अगले 5 सालों में टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड, UN की नई रिपोर्ट ने किया सतर्क, खेती और जनजीवन पर बढ़ेंगे ये ख़तरे
संयुक्त राष्ट्र की नई जलवायु रिपोर्ट ने दुनिया के सामने आने वाले वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और ब्रिटेन के मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच वर्षों में पृथ्वी लगातार रिकॉर्ड स्तर की गर्मी का सामना कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान के 1.5 डिग्री सेल्सियस की अहम सीमा को पार करने की संभावना 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है।वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के लगातार इस्तेमाल से पृथ्वी तेजी से गर्म हो रही है। इसका असर अब बाढ़, सूखा, हीटवेव, जंगल की आग और खाद्य संकट जैसी चरम मौसमी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है।
अगले पांच साल में टूट सकते हैं गर्मी के रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच वर्षों में कम से कम एक साल ऐसा हो सकता है, जब वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाएगा। इसके अलावा 91 प्रतिशत संभावना जताई गई है कि आने वाले पांच वर्षों में से किसी एक साल में पृथ्वी अब तक के सबसे गर्म वर्ष 2024 का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच हर साल का औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर की तुलना में 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। ब्रिटेन मौसम विभाग की जलवायु वैज्ञानिक और रिपोर्ट की सह-लेखक मेलिसा सीब्रुक ने कहा कि 1.5 डिग्री की सीमा कोई अचानक आने वाली खाई नहीं है, लेकिन तापमान में हर 0.1 डिग्री की बढ़ोतरी भी खतरों को और गंभीर बनाती जाती है।
यूरोप, भारत समेत कई हिस्सों में बढ़ेगी भीषण गर्मी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान लगातार बढ़ता रहा तो दुनिया को ऐसे मौसमीय हालात देखने पड़ सकते हैं, जो पहले कभी अनुभव नहीं किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप और भारत समेत कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी और चरम मौसम की घटनाएं और ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। इम्पीरियल कॉलेज लंदन की जलवायु वैज्ञानिक फ्रेडरिक ओटो ने कहा कि अत्यधिक गर्मी, सूखा और भारी बारिश जैसी घटनाएं शहरों, खेती और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकती हैं। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में झटके और जंगल की आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
अल नीनो से और बढ़ सकती है गर्मी
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ वर्षों में मजबूत अल नीनो बनने की संभावना है। अल नीनो प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में होने वाली प्राकृतिक गर्मी की स्थिति है, जो दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करती है और वैश्विक तापमान को बढ़ाती है। डब्ल्यूएमओ का अनुमान है कि इसका असर 2028 तक बना रह सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्ष 2027, 2024 के सबसे गर्म साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
आर्कटिक सबसे तेजी से गर्म हो रहा
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता आर्कटिक क्षेत्र को लेकर जताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक बाकी दुनिया की तुलना में करीब 3.5 गुना तेजी से गर्म हो रहा है। इसकी मुख्य वजह बर्फ और हिम क्षेत्र का तेजी से पिघलना है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक 2020-2025 के मुकाबले अगले पांच वर्षों में आर्कटिक का तापमान औसतन 2.8 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गर्मियों के दौरान आर्कटिक समुद्री बर्फ लगातार घटती जाएगी।
अमेजन जंगलों पर भी बड़ा खतरा
रिपोर्ट में अमेजन बेसिन को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वहां सामान्य से ज्यादा गर्म और सूखे हालात बन सकते हैं, जिससे जंगल की आग का खतरा बढ़ जाएगा। अमेजन जंगल फिलहाल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर पृथ्वी को राहत देने का काम करते हैं, लेकिन अगर वहां सूखा और आग बढ़ती है तो यह क्षेत्र खुद जलवायु संकट को और गंभीर बना सकता है।
अफ्रीका में बढ़ सकती है बाढ़ की आशंका
रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के चरम रूपों को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है।
UN ने कहा- दुनिया की कोशिशें अभी पर्याप्त नहीं
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रगति जरूर हुई है, लेकिन पृथ्वी का तापमान अभी भी दुनिया की कोशिशों से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोप, भारत और कई अन्य क्षेत्रों में बढ़ती भीषण गर्मी इस बात का संकेत है कि दुनिया अब भी बड़े पैमाने पर कोयला, तेल और गैस जला रही है। इसका असर अत्यधिक गर्मी, बाढ़, तूफान, जंगल की आग और सूखे के रूप में सामने आ रहा है।
खेती, पानी और लोगों की जिंदगी पर बढ़ेगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका सबसे ज्यादा असर खेती, जल संकट, खाद्य आपूर्ति और लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। दुनिया के कई हिस्सों में सूखा और जंगल की आग बढ़ सकती है, जबकि कई क्षेत्रों में बाढ़ और भारी बारिश की घटनाएं तेज हो सकती हैं।