15 वर्षों में अधिक मज़बूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती हुई ज़्यादा सुरक्षित; आरबीआई ने गिनाए खेती में आए बड़े बदलाव
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की उप-गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा है कि पिछले 15 वर्षों में भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक मज़बूत और लचीले बने हैं। उन्होंने कहा कि सिंचाई के दायरे में लगातार बढ़ोतरी, कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्रों का विस्तार, खेतों में बढ़ते मशीनीकरण और बेहतर बीज एवं फसल किस्मों ने खेती को मौसम की अनिश्चितताओं का सामना करने में अधिक सक्षम बनाया है। उनका कहना है कि अब वर्षा की कमी या मौसम में उतार-चढ़ाव का कृषि उत्पादन पर पहले जैसा व्यापक असर नहीं पड़ता।
मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में पूनम गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूती समय के साथ लगातार बढ़ी है। कृषि और उससे जुड़े सहायक क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल विकसित हुआ है, जिससे यदि किसी वर्ष कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, तो डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियाँ ग्रामीण परिवारों की आय को सहारा देती हैं। इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय में स्थिरता बनी रहती है।
सिंचाई, कृषि ऋण और आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई खेती की क्षमता
पूनम गुप्ता ने कहा कि सरकार की विभिन्न पहलों के कारण सिंचित क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि वर्षा में कमी या मानसून की अनिश्चितता का प्रभाव अब पहले की तुलना में कम महसूस होता है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार एक दीर्घकालिक बदलाव है, जिसने कृषि क्षेत्र की मज़बूती बढ़ाई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को कृषि ऋण की बेहतर उपलब्धता, खेतों में मशीनीकरण और उन्नत बीज एवं फसल किस्मों के उपयोग ने भी कृषि क्षेत्र को अधिक सक्षम बनाया है। इन सभी प्रयासों ने मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है।
कृषि और सहायक गतिविधियाँ बन रहीं आय का सहारा
आरबीआई की उप-गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि और उससे जुड़े सहायक क्षेत्रों ने एक-दूसरे की पूरक भूमिका निभाई है। जिन वर्षों में कृषि उत्पादन अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा, उन वर्षों में सहायक गतिविधियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों को आय का वैकल्पिक स्रोत मिला और कृषि में होने वाले नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि इन सभी संकेतों से स्पष्ट है कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है और कृषि क्षेत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक लचीला एवं मज़बूत बन चुका है।
अल नीनो पर अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी
अल नीनो के प्रभाव और ग्रामीण माँग पर उसके संभावित असर से जुड़े सवाल पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मानसून की स्थिति अभी विकसित हो रही है, इसलिए इस समय कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि एल नीनो की स्थिति ज़रूर बनी है, लेकिन इसके साथ अन्य मौसमी कारक भी सक्रिय हैं, जो इसके प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र ने अपनी लचीलापन साबित किया है। यदि कृषि उत्पादन किसी कारण से प्रभावित भी होता है, तो ग्रामीण परिवार अपनी आय बढ़ाने के लिए सहायक गतिविधियों की ओर रुख़ करते हैं, जिससे आय में होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाती है।