राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव! ‘सार्थक-PDS’ योजना को मंजूरी, जानिए लाभार्थियों को कैसे मिलेगा स्मार्ट और पारदर्शी वितरण
केंद्र सरकार ने “सार्थक-पीडीएस” योजना के तहत दो बड़ी योजनाओं को मिलाकर नई एकीकृत व्यवस्था तैयार की है। इसमें राशन के परिवहन, डीलरों के मार्जिन और स्मार्ट तकनीक आधारित पीडीएस सिस्टम को एक साथ जोड़ा गया है। योजना के तहत AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
इसका मकसद राशन वितरण में लीकेज रोकना, लाभार्थियों तक सही समय पर खाद्यान्न पहुंचाना और पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी और देश के 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिलेगा।
क्या है ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना?
सरकार ने जिन दो योजनाओं को मिलाकर यह नई योजना बनाई है, उनमें पहली योजना राज्यों को राशन के परिवहन और राशन दुकानदारों के कमीशन के लिए सहायता देने से जुड़ी थी। दूसरी योजना “स्मार्ट पीडीएस” थी, जिसके जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तकनीकी सुधार किए जा रहे थे। अब इन दोनों को मिलाकर “सार्थक-पीडीएस” नाम की एक व्यापक योजना बनाई गई है, ताकि राशन वितरण से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को एक मंच पर लाया जा सके।
सरकार आखिर क्या बदलना चाहती है?
सरकार का फोकस अब सिर्फ राशन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को स्मार्ट और डिजिटल बनाने पर है। इसके तहत राशन की ढुलाई से लेकर लाभार्थी तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इससे राशन चोरी, फर्जी लाभार्थी और वितरण में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। साथ ही राशन दुकानदारों को भी समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
AI और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का होगा इस्तेमाल
नई योजना में पहली बार AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), मशीन लर्निंग, NLP और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों को बड़े स्तर पर शामिल किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक इन तकनीकों के जरिए:
- राशन वितरण की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी
- शिकायतों का AI आधारित समाधान किया जाएगा
- डेटा आधारित निरीक्षण संभव होगा
- फर्जीवाड़े और लीकेज पर नजर रखी जाएगी
- राज्यों के लिए कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे। इसके अलावा पीडीएस सिस्टम को ISO प्रमाणित तकनीकी ढांचे से जोड़ा जाएगा ताकि सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।
राशन डीलरों को भी मिलेगा फायदा
सरकार ने राशन दुकानदारों के कमीशन और खाद्यान्न परिवहन के लिए राज्यों को दी जाने वाली केंद्रीय सहायता जारी रखने का फैसला किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राशन अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी रुकावट पहुंचे और राशन डीलरों को आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
81 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश के करीब 81.35 करोड़ लोग सरकारी राशन योजना का लाभ लेते हैं। सरकार का कहना है कि नई “सार्थक-पीडीएस” योजना इन सभी लाभार्थियों तक बेहतर और पारदर्शी तरीके से खाद्यान्न पहुंचाने में मदद करेगी। यह योजना खासतौर पर गरीब, ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए राहत देने वाली मानी जा रही है।
पहले से चल रहे डिजिटल सुधारों को मिलेगा और विस्तार
सरकार पिछले कई वर्षों से पीडीएस सिस्टम को डिजिटल बनाने पर काम कर रही है। इसी के तहत “मेरा राशन”, “अन्न मित्र”, “अन्न सहायता” और “राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड” जैसी पहलें शुरू की गई थीं। 1 अप्रैल 2023 से लागू स्मार्ट पीडीएस योजना के जरिए राशन कार्डों का डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग, ई-पीओएस मशीनें, ऑनलाइन राशन आवंटन,
कंप्यूटरीकृत सप्लाई चेन जैसी व्यवस्थाएं पहले ही लागू की जा चुकी हैं। अब “सार्थक-पीडीएस” योजना इन्हीं सुधारों को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाएगी।
सरकार को क्या उम्मीद है?
सरकार का मानना है कि नई योजना से देश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही गरीब लोगों तक राशन पहुंचाने की प्रक्रिया ज्यादा तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकेगी। सरकार का मानना है कि अगर तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल हुआ, तो आने वाले वर्षों में पीडीएस सिस्टम में भ्रष्टाचार और लीकेज को काफी हद तक कम किया जा सकता है।