पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026: फरवरी महीने में इस बार लग रहा है मेला, जानिए क्या रहेगा ख़ास
जो किसान, युवा उद्यमी, शोधकर्ता या कृषि से जुड़े लोग भविष्य की खेती को समझना और अपनाना चाहते हैं, उनके लिए यह मेला एक बढ़िया अवसर है। यहाँसे मिलने वाली जानकारी न केवल खेतों को उपजाऊ बनाएगी, बल्कि किसानों की आय और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा देगी।
अगर आप भी डिजिटल खेती, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में खेती, एफपीओ और कृषि स्टार्टअप्स जैसी जानकारियाँ चाहते हैं तो आपके लिए बढ़िया मौका है, क्योंकि पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में सारी जानकारियां आपको एक ही जगह पर एक साथ मिल जाएंगी।
खेती में अब पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और नवाचार तेजी से जुड़ रहे हैं। इसी बदलाव की झलक दिखाने और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए पूसा कृषि विज्ञान मेला, 25 से 27 फरवरी 2026 तक आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), पूसा, नई दिल्ली के मेला ग्राउंड में आयोजित होगा। इस साल मेले की थीम है, “विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत”, और इसे महिला किसान के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के संदर्भ में विशेष रूप से समर्पित किया गया है।
यह मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और कृषि उद्यमियों के बीच संवाद और सीखने का एक बड़ा मंच भी है। यहां किसान सीधे वैज्ञानिकों से मिलकर नई किस्मों, उन्नत बीजों, आधुनिक खेती तकनीकों और जलवायु-स्मार्ट कृषि समाधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पूसा कृषि विज्ञान मेला में किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, के साथ ही राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर के संस्थानों सहित 300 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे।
पूसा कृषि मेले की शुरूआत 1972 में हुई थी, मेले के माध्यम से किसानों को न केवल कृषि की नई तकनीक की जानकारी होती है, साथ ही तीन दिवसीय कृषि मेले में आयोतिक कृषि गोष्ठियों में किसान वैज्ञानिकों से सीधे संवाद भी कर सकते हैं।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण लाइव फसल प्रदर्शन (Live Crop Demonstration) होगा, जिसमें किसान वास्तविक खेत परिस्थितियों में उन्नत फसल प्रबंधन, नई किस्मों और स्मार्ट कृषि तकनीकों को देख सकेंगे। इसके साथ ही पूसा बीज बिक्री केंद्र पर किसानों को प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे आने वाले मौसम की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।
आज के दौर में डिजिटल तकनीक खेती की तस्वीर बदल रही है। इस मेले में डिजिटल एग्रीकल्चर से जुड़े समाधान, जैसे ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई, मोबाइल ऐप आधारित कृषि सलाह और डेटा-आधारित खेती मॉडल, किसानों के सामने पेश किए जाएंगे। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे तकनीक खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकती है।
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मेले का एक और महत्वपूर्ण पहलू है महिला और युवा उद्यमिता को बढ़ावा। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें तकनीकी जानकारी और बाजार तक सीधी पहुंच की ज़रूरत होती है। इस मेले में महिला किसानों और युवाओं के लिए विशेष सत्र, प्रशिक्षण और स्टार्टअप से जुड़े अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे खेती को सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय के रूप में देख सकें।
फसल विविधीकरण और जलवायु सहिष्णु खेती (Climate Resilient Agriculture) भी इस मेले का एक बड़ा फोकस है। बदलते मौसम, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच किसानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे जोखिम कम करने वाली खेती अपनाएं। मेले में ऐसी तकनीकों और फसलों को प्रदर्शित किया जाएगा, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकें और मौसम की मार को झेल सकें।
इसके अलावा, कृषि विपणन, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और स्टार्टअप मॉडल से जुड़े सत्र किसानों को यह समझने में मदद करेंगे कि कैसे वे अपनी उपज को बेहतर कीमत पर बेच सकते हैं, सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के जरिए आमदनी बढ़ा सकते हैं।