यूपी में प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया मॉडल, डिजिटल मॉनिटरिंग से हर बालवाटिका तक पहुंचेगी सामग्री
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अब शिक्षा सुधार को केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर तक सीमित न रखकर प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुटी हुई है। सरकार का फोकस अब बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता, भाषा विकास और रचनात्मक सोच को मजबूत करने पर है। इसी दिशा में प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू किया गया है।
सरकार का मानना है कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा जितनी मजबूत होगी, आगे की पढ़ाई की बुनियाद उतनी ही बेहतर बनेगी। योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा यानी ईसीसीई को बच्चों की सीखने की सबसे महत्वपूर्ण बुनियाद माना गया है। अब उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं को केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखकर उन्हें शुरुआती शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षण के आधुनिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
आयु वर्ग के हिसाब से पहुंचेगी शिक्षण सामग्री
जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में बच्चों की आयु के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत ‘चहक-1’, ‘चहक-2’, ‘चहक-3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बालवाटिका हस्तपुस्तिका, 12 प्रकार की बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और शिक्षण तालिकाएं वितरित की जाएंगी। इन सामग्रियों का उद्देश्य बच्चों को किताबों से जोड़ने के साथ-साथ खेल-खेल में सीखने की आदत विकसित करना है। सरकार का मानना है कि शुरुआती उम्र में गतिविधि आधारित शिक्षा बच्चों के मानसिक और भाषाई विकास में सबसे ज्यादा प्रभावी होती है।
बेसिक शिक्षा सुधार अभियान से जोड़ी गई प्री-प्राइमरी शिक्षा
प्रदेश में पहले ही बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्मार्ट स्कूल, ऑपरेशन कायाकल्प, डिजिटल मॉनिटरिंग और निपुण भारत मिशन जैसे बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। अब सरकार प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी इसी व्यापक शिक्षा सुधार अभियान से जोड़ते हुए बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष फोकस कर रही है। सरकार का मानना है कि ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा पहुंचाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि अब शिक्षा सुधार की शुरुआत बच्चों की सबसे शुरुआती सीखने की अवस्था से की जा रही है। माना जा रहा है कि यह अभियान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को शुरुआती शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।
गतिविधि आधारित और खेल आधारित शिक्षण पर जोर
3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था मानी जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गतिविधि आधारित, खेल आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘चहक’ श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा विकास, बोलने-सुनने की क्षमता और बुनियादी सीखने की दक्षताओं को विकसित करने में मदद करेंगी। वहीं ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री बच्चों की रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सरकार का उद्देश्य बच्चों को केवल रटने तक सीमित रखना नहीं बल्कि उन्हें समझने, बोलने, सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही बिग बुक और टीचर गाइड के जरिए ईसीसीई एजुकेटर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
डिजिटल मॉनिटरिंग से पारदर्शी बनेगी व्यवस्था
योगी सरकार ने पूरी वितरण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की है। बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटरों को वितरण प्रक्रिया की निगरानी और स्कैनिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए शासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किन बालवाटिकाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों तक शिक्षण सामग्री पहुंच चुकी है और कहां वितरण बाकी है। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूती मिलेगी।
पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिल रहा बड़ा संस्थागत स्वरूप
उत्तर प्रदेश में पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। अभी तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था में अधिकतर फोकस प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं पर रहता था, लेकिन अब बच्चों की शुरुआती सीखने की अवस्था को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का फोकस अब केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता, व्यवहारिक विकास और रचनात्मक सोच को मजबूत करने पर भी है। यही वजह है कि बालवाटिकाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक शिक्षण वातावरण से जोड़ने की दिशा में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि मजबूत प्रारंभिक शिक्षा ही आगे चलकर बच्चों के बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यक्तित्व विकास की सबसे मजबूत नींव बनती है।