प्याज़ की क़ीमतें बढ़ीं तो सरकार ने खोला बफ़र स्टॉक, दिल्ली समेत इन 5 स्थानों को सप्लाई, जानें सरकार ने गुणवत्ता को लेकर क्या बताया?

Gaon Connection | Aug 28, 2026, 13:23 IST
प्याज की खुदरा कीमतों में वृद्धि के बीच सरकार ने बफर स्टॉक की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के पास मौजूद एक लाख इक्कीस हजार टन प्याज के बफर स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी बताई गई है। 'कांदा एक्सप्रेस' नामक रेलगाड़ी से प्याज को प्रमुख शहरों में भेजा जा रहा है, जिससे कीमतें नियंत्रित होंगी।

दिल्ली और दूसरे प्रमुख उपभोग केंद्रों में प्याज़ की खुदरा क़ीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने इसकी उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। इसी बीच उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने सरकार के पास मौजूद प्याज़ के बफ़र स्टॉक की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि केंद्र के 1.21 लाख टन प्याज़ के बफ़र स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी है। उन्होंने उन रिपोर्टों को भी ख़ारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि बफ़र स्टॉक का 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ गया है। निधि खरे ने PTI से कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है और स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी है।



प्याज़ के भंडारण को लेकर इस साल सरकार ने पिछली व्यवस्था से अलग क़दम उठाया है। उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव के मुताबिक़, पिछले वर्षों में बफ़र स्टॉक कारोबारियों के पास रखा जाता था, लेकिन इस बार पहली बार सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) को इसके भंडारण की ज़िम्मेदारी दी गई है। स्टॉक की गुणवत्ता की नियमित अंतराल पर एक तीसरे पक्ष से जाँच भी कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्याज़ में क़रीब 90 प्रतिशत पानी होता है और कटाई के बाद लगभग तीन महीने तक इसकी गुणवत्ता बनी रहती है। इसके बाद पानी वाष्पित होने के कारण प्याज़ हर महीने सिकुड़ता जाता है और ख़राब होने की मात्रा भंडारण की परिस्थितियों तथा वेंटिलेशन पर निर्भर करती है।



बफ़र स्टॉक की गुणवत्ता और भंडारण को लेकर क्या कहा सरकार ने?

प्याज़ के बफ़र स्टॉक की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी है। उनके मुताबिक़, सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज़ का बफ़र स्टॉक है और इसका 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ने की बात सही नहीं है। इस साल कुछ प्याज़ की ख़रीद मई में की गई थी, जबकि बफ़र स्टॉक का बड़ा हिस्सा जून-जुलाई में ख़रीदा गया। इसी वजह से स्टॉक की गुणवत्ता अभी अच्छी बनी हुई है।



भंडारण की व्यवस्था में भी इस साल बदलाव किया गया है। पिछले वर्षों में बफ़र स्टॉक कारोबारियों के पास रखा जाता था, लेकिन इस बार पहली बार CWC को भंडारण की ज़िम्मेदारी दी गई है। स्टॉक की गुणवत्ता का नियमित अंतराल पर तीसरे पक्ष से आकलन कराया जा रहा है। निधि खरे ने प्याज़ के भंडारण की प्रक्रिया के बारे में बताया कि इसमें क़रीब 90 प्रतिशत पानी होता है। कटाई के बाद लगभग तीन महीने तक इसकी गुणवत्ता बनी रहती है। इसके बाद पानी वाष्पित होने के कारण प्याज़ सिकुड़ता जाता है। प्याज़ के ख़राब होने की मात्रा भंडारण की परिस्थितियों और वेंटिलेशन पर निर्भर करती है। प्याज़ की ख़रीद नाफेड (NAFED) और NCCF जैसी एजेंसियों के ज़रिये की जाती है। इस साल प्याज़ की रिकवरी 72 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 2022 में 49 प्रतिशत, 2023 में 54 प्रतिशत और 2024 में 63 प्रतिशत थी।



‘कांदा एक्सप्रेस’ से किन शहरों में पहुँच रहा प्याज़?

प्याज़ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने बफ़र स्टॉक को ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम की समर्पित रेल रेक के ज़रिये दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी भेजना शुरू किया है। शुक्रवार को 453 टन प्याज़ की खेप दिल्ली पहुँची। इस पहल के ज़रिये दिल्ली-NCR और आसपास के शहरों में आपूर्ति बढ़ाने और क़ीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि खुदरा क़ीमतों में गिरावट का असर एक सप्ताह के भीतर दिखाई देगा।



निधि खरे ने बताया कि इस पहल के बाद नासिक की मंडियों में प्याज़ की क़ीमतें कम होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को प्याज़ उत्पादक केंद्र नासिक में मंडी क़ीमत 44 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि उसी दिन उपभोग केंद्र दिल्ली में खुदरा क़ीमत 25 रुपये प्रति किलोग्राम थी। उन्होंने इसे असामान्य स्थिति बताया। उन्होंने बताया कि राजस्थान और मध्य प्रदेश धीरे-धीरे दिल्ली तथा उत्तर भारत के दूसरे राज्यों के लिए प्याज़ के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन रहे हैं। निधि खरे ने कहा कि स्टॉक अच्छा है और किसी समस्या की आशंका नहीं होनी चाहिए।



ख़रीफ़ और रबी प्याज़ की फ़सल को लेकर क्या उम्मीद है?

आने वाली फ़सल की स्थिति पर उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि ख़रीफ़ प्याज़ की फ़सल का आउटलुक अच्छा है और अब अल नीनो को लेकर चिंता ख़त्म हो गई है। रबी प्याज़ की फ़सल पर अल नीनो के असर को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी उन्होंने कहा कि सिंचाई की स्थिति बेहतर हुई है और प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर अच्छा बना हुआ है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़, राजधानी में गुरुवार को प्याज़ की खुदरा क़ीमत 88 प्रतिशत बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। एक साल पहले इसी समय यह क़ीमत 33 रुपये प्रति किलोग्राम थी।



देश में प्याज़ की उपलब्धता और क़ीमतों की स्थिति क्या है?

प्याज़ की मौजूदा क़ीमतों के बीच उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आँकड़ों में गुरुवार को देशभर में इसकी औसत खुदरा क़ीमत 46.58 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। इसी दिन औसत थोक क़ीमत 38.29 रुपये प्रति किलोग्राम रही। खुदरा क़ीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बावजूद निधि खरे ने कहा कि आने वाले महीनों में घरेलू माँग पूरी करने के लिए प्याज़ की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। इस उपलब्धता को 2025-26 में अनुमानित 307.37 लाख टन प्याज़ उत्पादन से भी समर्थन मिल रहा है। यह उत्पादन पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के उत्पादन के लगभग बराबर है।

Tags:
  • Onion Prices India
  • Onion Buffer Stock
  • Onion Price Hike
  • Kanda Express
  • Nidhi Khare
  • CWC Onion Storage
  • Onion Supply Delhi
  • Onion Production India
  • Kharif Onion Crop
  • Rabi Onion Crop