Biopharma Shakti Scheme: अब भारत में बनेंगी नई बायो दवाएँ, सरकार लाई 10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना
अगर आप यह सोचते हैं कि भविष्य में भारत में कैंसर, डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों की दवाएँ और सस्ती और आसानी से मिल सकें, तो सरकार की एक नई योजना इसी दिशा में काम करने जा रही है। केंद्र सरकार ने देश के जैव-औषधीय (बायोफार्मा) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ‘बायोफार्मा शक्ति योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री Anupriya Patel ने राज्यसभा में बताया कि इस पहल का मकसद भारत को जैव-फार्मा निर्माण और नवाचार का बड़ा वैश्विक केंद्र बनाना है, ताकि देश में ही नई दवाओं का विकास और उत्पादन हो सके।
क्यों जरूरी है यह योजना?
आज भारत में गैर-संक्रामक बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें मधुमेह, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियाँ प्रमुख हैं। इन बीमारियों के इलाज में जैविक दवाएँ (बायोलॉजिक्स) काफी अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन कई बार ये दवाएँ महंगी होती हैं। सरकार का कहना है कि अगर इन दवाओं का देश में ही विकास और उत्पादन बढ़ेगा, तो उनकी लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएँ मिल सकेंगी। इस योजना का एक बड़ा लक्ष्य यह है कि उच्च मूल्य वाली जैविक दवाएँ और बायोसिमिलर दवाएँ भारत में ही विकसित और तैयार की जाएँ। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत की वैश्विक फार्मा बाजार में हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।
नए संस्थान और रिसर्च को बढ़ावा
बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत तीन नए राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएंगे और पहले से मौजूद सात संस्थानों को और मजबूत बनाया जाएगा। National Institute of Pharmaceutical Education and Research जैसे संस्थानों के जरिए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और फार्मा विशेषज्ञों को तैयार किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की कमी न रहे। सरकार का फोकस भारत में बड़े स्तर पर क्लीनिकल रिसर्च और दवा परीक्षण (Clinical Trials) की क्षमता बढ़ाने पर भी है। इससे नई दवाओं के परीक्षण और विकास की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।
स्टार्टअप और उद्योग को भी मिलेगा सहारा
इसके साथ ही Central Drugs Standard Control Organization को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष वैज्ञानिक समीक्षा टीम बनाई जाएगी, जिससे दवाओं के नियामक अनुमोदन की प्रक्रिया और तेज व पारदर्शी हो सकेगी। इस योजना का एक और उद्देश्य स्टार्टअप्स और फार्मा कंपनियों को शुरुआती चरण में वित्तीय सहायता देना है। इससे नई तकनीक और नई दवाओं के विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत न सिर्फ अपने देश के मरीजों को बेहतर और सस्ती दवाएँ दे पाएगा, बल्कि वैश्विक बायोफार्मा बाजार में भी मजबूत पहचान बना सकेगा।