धान की फसल पर इन 6 कीटों का सबसे ज़्यादा खतरा, जानिए कब लगता है कौन सा कीट? कृषि विभाग ने दी पूरी जानकारी
देश के कई राज्यों में खरीफ़ सीज़न की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। कहीं धान की नर्सरी तैयार की जा रही है तो कहीं रोपाई की तैयारी चल रही है। धान देश की प्रमुख खरीफ़ फसलों में से एक है और इसकी अच्छी पैदावार काफी हद तक फसल की शुरुआती देखभाल पर निर्भर करती है। बुवाई और रोपाई के बाद अलग-अलग अवस्थाओं में कई प्रकार के कीट फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि धान की फसल में किस समय कौन सा कीट हमला करता है और उसके प्रमुख लक्षण क्या हैं।
इसी को देखते हुए कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर कर धान की फसल पर हमला करने वाले प्रमुख कीटों, उनके प्रकोप के समय, पहचान और प्रभावित हिस्सों की जानकारी दी है। विभाग के अनुसार फसल की अलग-अलग अवस्थाओं में विभिन्न कीट सक्रिय होते हैं, जिनकी समय रहते पहचान कर नुकसान को कम किया जा सकता है।
15 से 30 दिन में तना छेदक का खतरा
कृषि विभाग के अनुसार धान की नर्सरी से 30 दिन तक की अवस्था में **तना छेदक (Stem Borer)** का प्रकोप देखा जा सकता है। इसका हमला आमतौर पर 15 से 30 दिन के बीच होता है। इसके प्रभाव से बीच की पत्ती सूखकर “डेड हार्ट” बन जाती है। बाद में बालियाँ सफेद होकर “व्हाइट ईयर” का रूप ले लेती हैं। यह कीट मुख्य रूप से तने (स्टेम) को प्रभावित करता है।
20 से 50 दिन के बीच पत्ती लपेटक का हमला
फसल की 20 से 50 दिन की अवस्था में **पत्ती लपेटक (Leaf Folder)** का प्रकोप हो सकता है। यह कीट पत्तियों को मोड़कर नली जैसा बना लेता है और पत्ती के हरे भाग को खुरचकर खाता है। इसका असर मुख्य रूप से पत्तियों पर दिखाई देता है।
25 से 60 दिन में राइस हिस्पा से नुकसान
कृषि विभाग के मुताबिक 25 से 60 दिन की फसल में **राइस हिस्पा (Rice Hispa)** का हमला हो सकता है। इसके प्रकोप से पत्तियों पर सफेद धारियाँ या खुरचने जैसे निशान दिखाई देते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पत्तियाँ सूख जाती हैं। यह कीट भी पत्तियों को नुकसान पहुँचाता है।
40 से 80 दिन में भूरा फुदका और सफेद पीठ वाला फुदका सक्रिय
धान की 40 से 80 दिन की अवस्था में भूरा फुदका (Brown Planthopper) और सफेद पीठ वाला फुदका (White Backed Planthopper) नुकसान पहुँचा सकते हैं। भूरा फुदका पौधे का रस चूसता है, जिससे पत्तियाँ पीली या भूरी होकर सूखने लगती हैं और खेत में “हॉपर बर्न” दिखाई देता है। इसका असर पूरे पौधे पर पड़ता है। वहीं सफेद पीठ वाला फुदका भी पौधे का रस चूसता है। इसके कारण पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है। यह कीट भी पूरे पौधे को प्रभावित करता है।
बालियाँ निकलने के समय गंधी बग का प्रकोप
कृषि विभाग ने बताया कि गंधी बग (Gundhi Bug) का हमला बालियाँ निकलने से पहले और बाद दोनों समय हो सकता है। यह कीट दानों का रस चूसता है, जिससे दाने हल्के, छोटे और खराब हो जाते हैं। इसके प्रकोप से बदबू भी आती है। इसका असर मुख्य रूप से बालियों और दानों पर पड़ता है।
दाना भरने तक तना छेदक से सावधान रहने की सलाह
विभाग के अनुसार तना छेदक (White Ear Stage) का प्रकोप बालियाँ निकलने से लेकर दाना भरने तक भी बना रह सकता है। इस अवस्था में बालियाँ सफेद रह जाती हैं और उनमें दाने नहीं बनते या खाली रह जाते हैं। इसका प्रभाव सीधे बालियों पर पड़ता है। कृषि विभाग ने किसानों को फसल की विभिन्न अवस्थाओं में नियमित निगरानी करने और कीटों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर सतर्क रहने की सलाह दी है।