Rooftop Solar: बिजली बिल से राहत, छत पर सोलर लगवा रहे लाखों परिवार, CEEW अध्ययन में बड़ा खुलासा
Solar Panel Installation: बढ़ती महंगाई के दौर में जहाँ रसोई गैस, पेट्रोल और रोजमर्रा के खर्च लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा रहे हैं, वहीं बिजली का बिल भी घरों का मासिक बजट बिगाड़ने वाला बड़ा खर्च बन गया है। ऐसे में अब बड़ी संख्या में परिवार बिजली बिल कम/Electricity Bill Savings करने के लिए रूफटॉप सोलर यानी छत पर सोलर पैनल लगाने का विकल्प चुन रहे हैं।
हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि देश में रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर परिवारों ने सोलर लगाने की सबसे बड़ी वजह बिजली बिल में बचत को बताया है। इससे साफ है कि लोग अब केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि अपनी जेब का भी हिसाब देख रहे हैं।
17,000 से अधिक परिवारों को किया गया शामिल
यह अध्ययन देश के 22 राज्यों के 308 जिलों में रहने वाले 17,000 से अधिक परिवारों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि लोग रूफटॉप सोलर को किस नजरिए से देखते हैं, उसे अपनाने का फैसला कैसे लेते हैं और इस दिशा में आगे बढ़ने में किन बातों का असर पड़ता है।
अध्ययन को Ministry of New & Renewable Energy (MNRE) के कार्यक्रम 'पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के दो वर्ष: एक करोड़ सोलर घरों की ओर बढ़ते कदम' के दौरान जारी किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि पीएम-सूर्य घर योजना/PM Surya Ghar Yojana शुरू होने के बाद आवासीय रूफटॉप सोलर की रफ्तार में उल्लेखनीय तेजी आई है। जहाँ 2017 से 2023 के बीच इसकी वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) 45 प्रतिशत थी, वहीं 2024 से 2026 के दौरान यह बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
बिजली बिल में बचत बना सबसे बड़ा कारण
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश परिवारों के लिए सोलर पैनल लगाने का सबसे बड़ा आकर्षण बिजली बिल में होने वाली बचत है।
अध्ययन के अनुसार 81 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्होंने या तो बिजली खर्च कम करने के लिए सोलर अपनाया है या अपनाने की योजना बना रहे हैं। लगातार बढ़ती बिजली खपत और महंगे बिलों के बीच यह विकल्प लोगों को आर्थिक राहत देता दिखाई दे रहा है।
तेजी से बढ़ रही है रूफटॉप सोलर की मांग
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में रूफटॉप सोलर सिस्टम की मांग में तेजी देखी गई है। पहले जहाँ इसे केवल बड़े शहरों और उच्च आय वर्ग तक सीमित माना जाता था, वहीं अब छोटे शहरों और कस्बों में भी लोग सोलर पैनल लगवाने में रुचि दिखा रहे हैं। इस बदलाव के पीछे का कारण है सस्ती तकनीक, आसान फाइनेंसिंग और सरकारी मदद, जिनके कारण यह बदलाव संभव हो रहा है।
सरकार की योजनाओं से मिल रही मदद
रूफटॉप सोलर/Residential Solar Power को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के तहत पात्र उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि पहले जहाँ लोग सोलर सिस्टम की लागत को लेकर हिचकिचाते थे, वहीं अब वे इसे लंबे समय के निवेश के रूप में देखने लगे हैं।
गाँवों और किसानों के लिए भी फायदेमंद
रूफटॉप सोलर केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी उपयोगिता बढ़ रही है। किसान अपने घरों, डेयरी यूनिट, गोदाम और कृषि से जुड़े अन्य ढांचों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली खर्च कम कर सकते हैं। इसके अलावा सिंचाई और कृषि कार्यों में भी सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे डीजल और बिजली पर निर्भरता घट रही है।
पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा
सोलर ऊर्जा को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत/Sustainable Electricity Solutions माना जाता है। इससे बिजली उत्पादन के लिए कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है। यानी सोलर अपनाने से एक तरफ परिवारों का खर्च कम होता है, तो दूसरी तरफ कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोगों को अभी भी किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
हालांकि सोलर की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन अभी भी कई लोग इसकी शुरुआती लागत, तकनीकी जानकारी की कमी और स्थापना प्रक्रिया को लेकर चिंतित रहते हैं।
लेकिन आने वाले वर्षों में भारत में रूफटॉप सोलर सेक्टर तेजी से विस्तार करेगा। बढ़ती बिजली मांग, महंगे ऊर्जा स्रोत और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत इस बदलाव को और गति देंगे।
ऐसे में रूफटॉप सोलर केवल बिजली बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि घरेलू बजट संभालने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने का एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है।