सरकार का प्याज खरीद वादा: क्या ₹12.35 प्रति किलो की खरीद से किसानों का भला होगा, जब एक किसान को ₹1 किलो भी नहीं मिला भाव?

Preeti Nahar | May 15, 2026, 18:51 IST
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महाराष्ट्र प्याज किसानों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार ने बताया कि सरकार 15 मई से प्याज की खरीद शुरू कर रही है, जिससे किसानों को गिरते प्याज के दामों से राहत मिलेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी 2 लाख टन प्याज खरीदेगी जो एनएएफईडी और एनसीसीएफ के जरिए खरीद जाएगी। किसानों को पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। भुगतान तीन दिनों में सीधे बैंक खाते में आएगा।
<p>NAFED और NCCF करेंगी प्याज की खरीद<br></p>

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी है कि प्याज किसानों को बाजार में गिरते दामों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार 15 मई से मूल्य स्थिरीकरण योजना (Price Stabilization Scheme) के तहत प्याज की खरीद शुरू कर रही है। सरकार ने इस वर्ष कुल 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।



NAFED और NCCF करेंगी खरीद

सरकार की ओर से किसानों से प्याज खरीदने की जिम्मेदारी NAFED और NCCF को सौंपी गई है। दोनों एजेंसियां एक-एक लाख टन प्याज की खरीद करेंगी। खरीद के बाद प्याज के सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को दी गई है। इसके लिए देशभर में 20 गोदामों की पहचान भी कर ली गई है, जहां खरीदी गई उपज को रखा जाएगा।



पोर्टल पर पंजीकरण के बाद होगी खरीद

किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए NAFED के e-Samridhi और NCCF के ई-संयुक्ति पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। अधिकारियों के मुताबिक, केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले ग्रेड-ए प्याज की ही खरीद की जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को भुगतान में देरी न हो, इसलिए उपज बेचने के बाद तीन दिनों के भीतर सीधे बैंक खाते में राशि भेजी जाएगी।



25 बोरी प्याज बेचने के बाद भी किसान के हाथ खाली

हालांकि ये खबर ऐसे समय में आई है जब महाराषट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के प्रकाश गलधर नामक किसान की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। चार एकड़ में प्याज उगाने वाले इस किसान ने बड़ी उम्मीद से अपनी फसल मंडी पहुंचाई थी। 25 बोरी प्याज का वजन 1262 किलो निकला, लेकिन मंडी में उसका भाव सिर्फ ₹1 प्रति किलो लगा। पूरी फसल की कीमत मात्र ₹1262 बनी लेकिन असली सदमा इसके बाद मिला।



मंडी में हमाली, तुलाई, ढुलाई और दूसरे खर्च काटने के बाद किसान के हाथ में कुछ नहीं बचा। उल्टा उसे एक रुपया और जमा करने को कहा गया। जिस किसान ने महीनों खेत में पसीना बहाया, बीज-खाद और दवाइयों पर पैसा खर्च किया, सिंचाई करवाई और फसल तैयार की, उसी को आखिर में अपनी मेहनत का दाम तक नहीं मिला। किसान प्रकाश गलधर ने बताया कि बाकी प्याज उन्होंने खेत में ही फेंक दी, क्योंकि उसे बेचने से भी नुकसान हो रहा था। बेटी की शादी का कर्ज पहले से है और अब खेती भी घाटे का सौदा बन चुकी है।



भंडारण के लिए तय किए गए मानक

हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया है कि छह महीने तक सुरक्षित रखे जा सकने वाले ग्रेड-ए प्याज के लिए न्यूनतम रिकवरी रेट 72 प्रतिशत तय किया है। यह दर पिछले वर्ष के समान ही रखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय भंडारण निगम पहली बार बड़े स्तर पर प्याज भंडारण का काम संभाल रहा है, इसलिए गुणवत्ता और भंडारण क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।



ऐसे तय होगी प्याज की खरीद कीमत

अधिकारियों के अनुसार, राज्यों में प्याज का न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य पिछले तीन दिनों के दौरान प्रमुख मंडियों में रही अधिकतम और मॉडल कीमतों के आधार पर तय किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को बाजार में चल रहे औसत दामों से बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके।

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