खेत से विदेश तक पहुँचेगी भारतीय उपज, मिलेट्स-मसालों की बढ़ेगी पहचान; जानिए PM मोदी ने किसानों से क्या कहा
देश आज़ादी की 80वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए किसानों और खेती की बदलती तस्वीर पर भी बात की। उन्होंने खेती को सिर्फ़ उत्पादन बढ़ाने का ज़रिया नहीं, बल्कि गाँव की अर्थव्यवस्था और देश की आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव के तौर पर सामने रखा। किसानों की लागत कम करने, उनकी उपज को बेहतर बाजार दिलाने और भारतीय कृषि उत्पादों को दुनिया तक पहुँचाने पर प्रधानमंत्री ने विशेष जोर दिया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहना है। इसके लिए खेत से बाजार तक की व्यवस्था को मजबूत करना, फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना और किसानों को नई तकनीक व वैश्विक बाजारों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने खाद की कीमतों, मिलेट्स और मसालों की वैश्विक मांग, केमिकल-फ्री खेती और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
महंगी खाद के बीच किसानों को कीमतों से राहत
खेती में लागत बढ़ने का सीधा असर किसान की कमाई पर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की बढ़ी कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इसका पूरा बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुँच गई है, जबकि भारतीय किसानों को यह करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह डीएपी की वैश्विक कीमत करीब 5,000 रुपये तक पहुँचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में किसानों को यह 1,350 रुपये में उपलब्ध है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार खाद की कीमतों के बढ़े हुए बोझ को अपने स्तर पर संभाल रही है, ताकि किसानों के लिए खेती की लागत को नियंत्रित रखा जा सके।
खेत से एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुँचेगी उपज
किसान की फसल खेत में अच्छी हो, इतना ही काफी नहीं है। उसे सही बाजार और बेहतर कीमत मिले, तभी उसकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर इसी वजह से जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न Free Trade Agreements (FTA) के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों के लिए दूसरे देशों के बाजारों में संभावनाएँ बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत को खेत से लेकर एक्सपोर्ट मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करनी होगी।
इसमें फसल की गुणवत्ता, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय मानकों तक कई स्तर शामिल हैं। इससे भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों की जरूरत के मुताबिक तैयार किए जा सकेंगे और किसानों को नए बाजार मिल सकते हैं।
मिलेट्स और मसालों को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर
भारत के पारंपरिक कृषि उत्पादों की दुनिया में अलग पहचान है। प्रधानमंत्री ने मिलेट्स, मसाले, फल और फूल जैसे उत्पादों का उल्लेख करते हुए इन्हें वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनाने की जरूरत बताई। मोटे अनाज और भारतीय मसालों की मांग को बेहतर पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए बड़े बाजार तक ले जाया जा सकता है। इससे किसानों के लिए भी अपनी उपज की वैल्यू बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं। फूड प्रोसेसिंग इस पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ी है। अगर किसान की उपज सिर्फ़ कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पाद बाजार तक पहुँचाया जाए, तो खेती से जुड़ी कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।
केमिकल-फ्री खेती को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने केमिकल-फ्री खेती को भविष्य की एक बड़ी संभावना के रूप में भी सामने रखा। दुनिया के कई बाजारों में सुरक्षित और कम रसायन वाले कृषि उत्पादों की मांग बढ़ रही है। भारतीय किसानों के लिए यह एक नया बाजार तैयार कर सकता है, लेकिन इसके लिए उत्पादन के साथ गुणवत्ता और प्रमाणन पर भी ध्यान देना होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बनाने के लिए पैकेजिंग और निर्यात मानकों को पूरा करना भी जरूरी होगा। यानी केमिकल-फ्री खेती का फायदा तभी बड़े स्तर पर मिल सकता है, जब खेत में तैयार उत्पाद से लेकर उसकी बिक्री तक पूरी व्यवस्था मजबूत हो।
आत्मनिर्भर भारत में किसान अहम कड़ी
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को कृषि से जोड़ते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब केवल ज्यादा फसल पैदा करना नहीं है। कृषि क्षेत्र में बीज, खाद, तकनीक, मशीनरी, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा। किसान को खेती के लिए जरूरी संसाधन समय पर मिलें और फसल तैयार होने के बाद उसे सही बाजार उपलब्ध हो, तो कृषि की पूरी व्यवस्था ज्यादा मजबूत हो सकती है। आधुनिक तकनीक और फूड प्रोसेसिंग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आर्थिक ताकत
स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका का भी जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब इसे बढ़ाकर 6 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। गाँवों में महिला स्वयं सहायता समूह खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कारोबार से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे समूहों को बाजार और प्रशिक्षण से जोड़ने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की प्रगति का भी उल्लेख किया और बताया कि देश में उत्पादन की क्षमता बढ़ रही है। इसके जरिए उन्होंने आत्मनिर्भरता को सिर्फ़ एक क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की बात कही। कृषि के स्तर पर इसका मतलब है कि किसान को बेहतर बीज और खाद से लेकर आधुनिक मशीनरी, तकनीक, प्रोसेसिंग, भंडारण और बाजार तक मजबूत व्यवस्था मिले।