मिट्टी के बिना खेती सीखने का मौका, यहाँ ट्रेनिंग लेकर आप भी शुरू कर सकते हैं हाइड्रोपोनिक्स से खेती
Gaon Connection | Jan 21, 2026, 10:23 IST
आपने भी बिना मिट्टी की खेती की तकनीक हाइड्रोपोनिक के बारे सुना होगा, अगर आप भी खेती ये नई तकनीक से कमाई करना चाहते हैं तो आपके लिए बढ़िया मौका है; यहाँ पर मिलेगी आपको ट्रेनिंग की पूरी जानकारी।
अगर आप भी खेती में कुछ नया करना चाहते हैं, कम जगह में ज़्यादा उत्पादन चाहते हैं और आधुनिक तकनीक से कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो हाइड्रोपोनिक्स ट्रेनिंग प्रोग्राम आपके लिए एक बेहतरीन मौका है।
आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), पूसा, नई दिल्ली में “Start-Up Hydroponics: A Beginner’s Guide for Agripreneurs” नाम से 5 दिन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण उन युवाओं, किसानों और एग्रीप्रेन्योर के लिए तैयार किया गया है जो मिट्टी रहित खेती (Soilless Farming) में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। प्रशिक्षण 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। कुल पाँच दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस कोर्स में प्रतिभागियों को हाइड्रोपोनिक्स की बुनियादी समझ से लेकर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग तक पूरी जानकारी दी जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि बिना मिट्टी के पौधों को कैसे उगाया जाता है, कौन-कौन सी हाइड्रोपोनिक प्रणालियां होती हैं और किस फसल के लिए कौन सा सिस्टम बेहतर रहता है।
प्रतिभागियों को खुद से हाइड्रोपोनिक यूनिट लगाने और उसे चलाने का व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा। लाइव डेमो, प्रैक्टिकल सेशन और इंटरैक्टिव ट्रेनिंग के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में केवल थ्योरी नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके सीखने पर ज़ोर दिया जाएगा। प्रतिभागियों को जरूरी पोषक तत्वों (मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) के स्टॉक सॉल्यूशन तैयार करना सिखाया जाएगा।
इसके साथ ही पानी के pH लेवल को कैसे सही रखा जाए, इसका लाइव डेमो भी कराया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा जाएगा और उन्हें माइक्रोग्रीन्स उगाने, हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन और सजावटी पौधों की खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी।
उन्हें ऐसे काम दिए जाएँगे कि जिससे उन्हें रियल फील्ड एक्सपीरियंस मिल सके। इसके अलावा एक कमर्शियल हाइड्रोपोनिक यूनिट का विजिट भी कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागी छोटे स्तर पर बिजनेस सेटअप, लेआउट और संचालन को समझ सकें।
यह कोर्स खासतौर पर नए एग्रीप्रेन्योर, कृषि से जुड़े स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा, कृषि स्नातक छात्र और आधुनिक खेती में रुचि रखने वाले किसान के लिए बनाया गया है।
19 जनवरी 2026 से रजिस्ट्रेशन शुरू है, जिसकी आखिरी तारीख 13 फरवरी 2026 है। प्रशिक्षण ICAR-IARI, पूसा कैंपस, नई दिल्ली ZTM & BPD यूनिट और प्लांट फिजियोलॉजी डिवीजन में आयोजित किया जाएगा। प्रति प्रतिभागी शुल्क 4000 रुपए है इसमें रहने और खाने की व्यवस्था शामिल नहीं है।
आज खेती में पानी की कमी, जमीन की लागत और बढ़ते खर्च किसानों की बड़ी समस्या बन चुके हैं। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कम पानी में, कम जगह पर और ज्यादा उत्पादन का मौका देती है। यह ट्रेनिंग युवाओं को खेती से जोड़कर उन्हें एग्री-बिजनेस की ओर ले जाने में मदद कर सकती है। अगर आप आधुनिक खेती में कदम रखना चाहते हैं, तो यह ट्रेनिंग आपके लिए एक मजबूत शुरुआत बन सकती है।
