काम की तलाश में बढ़ी महिलाएँ, लेकिन बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत पर पहुँची; पीरियोडिक लेबर फोर्स के सर्वे में हुआ खुलासा
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ओर से जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के जून 2026 के आँकड़ो के अनुसार देश में महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ी है, हालांकि, रोज़गार की तलाश में श्रम बाजार में आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने के साथ उनकी बेरोज़गारी दर भी 5.9 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी 36.6 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
पीएलएफएस के जून 2026 के मासिक बुलेटिन में देश में रोज़गार और बेरोज़गारी से जुड़े नए आँकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की श्रम भागीदारी में पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इसका मतलब है की पहले की तुलना में अधिक महिलाएँ रोज़गार की तलाश में श्रम बजार से जुड़ रही हैं। हालांकि इसके साथ ही महिलाओं की बेरोज़गारी दर में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, जो बताती है कि श्रम बाजार में आने वाली सभी महिलाओं को रोज़गार नहीं मिल पा रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, रोज़गार के आँकड़ों में भी बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर बढकर 32.7 प्रतिशत रही, जबकि जून 2025 में यह 32.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी 35.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 24.8 प्रतिशत रही। पुरुषों की श्रम भागीदारी दर 77.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
वर्कर पॉपुलेशन रेशियो यानी कम कर रही आबादी का अनुपात जून 2026 में 51.4 प्रतिशत रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 53.8 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 46.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। महिलाओं का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो 30.8 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का यह आँकड़ा 72.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। ये आँकडे बताते हैं कि ग्रामीण में श्रम भागीदारी और रोज़गार का स्तर शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ चुका है।
महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में स्थिति अधिक चुनौतिपूर्ण
पीएलएफएस के अनुसार, जून 2026 में देश की कुल बेरोज़गारी दर 5.5 प्रतिशत रही, जो मई 2026 के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दर 5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 6.6 प्रतिशत दर्ज की गई। महिलाओं की कुल बोरोज़गारी दर 5.9 प्रतिशत रही, इनमें ग्रामीण महिलाओं की बेरोज़गारी दर 5 प्रतिशत और शहरी महिलाओं की 8.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जो ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। वहीं पुरुषों की बेरोज़गारी दर 5.3 प्रतिशत रही, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.9 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 6 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट के आँकड़े बताते हैं कि महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ने के बावजूद रोज़गार के अवसर उसकी अनुपात में नहीं बढ़े हैं। यही वजह है कि श्रम बाजार में अधिक महिलाएँ आने के साथ उनकी बेरोज़गारी दर भी बढ़ी हुई दिखाई देती है। वहीं शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोज़गार की चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक बनी हुई है।
3.72 लाख से अधिक लोगों पर आधारित है सर्वे
पीएलएफएस का जून 2026 का मासिक बुलेटिन देशभर के 3,72,852 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है। इनमें 2,12,390 लोग ग्रामीण क्षेत्रों और 1,60,462 लोग शहरी क्षेत्रों से शामिल थे। यह सर्वेक्षण 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के रोज़गार, श्रम भागीदारी और बेरोज़गारी की स्थिति का आकलन करने के लिए किया जाता है। जून 2026 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की श्रम भागीदारी में सुधार हुआ है, लेकिन रोज़गार उपलब्ध कराने में चुनौति अभी भी बनी हुई है। विशेषकर शहरी क्षेत्र में।