Jal Jeevan Mission 2.0: नल कनेक्शन के बाद भी नहीं आ रहा पानी? अब सरकार करेगी ये बदलाव, जानिए गाँवों में क्या बदलेगा
ग्रामीण इलाकों में नल कनेक्शन मिलने के बाद भी कई जगह नियमित पानी की आपूर्ति और रखरखाव जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत पेयजल सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में कई बदलाव किए हैं।
सरकार के अनुसार, मिशन 2.0 के तहत अब केवल नल कनेक्शन देने पर नहीं, बल्कि पानी की नियमित आपूर्ति, योजनाओं के रखरखाव, पानी की गुणवत्ता और डिजिटल निगरानी पर भी ज़ोर दिया जाएगा। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को 6,154.96 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
राज्यों को जारी हुई 6,154.96 करोड़ रुपये की राशि
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में 10 राज्यों को 5,289.09 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की गई है। वहीं 'एसएनए स्पर्श' प्रणाली के माध्यम से 13 राज्यों को 865.87 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 2,711.52 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति मिली है। सरकार का कहना है कि इस राशि से पहले से स्वीकृत ग्रामीण जलपूर्ति योजनाओं के काम को गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अब केवल नल नहीं, नियमित जलपूर्ति पर रहेगा ज़ोर
सरकार के अनुसार जल जीवन मिशन 2.0 का फोकस अब केवल पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत जलपूर्ति प्रणाली के संचालन एंव रखरखाव, जल स्त्रोतों की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और डिजिटल गवर्नेस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण परिवारों को लंबे समय तक नियमित औऱ सुरक्षित पेयजल मिलता रहे।
ग्राम पंचायतों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
मिशन 2.0 के तहत पूरी जलपूर्ति योजनाओं की ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपा जाएगा। सरकार के अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर जलपूर्ति व्यवस्था के संचालन और रखरखाव तो मजबूत किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी बढ़ने से छोटी समस्याओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत किया जाएगा।
डिजिटल निगरानी से होगी पारदर्शिता
मिशन 2.0 के तहत 'एसएनए स्पर्श' प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजना-वार भुगतान और खर्च की निगरानी की जाएगी। सरकार के अनुसार, इससे धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता आएगी और प्रत्येक योजना की प्रगति पर नज़र रखना आसान होगा। इसके अलावा, पेयजल परिसंपत्तियों को ‘सुजलम भारत आईडी’ दी जाएगी और उन्हें PM गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैग किया जाएगा। इससे योजनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी निगरानी आसान हो सकेगी।
पानी की गुणवत्ता और जल स्रोतों पर रहेगा फोकस
सरकार के अनुसार मिशन 2.0 में जल स्त्रोतों की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सामुदायिक स्वमित्व को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही ‘जल सेवा अकलन’ के माध्यम से समुदाय आधारित मूल्यांकन की व्यवस्था भी की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल जलपूर्ति करना नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखना भी है।
सांसदों के साथ हो रही समीक्षा बैठकें
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में राज्यवार प्रगति की समीक्षा, क्षेत्रीय पेयजल समस्याओं और मिशन के बेहतर क्रियावन्यन पर चर्चा की जा रही है। उत्तर प्रदेश के सांसदों के साथ बैठक 10 अगस्त को प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि इन बैठकों से स्थानीय स्तर की समस्याओं और सुझावों को योजना के क्रियान्वयन में शामिल करने में मदद मिलेगी।
दिसंबर 2028 तक चलेगा मिशन
केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी है। योजना को 8.69 लाख करोड़ रुपये क कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार की सहायता शामिल है। सरकार का कहना है कि मिशन का उद्देश्य आने वाले सालों में ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित, पर्याप्त और भरोसेमंद पेयजल सेवाएँ सुनिश्चित करना है।