मानसून के 2 महीने बाद भी देश के आधे से ज़्यादा जलाशय खाली, सिर्फ़ 44% भरे प्रमुख जलाशय, सीडब्ल्यूसी के आँकड़ों ने बढ़ाई चिंता
दक्षिण-पश्चिम मानसून के लगभग दो महीने पूरे होने के बावजूद देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण संतोषजनक स्तर तक नहीं पहुंच सका है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में से आधे से अधिक अब भी आधे खाली हैं। इनमें 71 जलाशयों का जल स्तर उनकी कुल क्षमता के 40 प्रतिशत से भी कम है, जो जल उपलब्धता को लेकर चिंता का संकेत देता है।
हालांकि जुलाई के दौरान मानसून में सुधार होने से जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा है। इस सप्ताह 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) की कुल भंडारण क्षमता वाले प्रमुख जलाशयों में 81.479 बीसीएम पानी दर्ज किया गया, जो कुल क्षमता का 44 प्रतिशत है। जून में 37 प्रतिशत वर्षा की कमी के बाद जुलाई में मानसून के सक्रिय होने से जल भंडारण में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी मानसून सामान्य से 14 प्रतिशत कम बना हुआ है।
71 जलाशयों में क्षमता के 40% से भी कम पानी
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में से 71 जलाशयों का जल स्तर उनकी कुल क्षमता के 40 प्रतिशत से कम है। यानी मानसून के दो महीने बीतने के बाद भी देश के आधे से अधिक प्रमुख जलाशय आधे खाली हैं। इस सप्ताह जल भंडारण बढ़कर 81.479 बीसीएम तक पहुंचा, जो 183.565 बीसीएम की कुल क्षमता का 44 प्रतिशत है।
किस क्षेत्र में सबसे ज़्यादा और कहाँ सबसे कम जल भंडारण?
देश के पाँच क्षेत्रों में केवल पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में ही जल भंडारण 50 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। वहीं, दक्षिणी क्षेत्र के जलाशयों में केवल 34 प्रतिशत क्षमता तक ही पानी उपलब्ध है। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग क्षेत्रों में जल भंडारण की स्थिति अभी भी असमान बनी हुई है।
जुलाई में सुधरी स्थिति, अगले हफ़्तों में और बढ़ सकता है भंडारण
रिपोर्ट के अनुसार, जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 37 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई थी। इसके बाद जुलाई में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से जलाशयों में पानी का स्तर सुधरा है। इसके बावजूद अब तक मानसून सामान्य से 14 प्रतिशत कम है। केंद्रीय हिस्सों के ऊपर बने गहरे निम्न दबाव (डीप डिप्रेशन) के प्रभाव से देश के अन्य क्षेत्रों में भी भारी वर्षा होने की संभावना है, जिससे आने वाले हफ़्तों में जलाशयों का जल स्तर और बढ़ सकता है।