मूंगफली पर बड़ा साइंस ब्रेकथ्रू: “अब छिलका नहीं बनेगा झंझट! नई तकनीक से आसान होगी मूंगफली प्रोसेसिंग”
हाल ही में International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics (ICRISAT) के वैज्ञानिकों ने मूंगफली (ग्राउंडनट) की प्रोसेसिंग से जुड़ी एक अहम समस्या का समाधान खोज निकाला है। उन्होंने “ब्लैंचेबिलिटी” यानी बीज की बाहरी त्वचा (seed coat) को आसानी से हटाने की क्षमता के पीछे छिपे जीन (genetics) को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह खोज खाद्य उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि मूंगफली से बनने वाले उत्पादों में यह प्रक्रिया अनिवार्य होती है।
ब्लैंचेबिलिटी क्या है और क्यों जरूरी है?
ब्लैंचेबिलिटी वह गुण है, जिसके जरिए मूंगफली के दानों की बाहरी परत को आसानी से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया चॉकलेट, पीनट बटर, स्नैक बार और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने से पहले की जाती है। लेकिन कई मौजूदा किस्मों में यह प्रक्रिया आसान नहीं होती, जिससे प्रोसेसिंग में समय, लागत और गुणवत्ता-तीनों प्रभावित होते हैं।
रिसर्च में क्या हुआ नया खुलासा?
ICRISAT के वैज्ञानिकों ने 184 अलग-अलग मूंगफली किस्मों (accessions) का अध्ययन किया और उन जीन क्षेत्रों (genomic regions) की पहचान की जो ब्लैंचेबिलिटी को नियंत्रित करते हैं। इस शोध में छह महत्वपूर्ण जेनेटिक मार्कर (KASP markers) की पहचान की गई, जिनमें से एक खास मार्कर क्षेत्र “S17_133752226” उच्च ब्लैंचेबिलिटी से जुड़ा पाया गया। इसके अलावा, शोध में यह भी पता चला कि कुछ जीन कोशिका दीवार (cell wall) के बदलाव, मेटाबॉलिज्म और बीज की बाहरी परत को ढीला करने में भूमिका निभाते हैं, जिससे त्वचा आसानी से अलग हो जाती है।
बेहतर किस्मों की पहचान
वैज्ञानिकों ने कुछ पारंपरिक किस्मों (landraces) की भी पहचान की, जिनमें ब्लैंचेबिलिटी बहुत अच्छी पाई गई। जैसे ICG297, ICG11515 और ICG14710 जैसी किस्में बारिश के मौसम में बेहतर प्रदर्शन करती हैं, जबकि ICG9507 और ICG9315 जैसी किस्में पोस्ट-रेनी सीजन में अच्छी ब्लैंचिंग क्षमता दिखाती हैं। खास बात यह है कि “Spanish bunch” प्रकार की किस्मों में 60% से अधिक ब्लैंचिंग दक्षता दर्ज की गई।
खाद्य उद्योग को कैसे मिलेगा फायदा?
इस खोज से खाद्य उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। आसान तरीके से बीज की त्वचा हटाने वाली किस्में विकसित होने से प्रोसेसिंग तेज होगी, लागत कम होगी और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी। इससे किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि उनकी फसल की मांग और मूल्य दोनों बढ़ सकते हैं।
संभावित चुनौतियां और संतुलन की जरूरत
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बीज की त्वचा पूरी तरह हटाने की क्षमता बढ़ाने से कुछ चुनौतियां भी हो सकती हैं। बीज की बाहरी परत प्राकृतिक सुरक्षा देती है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व भी होते हैं। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य की ब्रीडिंग में प्रोसेसिंग सुविधा और पोषण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
विज्ञान से उद्योग और किसानों को नई दिशा
ICRISAT की यह खोज कृषि अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है। यह दिखाती है कि कैसे आधुनिक जेनेटिक्स और रिसर्च के जरिए खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। आने वाले समय में इस तकनीक के आधार पर नई और बेहतर मूंगफली किस्में विकसित होंगी, जो किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं तीनों के लिए फायदेमंद साबित होंगी।