"हाइड्रोपोनिक” एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है हाइड्रो “पानी” है, और पोनिक “काम” है। खनिज उर्वरकों के घोल का उपयोग करके मिट्टी के बिना पानी में पौधों को उगाने की एक तकनीक को हाइड्रोपोनिक्स के रूप में जाना जाता है। यह हाइड्रोकल्चर का एक सबसेट है। सार्वजनिक रूप से 1937 में अमेरिका में इस विधि द्वारा उगाए गए टमाटर के पौधों को प्रदर्शित किया गया था। यह तकनीक तब खूब पसंद की गई और कई देशों तक फ़ैल गई।
हाइड्रोपोनिक खेती अब मनचाही फसल पैदा करने के लिए बेहद उपयोगी तकनीक है। खेती के इस सिस्टम के कई प्रकार हैं। इनमें विक हाइड्रोपोनिक सिस्टम, डीप वाटर हाइड्रोपोनिक सिस्टम, फ्लड और ड्रेन प्रणाली,न्यूट्रियंट फिल्म टेक्निक और ड्रिप सिस्टम मुख्य हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी को छोड़कर, पौधे की जड़ों को सहारा देने के लिए एक अलग सामग्री में डालने और पोषक तत्वों से भरपूर पानी में सीधे फसल उगाने का एक तरीका है।
ताज़ा पानी इसके लिए सबसे ज़रूरी है। ये ध्यान रखना होगा कि संतुलित पीएच के साथ फ़िल्टर हो। ज़्यादातर पौधे 6-6.5 के आसपास पीएच स्तर वाला पानी पसंद करते हैं । आप अपने स्थानीय हार्डवेयर, उद्यान, या हाइड्रोपोनिक स्टोर पर मिलने वाले जाँच यंत्र से अपने पानी की अम्लता की जाँच कर सकते हैं।
इसके साथ ही पौधे को भरपूर ऑक्सीजन की ज़रूरत होगी। पारंपरिक खेती से कुछ अलग इसमें में जड़ें मिट्टी से नहीं बल्कि हवा से ज़रूरी ऑक्सीजन लेते हैं। आपके हाइड्रोपोनिक सेटअप के आधार पर या अपने संयंत्र के आधार पर जल भंडार के बीच जगह छोड़ने की ज़रूरत होगी।
पौधे को स्वस्थ और उत्पादक बने रहने के लिए भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होगी। ठीक उसी तरह जैसे ज़मीन में उगने वाले पौधों को स्वस्थ मिट्टी और उर्वरक की ज़रूरत होती है। जब आप मिट्टी के बिना पौधे उगा रहे हैं, तो यह "पौधे का भोजन" उस पानी में शामिल होना चाहिए जो आपके पौधों को पोषण दे रहा है। अगर आप अपने पौधे घर के अंदर उगा रहे हैं, तो आपको कुछ विशेष प्रकाश व्यवस्था करनी होगी। सभी पौधे को रोशनी की अलग-अलग ज़रूरत होगी।
अपने देश में हाइड्रोपोनिक खेती करने की लागत कई चीजों पर निर्भर करती है, जिसमें आकार और पैमाना, उपयोग किए जाने वाले हाइड्रोपोनिक सिस्टम का प्रकार और खेत का स्थान शामिल है। एक सामान्य दिशा निर्देश के रूप में एक छोटे पैमाने पर हाइड्रोपोनिक का सेटअप करने में लगभग 2 से 3 लाख रुपये के बीच खर्चा आ सकता है। इसमें उपकरण जैसे ग्रो लाइट्स, पोषक तत्व समाधान और पानी पंप की लागत, साथ ही बुनियादी ढांचा बनाने की लागत, जैसे ग्रीन हाउस या इनडोर बढ़ते क्षेत्र शामिल हैं।
ये भी पढ़ें: जगह नहीं जुगाड़ से भी कर सकते हैं बिना मिट्टी की ये हाइड्रोपोनिक खेती
आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), पूसा, नई दिल्ली में “Start-Up Hydroponics: A Beginner’s Guide for Agripreneurs” नाम से 5 दिन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण उन युवाओं, किसानों और एग्रीप्रेन्योर के लिए तैयार किया गया है जो मिट्टी रहित खेती (Soilless Farming) में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। प्रशिक्षण 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। कुल पाँच दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस कोर्स में प्रतिभागियों को हाइड्रोपोनिक्स की बुनियादी समझ से लेकर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग तक पूरी जानकारी दी जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि बिना मिट्टी के पौधों को कैसे उगाया जाता है, कौन-कौन सी हाइड्रोपोनिक प्रणालियां होती हैं और किस फसल के लिए कौन सा सिस्टम बेहतर रहता है।
