Mango Farming : आम पर बैगिंग, कीटनाशकों की छुट्टी, फसल के दुगुने दाम, निर्यात में आसान

Lata Mishra | Apr 10, 2026, 16:58 IST
Image credit : Gaon Connection Network
अगर किसानों को आम की फलत अच्छी और मंडी में अच्छा दाम मिलने के साथ ही निर्यात में आसानी चाहिए तो फलों की बैगिंग जरूर करनी जाहिए। इससे फल कीटों और कीटनाशकों से सुरक्षित रहता है। बैगिंग पर थोड़ा खर्च करके बाजार में रेट अच्छा मिल जाता है।
आम के बौर को कीट पहुँचा रहे हैं नुकसान।

बदलते मौसम में कीटों के बढ़ते प्रकोप से आम की फसल को बचाने के लिए किसानों को अधिक कीटनाशकों का स्प्रे करना पड़ रहा है। इससे खर्च बढ़ने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता खराब होने के साथ-साथ फलों में कीटनाशकों के अवशेष रहने से निर्यात में भी दिक्कतें आती हैं। वैज्ञानिक इन सभी समस्याओं से किसानों को बचने के लिए फलों की (थैलाबंदी) बैगिंग का सलाह देते हैं। आम को जब निर्यात किया जाता है तो टेस्टिंग में ये देखा जाता है कि फलों में कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से अधिक तो नहीं हैं। कई कई बार तो पूरी की पूरी खेप ही वापस आ जाती है।






आम की बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा कमाई के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ सबट्रॉपिकल हार्टिकल्चर (CISH) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार शुक्ला किसानों को सलाह देते हैं, “बदलते मौसम और कीटों के बढ़ते प्रकोप से फलों को बचाने का सबसे कारगर तरीका 'फ्रूट बैगिंग' या फलों की थैलाबंदी होती है। जब आम का फल 50 से 100 ग्राम का हो जाए, तब उस पर विशेष तरह का कवर चढ़ा देने से वह न सिर्फ बारिश और ओलों की चोट से बचता है, बल्कि कीटनाशकों के सीधे संपर्क से सुरक्षित रहता है। ऐसे सुरक्षित आमों की बाजार में मांग बहुत ज्यादा है। किसान इस आम का बाजार में मूल्य सामान्य के मुकाबले दोगुना मिलता है।”



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वह आगे बताते हैं, “दरअसल, जब किसान आम पर बैगिंग कर देता है, तो उसे फलस को बचाने के लिए बार-बार जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना पड़ता। आज दुनिया के बाजार में 'रेसिड्यू फ्री' (रसायन मुक्त) फलों की भारी मांग है।”



एक किलो आम पर बैगिंग का खर्च लगभग 12 से 14 रुपये आता है। जहां साधारण आम बाजार में 30-35 रुपये किलो बिकता है, वहीं बैग वाला 'प्रीमियम आम' 70 से 100 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाता है।





डॉ. शुक्ला बताते हैं, “यह बैग फल को सीधे धूप, बेमौसम बारिश और सबसे खतरनाक 'फ्रूट फ्लाई' (फल मक्खी) से बचाता है, जो फल के अंदर अंडे देकर उसे सड़ा देती है।”



कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अनुसार भारत दुनिया में सबसे अधिक आम का उत्पादन करता है। हर साल करीब 24 मिलियन मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। उत्पादन में यूपी सबसे ऊपर है। वर्ष 2025 जिसमें करीब 540 करोड़ रूपये का आम निर्यात किया गया है। भारत में करीब 1000 आम की किस्में पायी जाती हैं।

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