PM Awas Yojana: बिहार के 11 लाख से ज्यादा परिवारों को पक्का घर, 2026-27 के लिए 11.18 लाख पीएम आवास की मंज़ूरी का ऐलान
बिहार में कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी घोषणा की गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2026-27 के लिए बिहार में 11 लाख 18 हजार पीएम आवास की स्वीकृति दिए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी गरीब परिवार कच्चे मकान में न रहे और आगे होने वाले सर्वे में जो पात्र परिवार छूट गए हैं, उन्हें भी पक्का घर उपलब्ध कराया जाए।
यह घोषणा गुरुवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रम में की गई। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीएम आवास योजना के लाभुकों को नवनिर्मित पक्के घरों की चाबियाँ सौंपीं। राज्य के 2 लाख 35 हजार लाभुकों को इस दौरान चाबी दी गई, जबकि नए आवास के लिए स्वीकृति पत्र भी दिए गए।
11.18 लाख परिवारों के लिए पक्के घर की तैयारी
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार के लिए 2026-27 में 11.18 लाख पीएम आवास की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले सर्वे में अगर कोई पात्र परिवार आवास से वंचित रह जाता है, तो उसे भी योजना के दायरे में लाने का प्रयास किया जाएगा। पीएम आवास योजना ग्रामीण इलाक़ों में ऐसे परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिनके पास रहने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित आवास नहीं है। ऐसे परिवारों के लिए पक्का घर मिलने का मतलब सिर्फ़ एक मकान नहीं, बल्कि बारिश, गर्मी और दूसरी मौसम संबंधी परेशानियों से अधिक सुरक्षित जीवन भी है।
2.35 लाख लाभुकों को मिली घर की चाबी
पटना में आयोजित कार्यक्रम में पहले से तैयार घरों के लाभुकों को चाबी सौंपी गई। राज्यभर से जुड़े 2.35 लाख लाभुकों को पक्के घर मिलने की जानकारी कार्यक्रम में दी गई। ग्रामीण परिवारों के लिए आवास योजना का लाभ मिलने से घर के साथ-साथ बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी दूसरी बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच आसान बनाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी परिवार को मिलने वाली वास्तविक सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती हैं।
जीविका दीदियों के उत्पादों के लिए बनेगा बाजार
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़ी दूसरी योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जीविका दीदियों के बनाए उत्पादों को बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार की ओर से हाट बनाए जाएंगे। बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्थानीय स्तर पर खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प और दूसरे सामान तैयार करती हैं। ऐसे उत्पादों के लिए बाज़ार मिलने से महिलाओं की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़े हाट बनाने में सहयोग करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इन हाटों के ज़रिए जीविका दीदियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़ा बाज़ार मिल सकेगा।
किसानों के लिए भी फसल बीमा योजना
केंद्रीय मंत्री ने बिहार में फसल बीमा योजना के लागू होने की बात भी कही। फसल बीमा का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या दूसरे कारणों से फसल को हुए नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। किसानों के लिए यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि सूखा, बाढ़, अत्यधिक बारिश या दूसरी प्राकृतिक परिस्थितियों से फसल प्रभावित होने पर खेती की लागत निकालना मुश्किल हो सकता है। बीमा योजना ऐसे जोखिमों के ख़िलाफ़ किसानों को आर्थिक सहारा देने का माध्यम बन सकती है।
आवास के साथ ग्रामीण आजीविका पर भी ज़ोर
बिहार के लिए आवास की यह घोषणा ग्रामीण विकास की तस्वीर में एक अहम हिस्सा है। एक तरफ़ पात्र परिवारों को पक्का घर देने की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ़ ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों के लिए बाज़ार और किसानों के लिए फसल बीमा जैसे मुद्दों को भी कार्यक्रम में उठाया गया। हालांकि, 11.18 लाख आवासों की घोषणा के बाद पात्रता, लाभुकों की अंतिम सूची और निर्माण की समयसीमा जैसी जानकारी आगे की सरकारी प्रक्रिया में स्पष्ट होगी। इसलिए लाभुकों को स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक योजना पोर्टल से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।