भीषण गर्मी में पेयजल-सिंचाई पर CM सख्त: 30 मई तक नहर-तालाब साफ, पानी की कमी न हो, हर जिले में कंट्रोल रूम एक्टिव

Gaon Connection | May 01, 2026, 18:41 IST
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प्रदेश में गर्मी और कम बारिश की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए और कहा कि पेयजल, सिंचाई और राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग पूरी तैयारी रखें। सूखा प्रभावित जनपदों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

प्रदेश में बढ़ती गर्मी और इस साल कम बारिश की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रशासन को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने साफ कहा कि पेयजल, सिंचाई और राहत के काम में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग पहले से पूरी तैयारी रखें।



उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए अहम निर्देश

शुक्रवार को कृषि, जलशक्ति, पशुधन, समाज कल्याण और उद्यान विभाग के मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पहले से सूखा प्रभावित रहे 18 जनपदों में विशेष निगरानी रखने को कहा। उन्होंने 15 जून से 30 जुलाई के बीच तय मानकों के अनुसार स्थिति का आकलन करने और आवश्यकता पड़ने पर राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही शासन से लेकर जनपद स्तर तक 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रखने और सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और डीजीपी तक नियमित रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए गए।



जल संकट से निपटने के लिए विशेष तैयारी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ-साथ टैंकर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखी जाएं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 30 मई तक नहरों, तालाबों और पोखरों की डी-सिल्टिंग हर हाल में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तालाबों से निकली मिट्टी प्रजापति समाज और पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है, ताकि इससे आजीविका के अवसर भी बढ़ सकें।



सिंचाई व्यवस्था और किसानों के लिए विशेष निर्देश

किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी नलकूपों को क्रियाशील रखने, समय पर मरम्मत सुनिश्चित करने और सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जल के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में पानी की कमी न हो और दुरुपयोग पर सख्त नियंत्रण रखा जाए। साथ ही अनुदानित बीज वितरण, कृषि परामर्श और फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।



खाद्यान्न, ऋण और बाजार व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र लाभार्थियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने और पर्याप्त भंडारण बनाए रखने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार से अतिरिक्त आवंटन लेने की भी बात कही गई। इसके साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।



स्वास्थ्य और पशुधन सुरक्षा के लिए निर्देश

भीषण गर्मी को देखते हुए अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और लू से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम रखने और जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया। वन विभाग को अभ्यारण्यों और पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं निराश्रित गो-आश्रय स्थलों में पानी, चारा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।



अर्ली वार्निंग सिस्टम और आपदा प्रबंधन

मुख्यमंत्री ने अर्ली वेदर वार्निंग सिस्टम को मजबूत बनाने और मौसम संबंधी सूचनाएं समय पर आम लोगों और किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही 19 हजार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों, होमगार्ड्स और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को जरूरत के अनुसार तैनात करने को कहा गया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई हो सके।



खरीफ फसल और सिंचाई तंत्र पर विशेष फोकस

खरीफ 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने नहरों के प्रभावी संचालन और टेल फीडिंग के माध्यम से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि खरीफ 1434 फसली वर्ष में 11,375 टेलों के सापेक्ष 10,487 टेलों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। तालाबों को भरने के अभियान में 24,153 लक्षित तालाबों में से 17,961 से अधिक भरे जा चुके हैं, जो 70 प्रतिशत से ज्यादा प्रगति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरों का संचालन केवल हेड रीच तक सीमित न रहे, बल्कि टेल एंड तक समान रूप से पानी पहुंचे। इसके लिए फील्ड स्तर पर कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय की जाए।

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