PMAY-G: गाँवों में पक्के घरों का सपना हो रहा पूरा, 3.12 करोड़ मकान तैयार; 79 लाख पर काम जारी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ने दी जानकारी
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत देश के गाँवों में ज़रूरतमंद परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का काम जारी है। सरकार के अनुसार, 3 अगस्त 2026 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 4.18 करोड़ घरों का लक्ष्य तय किया गया है। इनमें से 3.91 करोड़ घरों को मंज़ूरी मिल चुकी है, जबकि 3.12 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं। करीब 79 लाख स्वीकृत घरों का निर्माण अभी चल रहा है।
यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। आंकड़ों से पता चलता है कि योजना के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जा चुके हैं और बाकी स्वीकृत मकानों को पूरा करने पर भी काम चल रहा है।
2025-26 में लाखों घर हुए स्वीकृत
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 32.47 लाख घरों को मंज़ूरी दी गई। इसी अवधि में 26.57 लाख घरों का निर्माण पूरा किया गया। इन आंकड़ों में पहले के वर्षों में स्वीकृत किए गए घर भी शामिल हैं। सरकार का ज़ोर है कि स्वीकृत घरों का निर्माण समय पर पूरा हो, ताकि पात्र परिवारों को जल्द से जल्द अपने पक्के घर मिल सकें।
लाभार्थी की निगरानी में बनता है घर
PMAY-G की एक खास बात यह है कि घर का निर्माण लाभार्थी खुद या अपनी निगरानी में करवाता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार घरों के अलग-अलग डिज़ाइन उपलब्ध कराने होते हैं। निर्माण में स्थानीय सामग्री और क्षेत्र के अनुकूल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाता है। राज्य सरकारें लाभार्थियों को निर्माण सामग्री उचित और प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध कराने में भी मदद कर सकती हैं। ग्रामीण घरों के अलग-अलग डिज़ाइन और मॉडल की जानकारी के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘पहल’ नाम से ग्रामीण आवास टाइपोलॉजी का संकलन तैयार किया है। इसेPMAY-G गाँवों में पक्के घरों का सपना हो रहा पूरा, 3.12 करोड़ मकान तैयार, 79 लाख पर काम जारी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ने दी जानकारी की वेबसाइट और आवासऐप के ज़रिए देखा जा सकता है।
राजमिस्त्रियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
पक्के घर सिर्फ़ जल्दी बनें ही नहीं, बल्कि मज़बूत और टिकाऊ भी हों, इसके लिए सरकार राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दे रही है। ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत गाँवों में घर बनाने वाले राजमिस्त्रियों को बेहतर निर्माण तकनीक की जानकारी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित राजमिस्त्री तैयार करना है, ताकि योजना के तहत बनने वाले घरों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
निर्माण की लगातार हो रही निगरानी
PMAY-G के तहत घरों के निर्माण की प्रगति पर कई स्तरों से निगरानी की जा रही है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर लक्ष्य देने के साथ पर्याप्त राशि जारी करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा योजना की नियमित समीक्षा, डैशबोर्ड के ज़रिए प्रगति की निगरानी और राज्यों के साथ कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण को भी इसी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
पक्के घर के साथ मिलेंगी बुनियादी सुविधाएँ
PMAY-G का उद्देश्य केवल परिवारों को घर उपलब्ध कराना नहीं है। लाभार्थियों को पानी, बिजली और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। पाइप से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन और हर घर नल से जल जैसी योजनाओं का सहारा लिया जाता है। पात्र परिवारों को संबंधित योजनाओं के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना या अन्य संबंधित योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने की व्यवस्था है।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष प्रावधान
PMAY-G के तहत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था है। योजना के कुल लक्ष्य का 5 % तक हिस्सा विशेष परियोजनाओं के लिए रखा जा सकता है। इसका इस्तेमाल बाढ़, भूकंप, आग या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में पूरी तरह या बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त हुए घरों वाले परिवारों के पुनर्वास या स्थानांतरण के लिए किया जा सकता है।
SC और ST परिवारों के लिए 60 % लक्ष्य
राष्ट्रीय स्तर पर PMAY-G: गाँवों में पक्के घरों का सपना हो रहा पूरा, 3.12 करोड़ मकान तैयार; 79 लाख पर काम जारी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ने दी जानकारी के कुल लक्ष्य का कम से कम 60% हिस्सा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों के लिए निर्धारित किया गया है। हालांकि, इसका लाभ संबंधित श्रेणी के पात्र लाभार्थियों की उपलब्धता के आधार पर दिया जाता है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम-जनमन के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को भी पक्के घर और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।
विशेष परियोजनाओं और आकांक्षी जिलों पर भी खर्च
सरकार के अनुसार, पिछले 2 वित्तीय वर्षों में PMAY-G के तहत विशेष परियोजनाओं पर 528.04 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं, आकांक्षी जिलों में 17,281.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी शामिल है। पीएम-जनमन के तहत वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लाभार्थियों के लिए केंद्र की ओर से 2,465.38 करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र और राज्यों के योगदान को मिलाकर इन निधियों के मुकाबले कुल 6,329.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
राज्यों के प्रदर्शन में भी अंतर
वित्त वर्ष 2025-26 में अलग-अलग राज्यों में PMAY-G के तहत स्वीकृत और पूरे किए गए घरों की संख्या अलग रही। मध्य प्रदेश में 5,59,011 घर स्वीकृत हुए और 4,90,185 घर पूरे किए गए। महाराष्ट्र में 9,40,849 घर स्वीकृत हुए और 4,42,074 घरों का निर्माण पूरा हुआ। बिहार में 4,73,839 घर स्वीकृत किए गए और 2,63,151 घर पूरे हुए। छत्तीसगढ़ में 3,44,463 घर स्वीकृत हुए, जबकि 5,92,508 घरों का निर्माण पूरा हुआ। असम में 3,40,977 घर स्वीकृत और 1,35,426 घर पूरे हुए। राजस्थान में 2,24,458 घर स्वीकृत और 2,02,234 घर पूरे किए गए। कर्नाटक में 1,84,301 घर स्वीकृत हुए और 18,840 घर पूरे हुए। झारखंड में 1,48,640 घर स्वीकृत किए गए और 40,870 घरों का निर्माण पूरा हुआ।
केंद्र से राज्यों को राशि आवंटित की जाती है, जबकि अलग-अलग जिलों में इसका वितरण संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें करती हैं। इस तरह PMAY-G के ज़रिए ग्रामीण परिवारों को पक्के घर के साथ ज़रूरी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है।