प्रतिभागियों को खुद से हाइड्रोपोनिक यूनिट लगाने और उसे चलाने का व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा। लाइव डेमो, प्रैक्टिकल सेशन और इंटरैक्टिव ट्रेनिंग के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में केवल थ्योरी नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके सीखने पर ज़ोर दिया जाएगा। प्रतिभागियों को जरूरी पोषक तत्वों (मैक्रो और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) के स्टॉक सॉल्यूशन तैयार करना सिखाया जाएगा।
इसके साथ ही पानी के pH लेवल को कैसे सही रखा जाए, इसका लाइव डेमो भी कराया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा जाएगा और उन्हें माइक्रोग्रीन्स उगाने, हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन और सजावटी पौधों की खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी।
उन्हें ऐसे काम दिए जाएँगे कि जिससे उन्हें रियल फील्ड एक्सपीरियंस मिल सके। इसके अलावा एक कमर्शियल हाइड्रोपोनिक यूनिट का विजिट भी कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागी छोटे स्तर पर बिजनेस सेटअप, लेआउट और संचालन को समझ सकें।
यह कोर्स खासतौर पर नए एग्रीप्रेन्योर, कृषि से जुड़े स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा, कृषि स्नातक छात्र और आधुनिक खेती में रुचि रखने वाले किसान के लिए बनाया गया है।
हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी को छोड़कर, पौधे की जड़ों को सहारा देने के लिए एक अलग सामग्री में डालने और पोषक तत्वों से भरपूर पानी में सीधे फसल उगाने का एक तरीका है।<br>
19 जनवरी 2026 से रजिस्ट्रेशन शुरू है, जिसकी आखिरी तारीख 13 फरवरी 2026 है। प्रशिक्षण ICAR-IARI, पूसा कैंपस, नई दिल्ली ZTM & BPD यूनिट और प्लांट फिजियोलॉजी डिवीजन में आयोजित किया जाएगा। प्रति प्रतिभागी शुल्क 4000 रुपए है इसमें रहने और खाने की व्यवस्था शामिल नहीं है।
क्यों जरूरी है यह ट्रेनिंग?
हाइड्रोपोनिक्स क्या है?
हाइड्रोपोनिक खेती अब मनचाही फसल पैदा करने के लिए बेहद उपयोगी तकनीक है। खेती के इस सिस्टम के कई प्रकार हैं। इनमें विक हाइड्रोपोनिक सिस्टम, डीप वाटर हाइड्रोपोनिक सिस्टम, फ्लड और ड्रेन प्रणाली,न्यूट्रियंट फिल्म टेक्निक और ड्रिप सिस्टम मुख्य हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी को छोड़कर, पौधे की जड़ों को सहारा देने के लिए एक अलग सामग्री में डालने और पोषक तत्वों से भरपूर पानी में सीधे फसल उगाने का एक तरीका है।
क्या-क्या ज़रूरी है इसकी खेती में
इसके साथ ही पौधे को भरपूर ऑक्सीजन की ज़रूरत होगी। पारंपरिक खेती से कुछ अलग इसमें में जड़ें मिट्टी से नहीं बल्कि हवा से ज़रूरी ऑक्सीजन लेते हैं। आपके हाइड्रोपोनिक सेटअप के आधार पर या अपने संयंत्र के आधार पर जल भंडार के बीच जगह छोड़ने की ज़रूरत होगी।
पौधे को स्वस्थ और उत्पादक बने रहने के लिए भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होगी। ठीक उसी तरह जैसे ज़मीन में उगने वाले पौधों को स्वस्थ मिट्टी और उर्वरक की ज़रूरत होती है। जब आप मिट्टी के बिना पौधे उगा रहे हैं, तो यह "पौधे का भोजन" उस पानी में शामिल होना चाहिए जो आपके पौधों को पोषण दे रहा है। अगर आप अपने पौधे घर के अंदर उगा रहे हैं, तो आपको कुछ विशेष प्रकाश व्यवस्था करनी होगी। सभी पौधे को रोशनी की अलग-अलग ज़रूरत होगी।
कितना ख़र्च आता है इसकी खेती में
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