1,015 पैक्स में बनेंगे अनाज गोदाम, 1.80 लाख मीट्रिक टन बढ़ी भंडारण क्षमता; किसानों को कैसे होगा फायदा?
देश में फसल उत्पादन बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सुरक्षित भंडारण की भी है। कई बार किसानों को पर्याप्त गोदाम नहीं मिलने के कारण कटाई के तुरंत बाद अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। इसी समस्या को देखते हुए सहकारी क्षेत्र में गाँव स्तर पर भंडारण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अन्न भंडारण योजना के तहत देशभर में 1,015 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का चयन किया गया है, जहाँ आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं।
लोकसभा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 313 पैक्स में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इन गोदामों का उद्देश्य केवल अनाज सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि गाँव स्तर पर कृषि से जुड़ी सुविधाओं को भी मजबूत करना है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त भंडारण सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद मजबूरी में उपज बेचने की आवश्यकता कम होगी। यदि बाजार में कीमतें कम हों तो किसान अपनी उपज गोदाम में सुरक्षित रखकर बेहतर दाम मिलने का इंतजार कर सकेंगे। इससे फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी और भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। इस योजना के तहत पैक्स को केवल गोदाम तक सीमित नहीं रखा गया है। यहाँ कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि प्रसंस्करण इकाइयाँ, उचित मूल्य की दुकानें और अन्य कृषि अवसंरचना भी विकसित की जाएगी। इससे किसानों को कई सेवाएँ एक ही स्थान पर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कई योजनाओं को जोड़ा गया
इस योजना में अलग-अलग सरकारी योजनाओं का समन्वय किया गया है। इसमें कृषि अवसंरचना निधि, कृषि विपणन अवसंरचना, कृषि यांत्रिकीकरण पर उप-मिशन और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना जैसी योजनाओं को जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य गाँव स्तर पर कृषि अवसंरचना का विकास तेज करना है ताकि किसानों को अधिक सुविधाएँ मिल सकें।
राज्यों में कहाँ बने सबसे अधिक गोदाम?
इस योजना के तहत अब तक बने 313 गोदामों में सबसे अधिक 121 गोदाम राजस्थान में तैयार हुए हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 117, गुजरात में 44 और महाराष्ट्र में 19 गोदाम बन चुके हैं। इसके अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड और कर्नाटक में भी गोदामों का निर्माण पूरा हुआ है।
बिहार में भी बढ़ेगी भंडारण सुविधा
बिहार में इस योजना के तहत 36 पैक्स का चयन किया गया है। इनमें से 27 पैक्स ने कृषि विपणन अवसंरचना योजना के तहत सहायता के लिए आवेदन किया है। पश्चिम चंपारण जिले के चार पैक्स में गोदाम निर्माण का काम शुरू भी हो चुका है। इससे राज्य में गांव स्तर पर भंडारण सुविधाएँ बढ़ने की उम्मीद है।
एफसीआई की जरूरतों से भी जुड़ी योजना
योजना को भारतीय खाद्य निगम की भंडारण आवश्यकता के साथ भी जोड़ा गया है। एफसीआई ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 216 स्थानों पर लगभग 26.03 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता की जरूरत चिन्हित की है। इसी को ध्यान में रखते हुए बड़े गोदामों के लिए 9 वर्ष का एकसमान किराया आश्वासन देने का प्रावधान किया गया है, ताकि सहकारी संस्थाएँ निवेश के लिए आगे आएँ।
नियमों में किए गए बदलाव
योजना को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण संशोधन भी किए गए हैं। कृषि अवसंरचना निधि के तहत ऋण गारंटी अवधि 2+5 वर्ष से बढ़ाकर 2+8 वर्ष कर दी गई है। वहीं कृषि विपणन अवसंरचना योजना में मार्जिन मनी की आवश्यकता 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है।
इसके अलावा गोदाम निर्माण की स्वीकृत लागत और सब्सिडी दोनों बढ़ाई गई हैं। पैक्स को आंतरिक सड़क, तौल पुल और चारदीवारी जैसी सहायक सुविधाओं के लिए अतिरिक्त सब्सिडी का भी प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अवसंरचना मजबूत करने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि गाँव स्तर पर भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएँ एक साथ विकसित होती हैं, तो किसानों को केवल फसल बेचने तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने और कृषि से अधिक आय अर्जित करने के अवसर भी मिल सकते हैं।