Deep Sea Fishing: गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का मिलेगा अधिकार, मछुआरों के लिए क्या बदलेगा?
भारत सरकार समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय मछुआरों को गहरे समुद्र (Deep Sea) में सुरक्षित, कानूनी और टिकाऊ तरीके से मछली पकड़ने का अवसर देना है। सरकार का मानना है कि इससे मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरों की आय में भी वृद्धि होगी। इस पहल की शुरुआत 9 जुलाई को भुवनेश्वर में होगी।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन Odisha University of Agriculture and Technology (OUAT) में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में High Seas में Sustainable Harnessing of Fisheries के लिए Letters of Authorisation (LoA) जारी करने की शुरुआत करेंगे। इसी दौरान Odisha Deep Sea Fishing Mission Document का भी शुभारंभ किया जाएगा।
क्या है हाई सीज़ (High Seas)?
भारत के समुद्री तट से 200 समुद्री मील तक का क्षेत्र विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone-EEZ) कहलाता है। इसके बाहर का समुद्री क्षेत्र High Seas कहलाता है। इस क्षेत्र पर किसी एक देश का अधिकार नहीं होता और यहाँ मत्स्य पालन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किया जाता है। भारत के अधिकांश मछुआरे अभी तटीय क्षेत्रों में ही मछली पकड़ते हैं। लेकिन गहरे समुद्र में ट्यूना जैसी कई उच्च मूल्य वाली मछलियाँ उपलब्ध हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि भारतीय मछुआरे भी आधुनिक तकनीक के साथ इन संसाधनों का लाभ उठा सकें।
क्या होता है Letter of Authorisation?
Letter of Authorisation (LoA) एक आधिकारिक अनुमति-पत्र है। इसके ज़रिए भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाज़ तय नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए हाई सीज़ में मत्स्य पालन कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल मछली पकड़ने की अनुमति देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि समुद्री संसाधनों का दोहन वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से हो। इससे अवैध, अनियंत्रित और बिना रिपोर्ट वाले मत्स्य शिकार (Illegal, Unreported and Unregulated Fishing) पर नियंत्रण लगाने में भी मदद मिलेगी।
मछुआरों को क्या होगा फ़ायदा?
- इस नई व्यवस्था से मछुआरों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का नया अवसर मिलेगा।
- ट्यूना जैसी अधिक कीमत वाली समुद्री मछलियों तक पहुँच बढ़ेगी।
- आधुनिक नौकाओं और नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
- समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि हो सकती है।
- तटीय राज्यों के मछुआरों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा।
क्या है Odisha Deep Sea Fishing Mission?
कार्यक्रम के दौरान Odisha Deep Sea Fishing Mission Document भी जारी किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य राज्य के मछुआरों को आधुनिक डीप सी फ़िशिंग से जोड़ना है। इसके तहत आधुनिक नौकाओं, प्रशिक्षण, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और बाज़ार तक पहुँच जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की योजना है। इस पहल से ओडिशा के मछुआरे केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गहरे समुद्र में अधिक मूल्य वाली मछलियाँ पकड़कर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।
ब्लू इकॉनमी को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य समुद्र से जुड़े संसाधनों का ऐसा उपयोग करना है, जिससे आर्थिक विकास भी हो और समुद्री जैव विविधता भी सुरक्षित रहे। डीप सी फ़िशिंग इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत दुनिया के प्रमुख मत्स्य उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन अभी भी अधिकांश मछुआरे तटीय क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। ऐसे में वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने से मछुआरों की आय बढ़ाने, समुद्री खाद्य निर्यात को मज़बूत करने और देश की ब्लू इकॉनमी को गति देने में मदद मिल सकती है।