बफ़र स्टॉक के लिए सरकार ने 6वीं बार बढ़ाया प्याज़ खरीद भाव, जानें फिर भी किसान क्यों नहीं बेच रहे फसल
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफ़ेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज़्यूमर्स फ़ेडरेशन (एनसीसीएफ़) के लिए प्याज़ खरीद मूल्य बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल (23.35 रुपये प्रति किलो) कर दिया है। पहले यह कीमत 2,175 रुपये प्रति क्विंटल थी। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 30 जुलाई से नई खरीद दर लागू कर दी है। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि इतनी मामूली बढ़ोतरी से किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी।
खरीद मूल्य बढ़ाने के साथ ही सरकार ने प्याज़ खरीद के नियम भी सख़्त कर दिए हैं। अब 'अंडर रिलैक्स्ड स्पेसिफिकेशन (यूआरएस)' श्रेणी के तहत खरीद बंद कर दी गई है और केंद्रीय एजेंसियों को केवल ग्रेड-ए गुणवत्ता वाले प्याज़ खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों का कहना है कि इससे बड़ी मात्रा में उनका उत्पादन सरकारी खरीद से बाहर हो जाएगा।
यूआरएस श्रेणी हटने से क्या बदला?
केंद्र सरकार ने 3 जून को खरीद प्रक्रिया तेज़ करने के लिए यूआरएस श्रेणी शुरू की थी। इसके तहत प्याज़ के आकार की सीमा 45-65 मिलीमीटर से बढ़ाकर 35-70 मिलीमीटर कर दी गई थी, जिससे ज़्यादा किसानों का प्याज़ सरकारी खरीद के लिए योग्य हो गया था। अब यह छूट वापस ले ली गई है। इसके बाद केवल 45 से 65 मिलीमीटर आकार और ग्रेड-ए गुणवत्ता वाले प्याज़ ही खरीदे जाएंगे।
इस बार कितना खरीद लक्ष्य रखा गया है?
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार बफ़र स्टॉक के लिए लगातार छठी बार प्याज़ की खरीद कर रही है। इस सीज़न में दो लाख टन प्याज़ खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले नेफ़ेड और एनसीसीएफ़ अब तक लगभग एक लाख टन प्याज़ खरीद चुके हैं। एक अधिकारी ने कहा, "हमने लगभग 50 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है और आने वाले हफ़्तों में बाकी खरीद भी पूरी होने की उम्मीद है।" खरीद को आसान बनाने के लिए एनसीसीएफ़ ने नासिक ज़िले में 27 और नेफ़ेड ने 30 खरीद केंद्र खोले हैं।
किसान बढ़ी हुई कीमत से नाराज़ क्यों हैं?
TOI के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य प्याज़ उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा, "प्याज़ की खेती की लागत 2,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज़्यादा हो गई है। किसानों को अभी एपीएमसी मंडियों में लगभग 2,000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, लेकिन भंडारण के दौरान करीब 30 प्रतिशत प्याज़ खराब हो जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।"
किसानों ने सरकार से क्या मांग की?
भरत दिघोले ने गुणवत्ता मानकों को सख़्त किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "खरीद मूल्य में केवल मामूली बढ़ोतरी की गई है, लेकिन शर्तें पहले से ज़्यादा सख़्त कर दी गई हैं। अब केंद्रीय एजेंसियाँ केवल 45 से 65 मिलीमीटर आकार और अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज़ ही खरीदेंगी, जिससे बड़ी मात्रा में किसानों का प्याज़ सरकारी खरीद से बाहर हो जाएगा।" किसान संगठन ने केंद्र सरकार से खरीद मूल्य बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से बाज़ार में कम कीमत मिलने से किसानों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए इतनी बढ़ोतरी ज़रूरी है। अब जबकि खरीद लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा पूरा हो चुका है, किसान इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि नई खरीद दर और सख़्त गुणवत्ता मानकों से उन्हें कितना फ़ायदा मिलता है।