सीज़फायर से RBI को राहत, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; EMI नहीं बढ़ेगी, FY27 में ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान
RBI MPC Meeting 2026: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है। इससे आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की मासिक किस्त (ईएमआई) फिलहाल नहीं बढ़ेगी। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) के ऐलान ने भी वैश्विक बाजार को कुछ राहत दी है।
जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.9 प्रतिशत
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 7.6 प्रतिशत से कम है।
महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना
युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति सुधरने की उम्मीद भी बढ़ी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इसके अलावा होर्मुज फिर से खुलने के ऐलान से LPG की सप्लाई भी सुधरेगी।
महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान
हालांकि, आरबीआई ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा व उर्वरक की ऊंची कीमतें आने वाले समय में महंगाई को बढ़ा सकती हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान इस प्रकार है:
| तिमाही | महंगाई दर (प्रतिशत) |
|---|---|
| पहली तिमाही (Q1) | 4.0% |
| दूसरी तिमाही (Q2) | 4.4% |
| तीसरी तिमाही (Q3) | 5.2% |
| चौथी तिमाही (Q4) | 4.7% |
आरबीआई के सामने क्या चुनौती
गवर्नर ने यह भी कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें भारत की आर्थिक वृद्धि पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे में आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित करते हुए विकास दर को संतुलित बनाए रखना है।
फिलहाल, सेवा क्षेत्र में मजबूती, विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती क्षमता उपयोग और कंपनियों की मजबूत वित्तीय स्थिति घरेलू मांग को सहारा दे रही है। कुल मिलाकर, आरबीआई ने संकेत दिया है कि आगे की मौद्रिक नीति पूरी तरह महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के रुख पर निर्भर करेगी।