यूपी के ग्राम प्रधानों के लिए शुरू हुई 'प्रधान ऑफ द मंथ' प्रतियोगिता, आप भी हो सकते हैं शामिल
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘प्रधान ऑफ द मंथ’ प्रतियोगिता ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को पहचान दिलाने की पहल है। इस योजना के तहत ग्राम प्रधान सोशल मीडिया पर अपनी पंचायत का काम साझा कर प्रदेश स्तर पर सम्मान और पहचान हासिल कर सकते हैं।
अगर आप उत्तर प्रदेश में किसी ग्राम पंचायत के प्रधान हैं और अपने गाँव के विकास को लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं, तो आप भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते है।
उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करने और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘प्रधान ऑफ द मंथ’ प्रतियोगिता की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य उन ग्राम प्रधानों को मंच देना है, जिन्होंने अपनी पंचायत में विकास, स्वच्छता, पारदर्शिता और नवाचार के क्षेत्र में सराहनीय काम किए हैं।
इस प्रतियोगिता के माध्यम से ग्राम प्रधान अपनी पंचायत में हुए विकास कार्यों को सोशल मीडिया के ज़रिये प्रदेश के सामने पेश कर सकते हैं और जनभागीदारी के साथ अपनी उपलब्धियों को साझा कर सकते हैं।
सोशल मीडिया के ज़रिये दिखेगा पंचायत का विकास मॉडल
‘प्रधान ऑफ द मंथ’ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ग्राम प्रधानों को अपनी पंचायत में किए गए कार्यों से जुड़े फोटो, वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करनी होगी। इसमें सड़क निर्माण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, सौर ऊर्जा परियोजनाएं, तालाब खुदाई, स्कूल और आंगनवाड़ी सुधार, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाएं जैसी पहलें शामिल हो सकती हैं।
पोस्ट करते समय पंचायती राज विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करना अनिवार्य है। इससे विभाग तक पंचायत की उपलब्धियां सीधे पहुंचेंगी और जनता भी इन कार्यों को देख सकेगी।
एंगेजमेंट बनेगा जीत का आधार
इस प्रतियोगिता में विजेता का चयन सोशल मीडिया पर मिलने वाले एंगेजमेंट के आधार पर किया जाएगा। यानी जिस प्रधान की पोस्ट पर सबसे ज्यादा लाइक, शेयर, कमेंट और व्यूज़ होंगे, वही ‘प्रधान ऑफ द मंथ’ बनने के करीब पहुंचेगा। यह तरीका पंचायत के कामों को लोगों तक पहुंचाने और जनसंवाद को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
पंचायतों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा
‘प्रधान ऑफ द मंथ’ प्रतियोगिता का एक बड़ा उद्देश्य पंचायतों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पैदा करना है। जब एक पंचायत के अच्छे काम को पहचान मिलती है, तो दूसरी पंचायतें भी बेहतर काम करने के लिए प्रेरित होती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होती है और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होता है।
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यह प्रतियोगिता ग्राम प्रधानों के लिए अपनी पहचान बनाने का बड़ा मौका है। प्रदेश स्तर पर सम्मान मिलने से न केवल प्रधान का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उनकी पंचायत भी एक मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में पहचानी जाती है। इससे भविष्य में योजनाओं और संसाधनों तक बेहतर पहुंच भी आसान हो सकती है।
सरकार की यह पहल डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की दिशा में भी एक कदम है। सोशल मीडिया के माध्यम से पंचायतों के कामों को सामने लाने से पारदर्शिता बढ़ती है और आम जनता को यह पता चलता है कि उनके गाँव में क्या विकास काम हो रहे हैं।
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