पूर्वोत्तर भारत को हनी हब बनाने की तैयारी, NECTAR और इंडिया हनी अलायंस में करार, जानें किसानों को होगा क्या फायदा
पूर्वोत्तर भारत में शहद और मधुमक्खी पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच (NECTAR) और इंडिया हनी अलायंस (IHA) के बीच पांच साल के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मकसद पूर्वोत्तर क्षेत्र में शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालन को अधिक संगठित, टिकाऊ और बाजार आधारित बनाना है। इंडिया हनी अलायंस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह समझौता पूर्वोत्तर भारत में मजबूत और टिकाऊ हनी इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा। इससे मधुमक्खी पालकों, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक फायदा मिलने की उम्मीद है।
किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती पर जोर
इस साझेदारी के तहत NECTAR की तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक क्षमताओं और संस्थागत पहुंच को इंडिया हनी अलायंस के उद्योग अनुभव और नीति समर्थन के साथ जोड़ा जाएगा। दोनों संस्थाएं मिलकर मधुमक्खी पालन के लिए एकीकृत और टिकाऊ ढांचा तैयार करेंगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। साथ ही पूर्वोत्तर भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम और ट्रेसेबल शहद उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की भी योजना है।
मधुमक्खी पालकों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग
समझौते के तहत दोनों संस्थाएं मधुमक्खी पालकों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम चलाएंगी। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र के शहद के लिए तकनीकी सहायता प्रणाली विकसित करने, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और घरेलू व निर्यात बाजारों से बेहतर तालमेल बनाने पर भी काम किया जाएगा। NECTAR और IHA पायलट प्रोजेक्ट्स और बी-कीपिंग क्लस्टर विकसित करने पर भी साथ काम करेंगे, ताकि शहद उत्पादन, संग्रहण और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाया जा सके। इसके अलावा वैल्यू एडेड हनी प्रोडक्ट्स विकसित करने और सेक्टर से जुड़ा मजबूत डेटा बेस तैयार करने की दिशा में भी पहल की जाएगी।
पूर्वोत्तर में अपार संभावनाएं : NECTAR
NECTAR के महानिदेशक अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों की वजह से मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया हनी अलायंस के साथ यह साझेदारी वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने, स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने और किसानों के लिए लंबे समय तक फायदेमंद व्यवस्था तैयार करने में मदद करेगी।
भविष्य के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश
इंडिया हनी अलायंस के महासचिव दीपक जॉली ने कहा कि यह सहयोग पूर्वोत्तर भारत में अधिक संगठित और भविष्य के लिए तैयार मधुमक्खी पालन इकोसिस्टम विकसित करने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों और मधुमक्खी पालकों को नए बाजार और बेहतर आय के अवसर मिल सकेंगे।