इस राज्य में जहरीली खेती का ख़तरा: 2 साल में 535 किसानों की मौत, महंगे कीटनाशकों के बीच बढ़ी चिंता

Preeti Nahar | Jun 07, 2026, 14:18 IST
Image credit : Gaon Connection Network
राजस्थान से सामने आए आंकड़े खेती-किसानी से जुड़े एक बड़े खतरे की ओर इशारा करते हैं। विधानसभा में पेश जानकारी के मुताबिक पिछले दो सालों में कीटनाशकों के संपर्क में आने से 535 किसानों की मौत हो गई। यानी जिन दवाओं का इस्तेमाल किसान अपनी फसल बचाने के लिए करते हैं, वही कई बार उनकी जान के लिए भी खतरा बन रही हैं।
पेस्टिसाइड के ओवरयूज या एक्सपोजर से किसानों की मौत

देश में पहले ही महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों के बढ़ते दामों के बीच खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राजस्थान से सामने आए एक चौंकाने वाले आंकड़े ने खेती-किसानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



राजस्थान विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच खेतों में कीटनाशकों के संपर्क (पेस्टिसाइड एक्सपोजर) से 535 किसानों की मौत हो गई। यह सिर्फ एक राज्य का आंकड़ा है, जो बताता है कि फसल बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन किसानों की जान पर भी भारी पड़ रहे हैं।



  1. राजस्थान में 2 साल में 535 किसानों की कीटनाशक संपर्क से मौत दर्ज हुई।
  2. प्रभावित परिवारों को कुल 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।
  3. जांच में 189 कीटनाशक नमूने घटिया या मानकों पर खरे नहीं पाए गए।
  4. 282 नोटिस जारी किए गए, 14 मामले अदालत में पहुंचे, 14 लाइसेंस निलंबित और 22 लाइसेंस रद्द किए गए।
  5. बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़ और झालावाड़ सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल रहे।

विधानसभा में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

राजस्थान विधानसभा में कृषि विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच 535 किसानों की मौत खेती के दौरान कीटनाशकों के संपर्क में आने से हुई। इन मौतों ने रासायनिक खेती के खतरों को फिर से चर्चा में ला दिया है।



सबसे ज्यादा मौतें बीकानेर जिले में दर्ज की गईं, जहां 57 किसानों की जान गई। इसके बाद चूरू में 56, हनुमानगढ़ में 42 और झालावाड़ में 42 किसानों की मौत दर्ज हुई। जोधपुर में 38 जबकि श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें दर्ज की गईं।



महंगे कीटनाशक, लेकिन सुरक्षा अब भी अधूरी

खेती में कीटों और बीमारियों से फसल बचाने के लिए किसान हर साल हजारों रुपये के कीटनाशक खरीदते हैं। कई आधुनिक दवाओं की कीमत प्रति लीटर या प्रति किलोग्राम हजारों रुपये तक पहुंच जाती है। लेकिन महंगे रसायनों के बावजूद खेतों में सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अभी भी बहुत कम है।



सबसे गंभीर परेशानी ये है कि बिना मास्क, दस्ताने और सुरक्षा किट के लगातार छिड़काव करने से शरीर में जहरीले रसायन प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सांस, त्वचा और तंत्रिका तंत्र/Nervous System से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।



189 नमूने फेल, कार्रवाई भी हुई

विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में दो वर्षों के दौरान 5,570 कीटनाशक नमूने इकट्ठे किए गए, जिनमें से 5,521 की जांच पूरी हुई। इनमें 189 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 अदालत मामलों की शुरुआत की, 14 लाइसेंस निलंबित किए और 22 लाइसेंस रद्द कर दिए।



यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार में घटिया या संदिग्ध गुणवत्ता वाले कीटनाशक भी किसानों तक पहुंच रहे हैं, जिससे फसल और किसान दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।



क्या है समाधान?

किसानों को सुरक्षित छिड़काव तकनीक, सुरक्षा किट और जैविक या कम विषैले विकल्पों के बारे में अधिक जागरूक करने की जरूरत है। साथ ही नकली और घटिया कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई तथा नियमित निगरानी भी जरूरी है। राज्य सरकार ने भी सुरक्षित कीटनाशक उपयोग और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही है।



“अगर सैकड़ों किसान रोज़मर्रा के कृषि कार्य करते समय अपनी जान गंवा रहे हैं, तो केवल मुआवजा देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। किसानों की मौतों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही कीटनाशकों के उपयोग पर सख्त निगरानी और किसानों के लिए व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम लागू करना समय की जरूरत है,” किशनपोल विधायक, जयपुर, अमीन कागज़ी ने कहा।


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