शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया ‘प्रगति’ मिशन, गाँवों में तैयार होंगे 20 हज़ार कृषि-उद्यमी, इन 8 राज्यों के किसानों को मिलेगा फायदा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य 20 हज़ार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में तैयार कर देशभर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका को मज़बूत बनाना है। सरकार का मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और गाँव समृद्ध बनेंगे। यही वजह है कि ‘प्रगति’ को समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। उन्होंने कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती अब पर्याप्त नहीं है। ऐसे में वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग, कृषि आधारित उद्यमिता, आधुनिक तकनीक, मशीनीकरण और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देकर किसानों को बाज़ार से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ‘प्रगति’ इसी सोच का विस्तार है, जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
आठ राज्यों में लागू होगी योजना, कृषि-उद्यमी बनेंगे गाँवों में बदलाव की धुरी
‘प्रगति’ पहल को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड सहित देश के प्रमुख कृषि राज्यों में लागू किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले 20 हज़ार कृषि-उद्यमी गाँव स्तर पर किसानों को तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण, कृषि मशीनों की सेवाएँ, वित्तीय संस्थानों से जोड़ने, बाज़ार उपलब्ध कराने तथा वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल खेती से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है। इसके लिए वैल्यू एडिशन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों को किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। साथ ही ड्रोन, डिजिटल सलाह, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीक को भविष्य की कृषि का आधार बताते हुए इनके अधिकाधिक उपयोग पर ज़ोर दिया।
उन्होंने महिला भागीदारी को इस अभियान की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ‘कृषि सखी’ और महिला उद्यमी इस बदलाव की धुरी बनेंगी। उनके अनुसार एक-एक कृषि-उद्यमी पूरे गाँव की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि ‘प्रगति’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में व्यापक परिवर्तन का संकल्प है, जो गाँवों को आत्मनिर्भर, रोज़गारयुक्त और सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यवार कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक आधार पर फसल योजना तैयार कर कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ, आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती पर रहेगा ज़ोर
‘प्रगति’ को भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व में सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह पहल टिकाऊ और समावेशी कृषि विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करेगी। इस कार्यक्रम में पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, Heifer International, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी, द सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन (SAFIA), एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ साझेदार बनी हैं। ये संस्थाएँ प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, बाज़ार संपर्क और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करेंगी।
यह कार्यक्रम एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन द्वारा 14 राज्यों में संचालित पूर्ववर्ती कृषि-उद्यमिता कार्यक्रमों के अनुभवों पर आधारित है। ‘प्रगति’ का लक्ष्य मौजूदा 26 हज़ार से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क के अतिरिक्त 20 हज़ार नए कृषि-उद्यमियों का राष्ट्रव्यापी तंत्र विकसित करना है। इससे 20 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों, विशेषकर महिला किसानों, को लाभ मिलने की संभावना है।
योजना के तहत कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही किसानों की आय में न्यूनतम 30 प्रतिशत वृद्धि तथा धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय साक्षरता को मज़बूत करने और किसानों की औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के माध्यम से ‘प्रगति’ उन्हें अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की ओर ले जाने का प्रयास करेगी।