महाराष्ट्र में प्याज संकट गहराया, जयंत पाटिल ने सरकार से की ₹2000 प्रति क्विंटल की गारंटी और ₹1500 सब्सिडी देने की मांग
महाराष्ट्र में लगातार गिरते प्याज के दामों के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल ने राज्य सरकार से प्याज किसानों को राहत देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर प्याज के लिए ₹2000 प्रति क्विंटल का गारंटी मूल्य तय करने और किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए ₹1500 प्रति क्विंटल सब्सिडी देने की मांग की है। जयंत पाटिल ने कहा कि नासिक, पुणे, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्याज उत्पादक जिलों के लाखों किसान इस समय भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। बाजार में प्याज की कीमतें लगातार गिर रही हैं, जबकि खेती की लागत तेजी से बढ़ी है। बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर किसानों का खर्च काफी बढ़ चुका है, लेकिन उन्हें फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा।
NAFED से बड़े स्तर पर खरीद की मांग
जयंत पाटिल ने सरकार से मांग की कि नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और दूसरी एजेंसियों को बड़े पैमाने पर प्याज खरीदने का निर्देश दिया जाए, ताकि किसानों को तुरंत राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को ₹500 से ₹700 प्रति क्विंटल तक अतिरिक्त समूह सब्सिडी और रासायनिक खाद पर सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए दी जानी चाहिए।
निर्यात नीति पर भी उठाए सवाल
11 मई को लिखे गए पत्र में जयंत पाटिल ने दावा किया कि प्याज निर्यात नीति में बार-बार बदलाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मिलकर स्थिर और दीर्घकालिक निर्यात नीति बनाने की मांग की। उनका कहना है कि निर्यात को लेकर लगातार बदलते फैसलों का सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
भंडारण सुविधाओं पर भी जोर
जयंत पाटिल ने ग्रामीण इलाकों में आधुनिक प्याज भंडारण केंद्र और पारंपरिक प्याज ‘चाली’ बनाने के लिए सब्सिडी देने की मांग भी उठाई। साथ ही उन्होंने किसानों को रियायती दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज बीज उपलब्ध कराने की भी अपील की। महाराष्ट्र में इस समय कई किसान गिरते दामों से परेशान हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां किसानों को मंडियों में प्याज की बेहद कम कीमत मिली। ऐसे में सरकार पर किसानों को राहत देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।