Stubble Burning: एक दिन में पराली जलाने के 3,463 मामले दर्ज, सबसे अधिक मामले मध्य-प्रदेश में, अप्रैल में दर्ज हुईं 32,630 घटनाएं

Gaon Connection | Apr 24, 2026, 17:51 IST
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देश में गेहूं कटाई के साथ फसल अवशेष जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 23 अप्रैल तक पाँच प्रमुख राज्यों में 32,630 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में अधिक बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खेत जल्दी खाली करने, अगली फसल की तैयारी और मशीनों से कटाई के बाद बचे अवशेषों के कारण यह समस्या बढ़ रही है।

Record Stubble Burning Cases: देशभर में गेहूं कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में इस वर्ष तेज बढ़ोतरी देखी गई है। सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग निगरानी के अनुसार 22 अप्रैल तक 32,630 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 26,574 मामलों की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक हैं। ये आंकड़े भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के अंतर्गत CREAMS द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन में सामने आए हैं।



मध्य प्रदेश सबसे आगे, यूपी दूसरे स्थान पर

इस सीजन में सबसे ज्यादा घटनाएं मध्य प्रदेश में दर्ज हुई हैं। कुल मामलों में लगभग 69 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की रही। वहीं उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पंजाब और हरियाणा में मामले अपेक्षाकृत कम रहे।



राज्यवार आंकड़े (1 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक)

राज्यकुल मामले
मध्य प्रदेश22,475
उत्तर प्रदेश10,004+
पंजाब73+
हरियाणा73+
दिल्ली5+
कुल32,630

सिर्फ 24 घंटे में हजारों नए मामले

22 अप्रैल को केवल 24 घंटे के भीतर 3,463 नई घटनाएं सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा 2,311 मामले मध्य प्रदेश से आए, जबकि उत्तर प्रदेश में 1,063 घटनाएं दर्ज हुईं। इससे साफ है कि कटाई के पीक सीजन में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं।



एक दिन में दर्ज मामले (22 अप्रैल)



राज्यनए मामले
मध्य प्रदेश2,311
उत्तर प्रदेश1,063
पंजाब44
हरियाणा43
दिल्ली2
कुल3,463

क्यों बढ़ रही है समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार किसान गेहूं की कटाई के बाद खेत जल्दी साफ कर अगली फसल की तैयारी करना चाहते हैं। मजदूरी महंगी होने, मशीनों की सीमित उपलब्धता और वैकल्पिक प्रबंधन की कमी के कारण कई किसान अवशेष जलाने का रास्ता चुन लेते हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता घटती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है।



क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञों का कहना है कि हैप्पी सीडर, मल्चर, बेलर मशीन, बायो-डीकंपोजर, पशु चारे व बायोमास उद्योग से जोड़कर इस समस्या को कम किया जा सकता है। साथ ही किसानों को आर्थिक सहायता और स्थानीय समाधान देना जरूरी है।

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