MSP से नीचे बिकीं रबी की ज़्यादातर फसलें, सिर्फ़ सरसों ने कराया मुनाफ़ा, जानिए किन फसलों ने सबसे ज़्यादा रुलाया

Gaon Connection | Jul 11, 2026, 17:18 IST
रबी सीज़न में किसानों को गेहूँ, चना, जौ और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के लिए एमएसपी से कम दाम मिले। बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के आँकड़ों के हवाले से बताया गया है कि अप्रैल-जून के दौरान मक्का की औसत मंडी क़ीमत एमएसपी से 24 प्रतिशत नीचे रही, जबकि गेहूँ, चना और जौ भी 3 से 8 प्रतिशत कम दाम पर बिके। वहीं, सरसों किसानों के लिए राहत रही और इसकी क़ीमत एमएसपी से 17 प्रतिशत तक ऊपर पहुँच गई।

रबी फसलों की कटाई के बाद किसानों को इस बार अपनी उपज के बेहतर दाम नहीं मिल सके। गेहूँ, चना और जौ जैसी प्रमुख फसलें अप्रैल से जून के बीच मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिकीं। सबसे ज़्यादा नुकसान मक्का उगाने वाले किसानों को हुआ, जिसकी औसत मंडी क़ीमत एमएसपी से 24 प्रतिशत तक कम रही। हालांकि, इस बीच सरसों किसानों के लिए राहत लेकर आई और यह एकमात्र प्रमुख फसल रही, जिसने एमएसपी से ऊपर बेहतर दाम दिलाए।



कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित एगमार्कनेट पोर्टल के मंडी आँकड़े बताते हैं कि 8 जुलाई तक गेहूँ को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख रबी फसलों के दाम पिछले तीन महीनों के औसत से ऊपर पहुँच चुके हैं। हालांकि, कटाई के मुख्य सीज़न के दौरान अधिकांश किसानों को एमएसपी से कम दाम पर ही उपज बेचनी पड़ी। कृषि बाज़ारों में बेहतर दाम किसानों के लिए राहत माने जाते हैं, लेकिन इनका अधिक बढ़ना खाद्य महँगाई पर भी असर डाल सकता है।



गेहूँ, चना और जौ एमएसपी से नीचे बिके, मक्का में सबसे ज़्यादा गिरावट

  • बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच गेहूँ की औसत मंडी क़ीमत 2,506 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो इसके 2,585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी से 3 प्रतिशत कम थी। 8 जुलाई तक इसका औसत दाम और घटकर 2,485 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन ने कहा, "आमतौर पर खरीद और आवक के चरम समय में दाम कम रहते हैं और बाद में फसल की आवक घटने पर कीमतें बढ़ती हैं। जुलाई में गेहूँ का दाम अप्रैल-जून के औसत से भी नीचे होना मुझे हैरान करता है।"
  • जौ की औसत मंडी क़ीमत कटाई के दौरान 2,072 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो इसके 2,150 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी से 4 प्रतिशत कम थी। हालांकि, 8 जुलाई तक इसका दाम बढ़कर 2,234 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
  • मक्का की स्थिति सबसे कमज़ोर रही। अप्रैल-जून के दौरान इसकी औसत मंडी क़ीमत 1,830 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी किसानों को एमएसपी से 24 प्रतिशत कम दाम मिले। 8 जुलाई तक मक्का का औसत दाम कुछ सुधरकर 1,959 रुपये प्रति क्विंटल पहुँचा।
  • चना भी एमएसपी से नीचे बिका। कटाई के दौरान इसकी औसत मंडी क़ीमत 5,406 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो 5,875 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी से 8 प्रतिशत कम थी। 8 जुलाई तक इसका दाम बढ़कर 5,649 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। वहीं, मसूर की औसत मंडी क़ीमत लगभग एमएसपी के बराबर रही।

सरसों ने दिलाई राहत, एमएसपी से 17 प्रतिशत ऊपर पहुँची क़ीमत

रबी सीज़न की प्रमुख तिलहन फसल सरसों किसानों के लिए सबसे लाभकारी साबित हुई। अप्रैल से जून के बीच इसकी औसत मंडी क़ीमत 6,674 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो 6,200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी से 8 प्रतिशत अधिक थी। इसके बाद भी सरसों के दाम में तेज़ी बनी रही। 8 जुलाई तक इसकी औसत मंडी क़ीमत बढ़कर 7,227 रुपये प्रति क्विंटल पहुँच गई, जो एमएसपी से 17 प्रतिशत अधिक है।



बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट में एगमार्कनेट के मंडी आँकड़ों के हवाले से कहा गया है कि 8 जुलाई तक गेहूँ को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख रबी फसलों की औसत मंडी क़ीमतें अप्रैल-जून की तुलना में बेहतर हो चुकी हैं। इससे संकेत मिलता है कि कटाई के बाद बाज़ार में आवक कम होने के साथ कई फसलों के दाम में सुधार आया है, जबकि गेहूँ की क़ीमत अब भी दबाव में बनी हुई है।

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