घर के भीतर केसर की खेती की तैयारी! मसाला बोर्ड ने इस राज्य की सरकार के सामने रखा प्रस्ताव, जानें किसानों को कैसे हो सकता है फ़ायदा

Gaon Connection | Jul 30, 2026, 13:03 IST
स्पाइसेज़ बोर्ड ने केरल में घर के भीतर (इंडोर) केसर की खेती को उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। बोर्ड की अध्यक्ष संगीता विश्वनाथन ने कृषि मंत्री टी. सिद्दीक़ से मुलाक़ात कर टिकाऊ मसाला खेती, किसान प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन और तकनीकी सहयोग पर संयुक्त कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया। बैठक में इडुक्की के इलायची किसानों की समस्याएँ भी उठाई गईं और जलवायु परिवर्तन, सिंचाई, फसल बीमा, वर्षा जल संचयन, सोलर फ़ेंसिंग तथा इलायची पंजीकरण से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार से सहयोग माँगा गया। कृषि मंत्री ने सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया।

केरल में मसाला फसलों से किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब घर के भीतर वैज्ञानिक तरीक़े से केसर की खेती की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। स्पाइसेज़ (मसाला) बोर्ड ने इसे उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार के सामने रखा है। इसके साथ ही किसानों को तकनीकी सहायता, मूल्य संवर्धन और टिकाऊ मसाला खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्यक्रम चलाने पर भी ज़ोर दिया गया है।



स्पाइसेज़ बोर्ड की अध्यक्ष संगीता विश्वनाथन ने राज्य के कृषि मंत्री टी. सिद्दीक़ से मुलाक़ात कर इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में वैज्ञानिक खेती के तरीक़ों और तकनीकी सहयोग के ज़रिए प्रगतिशील किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार करने, मसाला फसलों की टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका मज़बूत करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।



केसर की खेती को लेकर स्पाइसेज़ बोर्ड ने क्या प्रस्ताव दिया?

संगीता विश्वनाथन ने कृषि मंत्री के साथ बैठक में केरल में घर के भीतर (इंडोर) केसर की खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती की तकनीकों और तकनीकी सहयोग के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कृषि विभाग और स्पाइसेज़ बोर्ड के बीच टिकाऊ मसाला खेती, किसान प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाज़ार आधारित पहलों पर संयुक्त कार्यक्रम चलाने के लिए निकट सहयोग का प्रस्ताव भी रखा।



इलायची किसानों की किन समस्याओं को उठाया गया?

स्पाइसेज़ बोर्ड की अध्यक्ष ने विशेष रूप से इडुक्की के इलायची किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने राज्य सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ मसाला खेती को मज़बूत करने के लिए सहयोग की माँग की। उन्होंने पात्र किसानों के लिए इलायची पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज़ और आसान बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्पाइसेज़ बोर्ड की विकास और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। समय पर पंजीकरण होने से अधिक संख्या में किसान बोर्ड के माध्यम से लागू केंद्र सरकार की विभिन्न सहायता योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।



किसानों की सहायता के लिए बोर्ड ने किन उपायों की माँग की?

संगीता विश्वनाथन ने बताया कि मसाला किसान जलवायु परिवर्तन, लंबे सूखे, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग, सिंचाई सुविधाओं की कमी और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मिस्ट सिंचाई प्रणाली, सामुदायिक सिंचाई परियोजनाओं, वर्षा जल संचयन, जैव-नियंत्रण एजेंटों को बढ़ावा देने, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज़ को मज़बूत करने, फसल बीमा योजनाओं में संशोधन, स्वचालित मौसम केंद्रों की स्थापना और जलवायु-अनुकूल खेती की पहलों को समर्थन देने का अनुरोध किया। इसके अलावा वन्यजीवों से फसल नुकसान रोकने के लिए सोलर फ़ेंसिंग और समय पर मुआवज़ा देने जैसे प्रभावी उपाय करने की भी माँग की। बैठक के दौरान कृषि मंत्री टी. सिद्दीक़ ने आश्वासन दिया कि किसानों के हित में इन सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।

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