मक्का और मूंग की MSP में ₹10-₹12 की बढ़ोतरी पर भड़के राकेश टिकैत, कहा- देश के किसानों के साथ हुआ धोखा
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 फसलों की MSP बढ़ाने का ऐलान किया है। सरकार इसे किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन मक्का और मूंग किसानों में इस फैसले को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। वजह यह है कि जहां कई फसलों की MSP में सैकड़ों रुपये की बढ़ोतरी हुई, वहीं मक्का और मूंग की MSP में बेहद मामूली बढ़ोतरी की गई है।
मक्का में मात्र 10 रुपए बढ़ी MSP
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मक्का की MSP सिर्फ ₹10 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹2400 से ₹2410 प्रति क्विंटल की गई है। यानी किसानों को सिर्फ 10 पैसे प्रति किलो का फायदा मिलेगा।
मूंग में बढ़े मात्र 12 रूपए बढ़ी MSP
वहीं मूंग की MSP सिर्फ ₹12 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹8768 से ₹8780 प्रति क्विंटल की गई है। यानी मूंग किसानों को भी बेहद सीमित राहत मिली है। दूसरी तरफ सूरजमुखी बीज की MSP में ₹622, कपास में ₹557, नाइजरसीड में ₹515 और तिल में ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में मक्का और मूंग किसान खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं।
मक्का को बढ़ावा देने की बात, लेकिन MSP में मामूली इजाफा
सरकार लगातार मक्का उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है। हाल के वर्षों में केंद्र ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत मक्का को एक बड़े विकल्प के रूप में पेश किया है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए मक्का की मांग बढ़ने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पोल्ट्री फीड और स्टार्च इंडस्ट्री में भी मक्का की मांग बढ़ रही है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि जब सरकार खुद मक्का उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है, तो MSP में सिर्फ ₹10 की बढ़ोतरी क्यों की गई?
सरकार क्यों कर रही है मक्का प्रमोट?
सरकार लगातार Ethanol Blending Programme (EBP) के तहत मक्का को बढ़ावा दे रही है। Grain Ethanol Manufacturers Association की रिपोर्ट में बताया गया है कि मक्का अब एथेनॉल उत्पादन का बड़ा स्रोत बन रहा है और इसकी मांग बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में grain-based ethanol सेक्टर में मक्का की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने कल 2025-26 विपणन सीजन के लिए मक्का समेत कई खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। इसके तहत मक्का की MSP को ₹2,225 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹2,400 प्रति क्विंटल किया गया था। मक्का भारत के ग्रेन बेस्ड एथेनॉल सेक्टर के लिए एक अहम कच्चा माल है।
राकेश टिकैत ने पहले भी उठाए MSP पर सवाल
किसान नेता Rakesh Tikait पहले भी MSP नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि किसानों की मांग स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के मुताबिक MSP तय करने की है, लेकिन सरकार उस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने बढ़ती लागत, कर्ज और घटती आमदनी को किसानों की बड़ी समस्या बताया था।
Rakesh Tikait ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा- केंद्र सरकार के द्वारा आज खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया यह देश के किसानों के साथ में धोखा है मक्का का मूल्य मात्र दस रूपये प्रति क्विंटल और मूंग का बारह रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है सरकार किसान मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
किसानों का कहना है कि सिर्फ MSP घोषित करना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार MSP पर खरीद की गारंटी दे पाएगी? अगर खरीद मजबूत नहीं हुई और MSP बढ़ोतरी भी मामूली रही, तो मक्का और मूंग उगाने वाले किसानों के लिए खेती लाभकारी बनाना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि MSP बढ़ोतरी के ऐलान के बाद जहां कुछ किसान खुश हैं, वहीं मक्का और मूंग किसान इस फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे।