खेती और पशुपालन में नई क्रांति! रेशम आधारित फीड से कम होगा कार्बन उत्सर्जन, लूपवॉर्म का दावा

Gaon Connection | Apr 21, 2026, 15:05 IST
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खेती और पशुपालन में एक नई क्रांति आई है। लूपवॉर्म कंपनी ने रेशम के कीड़ों से पौष्टिक और पर्यावरण के अनुकूल फीड उत्पाद बनाए हैं। ये उत्पाद कार्बन नेगेटिव हैं, यानी उत्पादन से ज्यादा कार्बन वातावरण से कम करते हैं। हर किलो उत्पादन पर 2.56 किलो कार्बन की कमी आती है। यह पारंपरिक फीड की तुलना में बेहतर है।

खेती और पशुपालन से जुड़े उद्योगों में अब पर्यावरण को बचाने की दिशा में बड़ी पहल सामने आई है। 'बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट में कीट जैव प्रौद्योगिकी कंपनी लूपवॉर्म ने दावा किया है कि उसके रेशम के कीड़ों से बने फीड उत्पाद न सिर्फ पौष्टिक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं। कंपनी के अनुसार, ये उत्पाद “कार्बन नेगेटिव” हैं, यानी इनके उत्पादन से जितना कार्बन निकलता है, उससे ज्यादा वातावरण से कम हो जाता है।



हर किलो उत्पादन पर 2.56 किलो कार्बन की कमी


लूपवॉर्म द्वारा जारी स्वतंत्र लाइफ साइकिल असेसमेंट (एलसीए) रिपोर्ट के अनुसार, उसके रेशम-आधारित फीड उत्पाद—लूपमील और लूपऑयल—के एक किलो उत्पादन पर 2.56 किलो कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य की कमी होती है। यह आकलन “क्रैडल-टू-गेट” आधार पर किया गया है। इस अध्ययन को पीडब्ल्यूसी इंडिया ने आईएसओ 14040 और 14044 मानकों के तहत किया, जिसमें सिमा प्रो एलसीए टूल और रेसिपी मिडपॉइंट मेथडोलॉजी का उपयोग करते हुए 18 पर्यावरणीय मानकों पर मूल्यांकन किया गया।



पारंपरिक फीड के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन


अध्ययन में लूपमील और लूपऑयल की तुलना सोयामील, सोया ऑयल, फिशमील और फिश ऑयल जैसे पारंपरिक प्रोटीन स्रोतों से की गई। कंपनी के अनुसार, ये पारंपरिक स्रोत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ाते हैं और भूमि उपयोग, वनों की कटाई तथा समुद्री पारिस्थितिकी पर दबाव डालते हैं। इसके विपरीत, लूपवर्म के उत्पाद सभी पर्यावरणीय मानकों पर बेहतर साबित हुए हैं और साथ ही पाचन, स्वाद और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।



वैश्विक बाजार और भविष्य की दिशा


लूपवॉर्म के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी अभि गवरी ने कहा, “हमने अपने प्रभाव को केवल दावा करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से साबित करने की पहल की है। हमारा लक्ष्य है कि पशु पोषण को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाया जाए और गुणवत्ता व स्थिरता के बीच संतुलन कायम रखा जाए।” कंपनी पहले से ही यूरोप और जापान जैसे सख्त नियामक बाजारों में मौजूद है। यह अध्ययन उसे वैश्विक स्तर पर पर्यावरण मानकों और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा, साथ ही पशु आहार उद्योग को एक टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगा।

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