 3 दिन से भटक रहा परिवार| Ground Report
नेपाल में आई भयावह बाढ़ के बाद त्रिशूली बाजार में हर दिन एक जैसी तस्वीर दिखाई दे रही है। एक तरफ़ राहत और बचाव का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ़ कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं। किसी के हाथ में अपने बेटे की तस्वीर है, तो कोई रेस्क्यू किए गए लोगों की सूची में अपने भाई, रिश्तेदार या बेटे का नाम तलाश रहा है।
त्रिशूली बाजार में रेस्क्यू किए गए लोगों की सूची चस्पा की गई है। हेलीकॉप्टर और दूसरे माध्यमों से बचाकर लाए गए लोगों के नाम इस सूची में दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारों की निगाहें बार-बार इसी सूची पर टिक जाती हैं। हर नई सूची के साथ एक उम्मीद पैदा होती है कि शायद इस बार उनके अपने का नाम मिल जाए। ‘गाँव कनेक्शन’ की ग्राउंड रिपोर्ट में त्रिशूली बाजार में अपनों की तलाश कर रहे कई परिवारों से बातचीत हुई। उनकी बातों में राहत और बचाव के बीच छिपी बेचैनी साफ़ दिखाई दी।
परिवार के 7-8 लोगों का अब तक कोई पता नहीं
काठमांडू की रहने वाली लक्ष्मी भी अपने रिश्तेदारों की तलाश में त्रिशूली पहुँची हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के 7-8 लोग अब तक लापता हैं। उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है और परिवार को यह तक पता नहीं कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। लक्ष्मी नए रेस्क्यू किए गए लोगों की सूची देखने पहुँची थीं। उनका कहना था कि जब भी नई सूची आती है, वह उसमें अपने रिश्तेदारों के नाम तलाशती हैं। 3 दिन से लगातार वह यहां आ रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ऐसी जानकारी नहीं मिली जिससे परिवार को राहत मिल सके। लापता लोगों के नाम और पते की जानकारी परिवार ने घटना के पहले दिन ही पुलिस को दे दी थी। इसके बाद भी अब तक कोई पुख़्ता जानकारी सामने नहीं आई है। अस्पतालों में भी तलाश की गई, लेकिन वहां भी नाम नहीं मिला।
हर सूची में तलाशते हैं अपनों का नाम
त्रिशूली बाजार में लगी सूची उन परिवारों के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है, जिनके अपने लापता हैं। लोग सूची के सामने खड़े होकर एक-एक नाम पढ़ते हैं। कुछ लोग अपने परिजनों का नाम देखकर तुरंत आगे बढ़ जाते हैं, तो कई लोगों की निगाहें देर तक किसी एक नाम को खोजती रहती हैं। रेस्क्यू किए गए लोगों की सूची लगातार अपडेट की जा रही है। लेकिन जिन परिवारों को अपने लोगों का नाम नहीं मिलता, उनके लिए इंतज़ार और लंबा हो जाता है। यहाँ मौजूद लोगों के लिए सूची पर लिखा हर नाम सिर्फ़ एक नाम नहीं है। किसी नाम के पीछे पूरा परिवार अपनी उम्मीद लगाए बैठा है।
18 साल का बेटा लापता… 3 दिन से लिस्ट में खोज रहे नाम
इसी उम्मीद के बीच रमेश चौधरी अपने 18 वर्षीय बेटे रामबाबू चौधरी थारू की तलाश कर रहे हैं। रमेश के मुताबिक़, उनके बेटे से आख़िरी बार सोमवार सुबह करीब 9 बजे बात हुई थी। इसके बाद से रामबाबू का परिवार से संपर्क टूट गया।बेटे की तलाश में रमेश काठमांडू भी गए। वहां पूछताछ की और अस्पतालों में भी नाम तलाशा, लेकिन रामबाबू के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। त्रिशूली में रेस्क्यू किए गए लोगों की सूची में भी अभी तक बेटे का नाम नहीं है। पिता 3 दिन से लगातार यहाँ आकर सूची देख रहा है। हर दिन एक ही उम्मीद होती है शायद आज रामबाबू का नाम मिल जाए।
रमेश ने गाँव कनेक्शन की टीम को बताया कि बेटे से आख़िरी बातचीत बहुत सामान्य थी। रामबाबू ने घर का हाल पूछा था। उसने पूछा था कि पापा जी समाचार कैसा है और मम्मी-पापा कुशल-मंगल हैं या नहीं। किसी को उस वक्त अंदाज़ा नहीं था कि यह उनकी आख़िरी बातचीत हो सकती है। अब वही आवाज़ परिवार के लिए याद बनकर रह गई है। फोन का इंतज़ार जारी है, लेकिन दूसरी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आ रहा।
‘जब तक हेलीकॉप्टर उड़ रहा है, हमारा दिल धड़क रहा है’
बेटे के मिलने की उम्मीद के बारे में पूछे जाने पर रमेश कहते हैं, “जब तक ये हेलीकॉप्टर उड़ रहा है, तब तक हमारा दिल धड़क रहा है कि हमारा लड़का मिलेगा।” उनकी यह बात सिर्फ़ एक पिता की उम्मीद नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के दर्द को सामने लाती है, जिनके अपने बाढ़ के बाद से लापता हैं। जब भी हेलीकॉप्टर किसी प्रभावित इलाके से लोगों को बचाकर लाता है, परिवारों की निगाहें उसकी तरफ़ उठ जाती हैं। लोग उम्मीद करते हैं कि शायद इस बार उनका अपना भी सुरक्षित लौट आए। इसके बाद रेस्क्यू लिस्ट में नाम तलाशने का सिलसिला शुरू होता है।
त्रिशूली बाजार में जारी है इंतज़ार
नेपाल की इस भयावह बाढ़ ने कई परिवारों को ऐसे इंतज़ार में डाल दिया है, जिसका कोई तय समय नहीं है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन लापता लोगों के परिवारों के लिए हर गुजरता दिन चिंता बढ़ा रहा है। त्रिशूली बाजार में लगे कागज़ों पर दर्ज नामों के बीच लोग अपने अपनों को तलाश रहे हैं। किसी को सात-आठ रिश्तेदारों की चिंता है, तो कोई 18 साल के बेटे के लौटने का इंतज़ार कर रहा है। इन परिवारों के लिए अभी सबसे बड़ी खबर यही होगी कि सूची में उनके अपने का नाम मिल जाए या फोन की घंटी बजे और दूसरी तरफ़ से वही आवाज़ सुनाई दे, जिसका वे कई दिनों से इंतज़ार कर रहे हैं।