10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँचे भारतीय चावल के निर्यात भाव, ₹35000 प्रति टन तक पहुँची क़ीमतें, जानें वजह
भारत से चावल के निर्यात भाव इस सप्ताह लगभग 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं। बिजनेस लाइन के अनुसार, धान की सीमित आवक, नई फ़सल को लेकर बढ़ती चिंताएँ और कई इलाक़ों में असमान मानसूनी बारिश के कारण बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है। यही वजह है कि निर्यातकों ने अपनी ख़रीद लागत बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चावल की पेशकश (ऑफ़र प्राइस) भी बढ़ा दी है। मौसम से जुड़ी आशंकाओं का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि थाईलैंड, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रमुख चावल उत्पादक देशों के बाज़ारों में भी देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारत, थाईलैंड और वियतनाम दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल हैं। ऐसे में इन देशों में मौसम, उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी किसी भी चुनौती का सीधा असर वैश्विक क़ीमतों पर पड़ता है। इस बीच, बांग्लादेश में बाढ़ और मौसम की मार से आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि वियतनाम में नई फ़सल की आवक शुरू होने से वहाँ निर्यात भाव में कुछ नरमी देखने को मिली है। दूसरी ओर, थाईलैंड में घरेलू कारणों से चावल की क़ीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारत में चावल के निर्यात भाव बढ़े, धान की सीमित आपूर्ति बनी वजह
भारत के 5 प्रतिशत टूटे हुए उबले (पारबॉयल्ड) चावल का निर्यात भाव बढ़कर 356-361 डॉलर प्रति टन (लगभग ₹34,354 से ₹34,837 प्रति टन) हो गया है। पिछले सप्ताह यह 352-357 डॉलर प्रति टन (करीब ₹33,968 से ₹34,451 प्रति टन) था। वहीं, 5 प्रतिशत टूटे हुए सफ़ेद चावल की क़ीमत 355-360 डॉलर प्रति टन (लगभग ₹34,258 से ₹34,740 प्रति टन) दर्ज की गई है।
कोलकाता के एक निर्यातक ने बिजनेस लाइन से कहा कि धान की बाज़ार में आवक अभी भी सीमित है, जिससे इसकी क़ीमतें बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, ख़रीद लागत बढ़ने के कारण निर्यातकों ने अपने ऑफ़र प्राइस में भी बढ़ोतरी की है।
थाईलैंड और बांग्लादेश में भी मौसम का असर, आपूर्ति को लेकर चिंता
थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल का भाव बढ़कर 450-460 डॉलर प्रति टन (करीब ₹43,425 से ₹44,390 प्रति टन) हो गया, जो पिछले सप्ताह 445-450 डॉलर प्रति टन (लगभग ₹42,943 से ₹43,425 प्रति टन) था। रिपोर्ट्स के अनुसार, क़ीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू कारणों से हुई है। उनके अनुसार, अभी केवल नियमित ग्राहक ही ख़रीदारी कर रहे हैं और बड़े ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। साथ ही आने वाली फ़सल की पैदावार को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अभी बाज़ार में माँग अपेक्षाकृत कमज़ोर बनी हुई है और अगले महीने आपूर्ति की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
उधर, बांग्लादेश में लगातार मौसम संबंधी झटकों और सीमित आपूर्ति की आशंका के कारण चावल, विशेषकर बेहतर गुणवत्ता वाली किस्मों की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों के मुताबिक़, धान की बढ़ती क़ीमतों और हालिया बाढ़ ने कम-से-कम 12 ज़िलों में 28,610 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फ़सल और नर्सरी को नुक़सान पहुँचाया है। इससे पहले प्री-मानसून की भारी बारिश और ऊपरी इलाक़ों से आए पानी के कारण देश के उत्तर-पूर्वी वेटलैंड क्षेत्र में गर्मी के मौसम की धान फ़सल भी प्रभावित हुई थी, जिससे बांग्लादेश में चावल उत्पादन में 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक की कमी का अनुमान लगाया गया है।
वियतनाम में नई फ़सल से नरम पड़े भाव, निर्यात 53 लाख टन के पार
वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल का भाव घटकर 430 डॉलर प्रति टन (लगभग ₹41,495 प्रति टन) रह गया, जबकि पिछले सप्ताह यह 445-450 डॉलर प्रति टन (करीब ₹42,943 से ₹43,425 प्रति टन) के बीच था। इस बीच, फ़िलीपींस ने वियतनाम से आने वाले चावल के आयात के लिए सैनिटरी और फ़ाइटोसैनिटरी मंज़ूरियों की निगरानी और सख़्त कर दी है। वियतनाम ने जुलाई के पहले पखवाड़े में 2,74,749 टन चावल का निर्यात किया। इसके साथ ही 15 जुलाई 2026 तक देश का कुल चावल निर्यात 53 लाख टन (5.3 मिलियन टन) तक पहुँच गया है।