Nipah Virus Outbreak: केरल में फिर लौटा निपाह वायरस! लोगों की निगरानी शुरू, 8 साल में छठी बार संक्रमण, जानें कितना खतरनाक है यह संक्रमण
Kozhikode Nipah Case: केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस के एक संदिग्ध मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। प्रारंभिक जांच में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद मरीज के नमूनों को अंतिम पुष्टि के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया है। प्रशासन ने मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी है और उन्हें एहतियातन क्वारंटीन में रहने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मरीज एक गोदाम की सफाई का काम कर रहा था, जहां बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौजूदगी की सूचना मिली है। माना जा रहा है कि संक्रमण का स्रोत यही हो सकता है। हालांकि, अंतिम पुष्टि रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है। इसकी पहचान पहली बार 1998-99 में मलेशिया के निपाह क्षेत्र में हुई थी, जिसके नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (Fruit Bats) में पाया जाता है और इन्हें इसका प्राकृतिक वाहक माना जाता है।
भारत में पहले भी आ चुके हैं मामले
भारत में निपाह वायरस के मामले पहली बार 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सामने आए थे। इसके बाद 2007 में नदिया जिले में संक्रमण पाया गया। हाल के वर्षों में केरल निपाह वायरस का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां 2018, 2021, 2023 और 2024 में भी इसके मामले सामने आए थे। 2018 का प्रकोप सबसे गंभीर माना जाता है, जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी।
| वर्ष | जिला/क्षेत्र | कुल मरीज | मौतें |
|---|---|---|---|
| 2018 | कोझिकोड (केरल) | 19 | 17 |
| 2019 | एर्नाकुलम (केरल) | 1 | 0 |
| 2021 | कोझिकोड (केरल) | 1 | 1 |
| 2023 | कोझिकोड (केरल) | 6 | 2 |
| 2024 | मलप्पुरम (केरल) | 2 | 1 |
| 2026 | कोझिकोड (केरल) | 1* | 0 |
कैसे फैलता है निपाह वायरस?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार निपाह वायरस कई तरीकों से फैल सकता है—
- संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आने से।
- चमगादड़ों द्वारा दूषित फलों या खाद्य पदार्थों के सेवन से।
- संक्रमित सूअरों या अन्य जानवरों के संपर्क से।
- संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे लार, खांसी, छींक या रक्त के संपर्क में आने से।
- अस्पतालों में संक्रमित मरीजों की देखभाल के दौरान भी संक्रमण फैल सकता है।
क्या हैं इसके लक्षण?
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण या फ्लू की तरह दिखाई देते हैं, जिसके कारण शुरुआती चरण में इसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश की शिकायत हो सकती है।
- इसके अलावा उल्टी, चक्कर आना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं।
- संक्रमण गंभीर होने पर मरीज में मानसिक भ्रम, सुस्ती, बेहोशी और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।
- कुछ मामलों में वायरस मस्तिष्क को प्रभावित कर एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) का कारण बनता है, जिससे मरीज कोमा में भी जा सकता है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।
कितना खतरनाक है निपाह वायरस?
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में गिना जाता है। इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है, जो संक्रमण की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर करती है। फिलहाल इस वायरस के लिए कोई विशेष दवा या व्यापक रूप से उपलब्ध वैक्सीन नहीं है। मरीजों का उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
बचाव के लिए क्या करें?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है—
- गिरे हुए या कटे-फटे फल खाने से बचें।
- फलों को अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें।
- चमगादड़ों या बीमार जानवरों के संपर्क में आने से बचें।
- बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय मास्क और हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता बरतें और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा?
केरल स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की है। संपर्क ट्रेसिंग का काम तेजी से किया जा रहा है और संभावित संक्रमितों की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।