सिर्फ 30% पानी बचा! देश के बड़े जलाशयों को लेकर सामने आई चिंताजनक रिपोर्ट, इन प्रदेशों की हालात सबसे खराब
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले जल भंडारण को लेकर चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में अब कुल क्षमता का केवल 30.67 प्रतिशत पानी ही बचा है। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.56 अरब घन मीटर (BCM) है, जबकि वर्तमान में इनमें 56.3 BCM पानी मौजूद है। आंकड़े बताते हैं कि देश के हर चार में से तीन जलाशय आधे से अधिक खाली हैं। हालांकि वर्तमान भंडारण पिछले वर्ष की इसी अवधि और सामान्य स्तर से थोड़ा बेहतर है, लेकिन कई राज्यों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
मार्च से मई तक 29% जिलों में सामान्य से कम बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 1 मार्च से 28 मई के बीच देश के 725 जिलों में से 29 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई। वहीं जनवरी और फरवरी के दौरान देश के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में वर्षा की कमी दर्ज की गई थी। इसका असर जलाशयों के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है।
दक्षिण भारत में सबसे कम जल भंडारण
देश के पांच क्षेत्रों में दक्षिण भारत की स्थिति सबसे खराब है। यहां के 47 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 22.5 प्रतिशत पानी बचा है। 55.28 BCM क्षमता वाले इन जलाशयों में वर्तमान में 12.45 BCM पानी मौजूद है। तेलंगाना और कर्नाटक में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां जलाशयों का भंडारण क्रमशः 16 प्रतिशत और 16.77 प्रतिशत पर पहुंच गया है। केरल में जलस्तर घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां जलाशय क्रमशः 35 और 33 प्रतिशत भरे हुए हैं।
पूर्वी भारत में भी जलस्तर कम
पूर्वी क्षेत्र के 27 जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 24 प्रतिशत पानी बचा है। पश्चिम बंगाल के जलाशयों में भंडारण 12.5 प्रतिशत पर बना हुआ है, जबकि ओडिशा में यह घटकर 21.5 प्रतिशत रह गया है। हाल की बारिश से असम में कुछ राहत मिली है, जहां जलाशय 37 प्रतिशत तक भर गए हैं। वहीं मेघालय और त्रिपुरा के जलाशयों में क्रमशः 55 और 60 प्रतिशत से अधिक पानी मौजूद है।
उत्तर भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर
उत्तर भारत के 11 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का 39 प्रतिशत पानी मौजूद है। पंजाब में जलाशय 59 प्रतिशत भरे हुए हैं, जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में 33 प्रतिशत है।
पश्चिम और मध्य भारत में क्या है स्थिति?
पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में कुल क्षमता का 36 प्रतिशत पानी बचा है। महाराष्ट्र में जलाशयों का स्तर 28 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि गुजरात में यह 45 प्रतिशत और गोवा में 31 प्रतिशत है। मध्य भारत के 28 जलाशयों में कुल क्षमता का 35 प्रतिशत पानी मौजूद है। छत्तीसगढ़ में सबसे बेहतर स्थिति है, जहां जलाशय 54 प्रतिशत तक भरे हैं। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 33 प्रतिशत और उत्तराखंड में केवल 19 प्रतिशत है।
मानसून में देरी से बढ़ सकती है चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में हो रही देरी से जलाशयों पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि अगले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है तो जलाशयों के जलस्तर में सुधार देखने को मिल सकता है। जलाशयों में घटता जलस्तर ऐसे समय सामने आया है, जब देश के कई हिस्से पहले से ही वर्षा की कमी और बढ़ती गर्मी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताह मानसून और जल संसाधनों दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।