अब पश्मीना से बढ़ेगी कमाई, 25% अतिरिक्त इंसेंटिव देगी सरकार; तीन साल में दोगुनी होंगी बकरियाँ
लद्दाख में पश्मीना उद्योग को मज़बूत करने और खानाबदोश पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने कई अहम फ़ैसले किए हैं। प्रशासन ने पश्मीना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंज़ूरी देने के साथ-साथ इस क्षेत्र के लिए 8 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फ़ंड भी बनाया है। इसका उद्देश्य पश्मीना पालकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, बकरी पालन को अधिक लाभकारी बनाना और पश्मीना उत्पादन की गुणवत्ता तथा मात्रा में सुधार करना है।
ये फ़ैसले लद्दाख पश्मीना विकास बोर्ड की पहली बैठक में लिए गए, जिसकी अध्यक्षता उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने की। प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था से न केवल पश्मीना पालकों की आय बढ़ेगी, बल्कि वैज्ञानिक तकनीकों के ज़रिए पश्मीना उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भुगतान में होने वाली लंबी देरी दूर होगी, जिससे खानाबदोश पशुपालक समुदायों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
पश्मीना पालकों को मिलेगा 25% अतिरिक्त प्रोत्साहन, समय पर भुगतान के लिए बना 8 करोड़ का फ़ंड
प्रशासन ने पशुधन विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत पश्मीना पालकों को कच्चे पश्मीना की सरकारी खरीद मूल्य के अतिरिक्त 25 प्रतिशत उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। प्रशासन का मानना है कि इससे पश्मीना बकरी पालन अधिक लाभकारी बनेगा और इस पारंपरिक आजीविका को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा 8 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फ़ंड भी मंज़ूर किया गया है, ताकि पशुपालकों को भुगतान समय पर मिल सके। नई व्यवस्था के तहत ऑल चांगथांग पश्मीना ग्रोअर्स कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी (ACPGCMS) खरीद लागत का 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करेगी, जबकि शेष राशि दो महीने के भीतर जारी की जाएगी। इससे पहले पशुपालकों को भुगतान मिलने में आठ से दस महीने तक का इंतज़ार करना पड़ता था।
तीन साल में दोगुनी होगी पश्मीना बकरियों की संख्या
प्रशासन ने तय किया है कि उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पशुधन सुधार और वैज्ञानिक प्रजनन (ब्रीडिंग) पर खर्च किया जाएगा। वहीं 20 प्रतिशत राशि आधुनिक कंघी (कॉम्बिंग) उपकरण और उससे जुड़ा बुनियादी ढाँचा विकसित करने में इस्तेमाल होगी। शेष 20 प्रतिशत राशि का उपयोग पशुपालक घरेलू और अन्य व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए कर सकेंगे।
प्रशासन ने अगले तीन वर्षों में लद्दाख में पश्मीना बकरियों की संख्या लगभग दो लाख से बढ़ाकर चार लाख करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही वैज्ञानिक प्रजनन और आधुनिक कॉम्बिंग उपकरणों के इस्तेमाल से प्रति बकरी औसत पश्मीना उत्पादन को लगभग 200 ग्राम से बढ़ाकर 350 ग्राम तक पहुँचाने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से खानाबदोश पशुपालक समुदायों की आय में वृद्धि होगी और दुनिया के सबसे उत्कृष्ट प्राकृतिक रेशों में गिने जाने वाले लद्दाख के पश्मीना की गुणवत्ता तथा उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।